उत्तराखंडी ई-पत्रिका की गतिविधियाँ ई-मेल पर

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

उत्तराखंडी ई-पत्रिका

Monday, August 11, 2014

बस इनै -उनै का कुछ विचार

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )


 अपण घौरम कुत्ता सरदार अर दुसरौ चौकम पूछ दबायुं  बिरळ  मुहावरा बदलेण चयेंद अब त नै मुहावरा च भारतीय क्रिकेट टीम -भारत मा डबल सेंचुरी अर भैर डबल जीरो !
भारत सरकार संसद या लाल किला बिटेन धै लगाणी रौंद छे बल भारतीय खेलों तैं बढ़ावा दिए जाल पर कुछ नि ह्वे उल्टां कबड्डी  बुसे गे छे अर अब जब स्टार स्पोर्ट्स कब्बडी स्पोंसर करण लग तो अजाण इंडियन यूथ बि रस्ता मा बरड़ाण लग गे बल बड कबड्डी -कबड्डी  …। 
पैल हर मर्ज की दवा राष्ट्रीकरण छौ अब हर मर्ज की दवा गैरसरकारी करण ह्वे गे। 
संसद की कार्यवाही अच्काल दूरदर्शन लाइव दिखांद किन्तु कैमरामैन की आफत ऐ गे कि कैमरा घुमान्द -घुमान्द भौत सा सांसद सींद पकड़े जांदन। 
संसद की लाइव कार्यवाही से ही पता चौल कि जौं सांसदुं पर बलात्कार  आदि का केस छन वो भारत मा बढ़दो बलात्कार की घटनाओं से अति चिंतित छन। 
संसद की लाइव कार्यवाही से ही पता चौल कि सांसद या भौत सा समय मंत्री बि बगैर गहन अध्ययन का बुलणा रौंदन। 
डा रमेश निशंकन हिमालयी नीति पर लोकसभा मा बढ़िया भाषण दे पर कै बि कॉंग्रेसिन डा पोखरियाल तैं नि पूछ कि अपण मुख्यमंत्री काल मा डा निशंकन क्या हिमालयी नीति शुरू कार या अपणाइ। 
अच्काल कॉंग्रेस बि सोसल मीडिया मा कार्यशील ह्वे त ग्यायि च किन्तु कॉंग्रेस्युं तैं विरोध करण अबि बि नि आयि। 
बहुत सा टीवी वाळ बीस दिन पैल सूर्य का कहर की ब्रेकिंग न्यूज दींद छा आजकल ब्रेकिंग न्यूज हूंद - बारिश का कहर। 
गढ़वाली -कुमाउनी होटलुं मा खाणक  त अच्छु बणान्दन किन्तु आज तक मीन कै गढ़वाली -कुमाउनी की भोजन /कुजीन पर किताब नि देखि। 
हमर बिल्डिंग मा हम लोग अपण ड्यारो खौड़ कत्यार भैर फेंक दींदा अर रोज सेक्रेटरी तैं गाळी दींदा कि सेक्रेटरी बिल्डिंग मा सफाई कु ध्यान नि रखद। 
मि तैं अबि तक समज नि आयि कि गढ़वालौ  गाउँ मा रुस्वडौ  चिमनी (धुंवा भैर करणो सिस्टम ) पर रिसर्च किलै नि हूंद होलि ?
हमर गां मा नकचुंडी नि मिल्दन अर कांड पुड़न पर हम गाळी दींदा कि यु निर्भागी प्रधान बि कुछ नि करणु च। 
ठीक च पहाडुं मा गूणी -बांदर -सुंगरुं  से खेती करण मुस्किल च किन्तु दाळ की खेती त ह्वैइ सकद च कि  ना ?
मेरी समज मा अब बण्या सुंगरुँ तैं सहकारी रूप मा पळे जावन त फायदा होलु।   If you cant win,  be part of it . 



Copyright@  Bhishma Kukreti  10/8/ 2014       
*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं । 

  
Garhwali Humor in Garhwali Language, Himalayan Satire in Garhwali Language , Uttarakhandi Wit in Garhwali Language , North Indian Spoof in Garhwali Language , Regional Language Lampoon in Garhwali Language , Ridicule in Garhwali Language  , Mockery in Garhwali Language, Send-up in Garhwali Language, Disdain in Garhwali Language, Hilarity in Garhwali Language, Cheerfulness in Garhwali Language; Garhwali Humor in Garhwali Language from Pauri Garhwal; Himalayan Satire in Garhwali Language from Rudraprayag Garhwal; Uttarakhandi Wit in Garhwali Language from Chamoli Garhwal; North Indian Spoof in Garhwali Language from Tehri Garhwal; , Regional Language Lampoon in Garhwali Language from Uttarkashi Garhwal; Ridicule in Garhwali Language from Bhabhar Garhwal; Mockery  in Garhwali Language from Lansdowne Garhwal; Hilarity in Garhwali Language from Kotdwara Garhwal; Cheerfulness in Garhwali Language from Haridwar;