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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, August 5, 2014

भगवान कै दुख्यर तैं अस्पताळ नि भिज्यां

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

                                           घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती                           (s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )
 एक त दुख्यर याने बीमार हूण इ निकमु हूंद अर फिर दुख्यर तैं अस्पताळ  भर्ती हूण पोड़ त क्या बुन ! सरकारी अस्पताळ त छवाड़ो मेडिकल इन्सुरेंस का बल पर चलण वाळ प्राइवेट नर्सिंग होम या मेडिकल सेंटर बि दुख्यरो कुण नरकिस्तान ही हूंद। 
दुख्यर तैं अस्पताळम भर्ती हूण मा उथगा   परेसानी नि हूंद जथगा परेसानी मिलण वाळु से हूंद।  एक बीमार अभिमन्यु अर खैरख्वाह पुछण वाळ सात महारथी कौरव जन सज हूंद विजिटिंग हावर्स मा। 
बीमार अभिमन्यु हॉस्पिटल बेड मा पड्युं च अर गुरु द्रोणाचार्य पुछद , " अभिमन्यु अरे तुमन  अस्पताळ भर्ती हूण से पैल पुछण त छौ कि ये अस्पताळम भर्ती हूँ कि ना।  हमर पट्टी वाळु कुण यु अस्पताळ बड़ु अपसकुन्या च।  दस मादे छै त मोरिक ही जांदन वापस , अर बकै कुछ दिन बाद अवश्य ही दुसर हॉस्पिटल भर्ती हूंदन।  अब  अर्जुन त दुबई च त वै कुण क्या बुलण पर त्यार छुटु बाडा भीम त खस बुद्धिक च पर  बड़ु बाडा युधिष्ठिर तैं त  अकल हूण चयेणी छे कि जवान नौनु तैं कख भर्ती करणाइ।  छ कख छन त्यार बाडा -काका ?"
दुख्यर अभिमन्यु - बड़ु बडा तैं अस्पताळ से एलर्जी ह्वे जांद , भीम बाडा त रातै ड्यूटी पर म्यार दगड़ रौंद , नकुल काका अर सहदेव काका दवाई लाणो बजार जयां छन। "
कृपाचार्य - अब बतावो इन मा त अर्जुनाकि मवासी घाम लगणी च।  काका -बाडा मादे क्वी नी च कि पता नि दुख्यर तैं कब क्या जरुरत ह्वे जा ! इन मा ले बचण रै अभिमन्यु तीन हैं ? उन त तु ठीकि दिख्याणि छे।  लगणु नी च कि तु बीमार ह्वेली ?
जयद्रथ - हाँ यु अभिमन्यु दिख्याणु त निरोगी च पर निरोगी दिख्याण से क्या हूंद ? परार म्यार ममाक नौनु इनि निरोगी , टंगटंगु दिख्याणु छौ।  पर होणीन त हूणी छे हम सात लोग दिन मा वै तैं दिखणो बि गे छया। स्याम दै ममाक  फोन आयि कि मड़घट पौंछो। 
दुःशासन - हाँ जीजा ठीक बुलणा छन।  मी बि दीदी अर जीजा दगड़ अस्पताल गे छया।  खूब खाणु छौ , बचळयाणु छौ।  दुसर दिन डिस्चार्ज हूणु वाळ छौ।  
अश्वथामा - मौत जब आंदि त बतैक थुड़ा आंदि।  मौत त तूफ़ान जन आंद अर मारिक चली जांद। पोर मेरी फैक्ट्री मा न्यूक्लियर वेस्ट विभाग मा एक चरबरो युवा छौ।  चेस्ट पेन ह्वे त मीन  इ वै तैं अस्पताल भर्ती कार।  दिख्याण मा तंदुरस्त पर चौथु दिन भग्यान ह्वे गे। 
कर्ण -होतव्य तैं कु रोक सकुद ? अच्काल प्राइवेट हॉस्पिटलुं मा बि डाक्टर कख ध्यान दीणा छन।  प्राइवेट हॉस्पिटलुं मा त डाक्टर की नजर मरीजौ बीमारी पर कम रौंद इन्सुरेंस कंपनी वाळुं कुण बिल बढाण पर ज्यादा हूंद।  ये चेक अप वो चेक अप , यु ट्यस्ट , स्यु ट्यस्ट। मरीज त ट्यस्ट अर चेक अप करांद -करांद इ मोर जांद। 
दुर्योधन - बेटा अभिमन्यु चिंता नि कौर हाँ कि इख अर्जुन नी च या त्यार ममा कृष्ण नी च।  हम तेरी पूरी देखभाल करला।  अर तब बि तू मोरि ही जैल तो तेरी कसम तेरी तिरैं बरखी धूम धाम से करला हम। तिरैं -बरखीक तू चिंता नि कौर हाँ !
नर्स (नराज ह्वेक ) - तुम लोग मरीज का क्या लगदवां ?
सबि - कनो ? हम ख़ास रिस्तेदार छंवां अर मरीज से सहानुभूति जताणो अयाँ छंवां। 
नर्स - सहानुभूति जताणो मतलब इ त नि हूंद कि नकारात्मक बातुं से दुख्यर तैं मानसिक रूप से मारि द्यावो।  जावो इख बिटेन जख सकारात्मक बात करण चयांदी तुम सहानुभूति का नाम पर मरीज तैं डराणा छंवां।  भागो -भागो 




Copyright@  Bhishma Kukreti  5/8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 

  
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