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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Friday, August 29, 2014

जिस कविता पर दर्शक झूम उठते हैं

माता ब्रांडी ,पिता ओल्डमौंक 
 कवि -हरीश जुयाल 
ओम नमो गुरु को आदेशा
माता ब्रांडी ,पिता ओल्डमौंक 
तीन लोक तारिणी  , थ्री ऐक्स डागिणी लाल नागिणी 
चेतक बियर को आदेशा
व्हिस्की पीर को आदेशा
टिंचरी जोगिणी कु जुहार
ठर्रा जोगी कू नमस्कार
अनंत झांझ्यों  मस्तक चढ़ाई
फुलमुंड्या कच्ची तुम्हारो भाई
कंटर नाथ कच्ची थड़कंतो आयो
जिकुड़ी जळन्तो आयो
अन्दडी सड़न्तो आयो
भट्टा बैठन्तो आयो
ख्याळा म्याळौ  मा तेरी बयाळ चले
दफ्तर बजारौं  मा तेरी बयाळ चले
बरात की जिया  तेरी बयाळ चले
दावत की हिया तेरी बयाळ चले
दस  दिशा चार खूंटो कुमौ गढ़वाल जले
किसने हाणी किसने छाणी
छाण छूण के कांच कु गिलास ल्यायो
फिर सर नीचे टांग अगास करायो
एक दिन झांझी ले बोतळ पर ताणी लगायो
लूण की गारी में प्याज की दाणी चपायो
पैगमारी मुष्टिमारी
लात मारी हाथ मारी
किस किस पै हाथ चलायो
किस किस पै लात चलायो
पटवारी पे हाथ चलायो
महिलावर्ग पै लात चलायो
हाथ चलाकर पणकोखी फोड़े
लात गज्याके टंगडी तोड़े
टंगड़ी तोड़ के जेल डळवायो
पुलिस की दुल्लती को सल्लाम
दीवान की हस्ती को सल्लाम
टूटती सांकी को सल्लाम
महिला मंगलदल घाण पड़े (  मूसल की मार ) 
पब्लिक का डांड पड़े
जेल साँचा पियक्कड़ कांचा
दारु छोड़ कुटजोवाचा
नी छोड़ी तो
च्यस -च्यस -घुट -घुट
सक्क सक्क
स्वाहा

Copyright@ Harish Juyal

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