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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, January 20, 2013

काश ! मेरि बि क्वी पार्टी हूंद !

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा
                                       काश ! मेरि बि क्वी पार्टी हूंद !
                                      चबोड्या: भीष्म कुकरेती
(s=-माने आधा अ )
उना कोंग्रेसs चिंतन शिविर म चिंतन से पता चौल बल जब तलक राजकुमार तै औपचारिक ढंग से राजगद्दी पर नि बिठये जालो कोंग्रेसौ कुण लोगुं तै बौगाण मुस्किल ह्वे जालो अर राजकुमार उपाध्यक्ष बणणो तैयार ह्वे गेन . त इना मेरि घरवळि बुलण लगि ,"काश ! तुमर बि क्वी पोलिटिकल पार्टी होंद धौं !"
"त क्या भारत बिटेन गरीबी खतम ह्वे जान्दि ?" मीन पूछ

घरवळिन फटकार लगांद बोलि ," तुमर मिजाज अबि बि आलो -पालो खाणों च . ग्लोबलिजेसन क जमानो म बि तुम परो समाजवादी भूत पिचास नि उतर . अचकाल राजनीतिम गरीबी हटाणो बात क्वी नि करदो बस अमीरी हथियाणो बात करदो ."

मीन पूछ ," त तू किलै चांदी बल मेरि बि क्वी पोलिटिकल पार्टी होंदि ?"
वींन बोलि ," तुमर एक राजनैतिक घरपऴया पार्टी होंदि . तुम इ सब कुछ होंदा . हां दिखाणो बान पार्टीम अंदरूनी चुनाव बि होंदा . तुम नौ साल बिटेन साझा सरकार चलांदा . अर "

" अर फिर क्या ?" मीन बात काट .
"नौ साल साझा राज करणों बाद तुम तै अकल आन्दि बल अपण नौनु तै अब आम सरकारी गैंडा जन खुले आम घुमणो आजादी दीण चयेंद। याने कि अपण राजकुमारौ ताजपोशी करण चयेंद . त तुम बि जसपुरम एक चिंतन शिविर लगाणो नाटक करदा।" घरवळिन बथै .
"तो " मीन पूछ
"फिर नौ साल तलक धनी -मातवरों एजेंट बौणिक तुम धनियों तै हौर धनी बणाणो पूरो जोर लगांदा अर उख सयुंक्त राष्ट्र संघ तुम तै बार बार चितळ करणों रौंद बल भारतम गरीबी दूर नि होणि च पण तुम त धनी -मातवरों गुलामिम व्यस्त रौंदा। अर फिर जसपुर चिंतन शिविरम तुम अपण कार्यकर्ताओं तै संबोधित करदा कि अब बगत ऐ गे कि गरीबी बि दूर होण चयेंद . फिर तुमारो पब्लिक रिलेसन विभाग पत्रकारों तै बथांद बल पार्टी अध्यक्ष भारतै गरीबी से आहत च। बस मीडियाम धूम मचि जांद बल पार्टीक मालिक भारतम गरीबी से चिंतित च।" घरवळिन बोलि
"ह्यां पण ! क्वी इन बि त पूछल बल नौ साल तलक झक रावो मारणा जु अब चिंतन शिविरम याद आयि कि भारतम गरीबी बि च ." मीन टोकि
वा अणसुणि ह्वेक बोल्दि गे ," क्वी तुम तै बथांदो बल नौ साल से पार्टी का मंत्री संतरी घूसखोरीम लिप्त छन अर यां से पार्टी बदनाम ह्वे ग्यायि .फिर चिंतन बैठकम तुम आम कार्यकर्ताओं तै संबोधित करदा अर बोल्दा बल अब भारतम भ्रष्टाचार भौत बढ़ी गे हमारा आम कार्यकर्ताओं तै घूसखोरी -भ्रष्टाचार से दूर इ नि रौण चयेंद बल्कणम घूसखोरी-भ्रष्टाचार रुकणो बान विरोधी पार्टी क राज्योंम घनघोर आन्दोलन बि चलाण चयेंद। प्रेस रिपोर्टरों तै बथाये जांद बल पार्टी मालिक विरोधी दलों शाषित राज्यम भ्रष्टाचार से व्यथित छन और पार्टी मालिकन कार्यकर्ताओं तै आह्वाहन कार कि विरोधी दलों शाषित राज्यम भ्रष्टाचारो विरुद्ध आन्दोलन छिड़े जावो ."

मीन बीचम बोलि ," ह्यां ! क्वी त पूछि देलो बल जब पार्टी का उच्च पदासीन मंत्री -संतरी भ्रष्टाचारम लिप्त छन त ऊं तैं किलै नि अड़ाणा छंवां ? आम कार्यकर्ताओं तै अड़ाणो मतबल ?"

घरवळि बुल्दि गे ," फिर कुछ कार्यकर्ता याद दिलांदा बल जनान्युं बारम बि चिंतन ह्वे जांद त ठीक छौ . फिर तुमारो एक स्टीरिओ टाइपो बयान प्रेस तै जारी करे जांद बल पार्टी मालिक स्त्रियों दशा सुधारणो बान अति चिंतित छन ."
मीन बोलि ,: ह्यां पण ! क्वी पूछल त सै बल पिछ्ला नौ सालोंम स्त्रियों दशा सुधारणो बान सरकारन क्या क्या कार ?अर ऐन चुनावों से पैल इ जनान्यूं चिंता कनै हूणी च ? "

वा बुल्दि गे ," फिर सोची समझी चाल से भारतम युवावों फिकर पर रुवारोळी होन्दि . अस्सी पिचासी सालो मंत्री रुंदा बल भारतम भारतीय युवा गुमराह होणु च; युवाओं तै समुचित रोजगार नी मिलणु च ; भारत कु युवा कुंठित च , भारत कु युवा दिशाहीन च, भारत कु युवा आशाहीन च , भारत कु युवा कांतिहीन च , निरुत्साहित च . फिर चिंतन शिविरम एकी आवाज उठदी कि पार्टी मालिक को युवा नौनु जो पिछ्ला दस साल से पार्टी क महा मंत्री च वूं तै उपाध्यक्ष बणायों बगैर भारतीय युवाओं तै रोजगार नि मेल सकुद . जब तलक राजकुमार जी पार्टीक उपाध्यक्ष नि बौणला तब तलक भारतीय युवा गुमराह रालो ..अर फिर एक आवाज से राजकुमार तै भारतीय युवाओंम उत्साह लाणों पार्टी उपाध्यक्ष घोषित करे जांदो।"

मीन बोलि ," पण क्वी ना क्वी त इन पूछल इ कि युवराज राजकुमार त पिछ्ला नौ सालों से सपार्टीम अर सरकारम बकुछ छयो त फिर किलै भारतीय युवा बेरोजगार छया ? किलै भारतीय युवा कांतिहीन , दिशाहीन , निरुत्साहित छाया ?"

मेरि घरवळिन राज ख्वाल ," प्रेस अर जनता क स्मरण शक्ती कमजोर होंदि बस हमार बड़ो नौनु तै उपाध्यक्ष बणन से जनता सुपिन दिखण मिसे जालि कि भारत की दशा सुधरि जाली।प्रेस बि हमर राजकुमार से आशान्वित ह्वे जालि ..बल भारत की दशा सुधरलि"

मीन पूछ ," क्या सचमुच मा लोग सुपिन दिखण बिसे जाला कि युवराज तै उपाध्यक्ष बणान से ही भारत की दशा सुधरली ?"

वींन कॉन्फिडेंस से ब्वाल ," क्यों सन सैंतालीस से इनि नी होणु च ?"
मीम क्वी जबाब नी छौ किलै कि पोलिटिकल पार्टी जनता तै बौगाणो बान इनि नै नै खिल्वणि लाणा रौंदन अर जनता बि राजनैतिज्ञो भकलौण्यु मा आणि इ रौंदी .

CopyrightBhishma Kukreti 20/01/2013