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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, February 19, 2015

हरिद्वार, बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में प्रलय पूर्व युग

 Pralaya  Purv Yug  or Pre- Catastrophic Era 

                                                    हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में प्रलय पूर्व युग 
                                                                               History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  Part  --60     

                                                                    हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास -भाग -60                                                                                    
                              

                                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती   

पौराणिक आख्यानों अनुसार सृष्टि प्रारम्भ में अन्धेरा था। फिर एक अंड विशाल पैदा हुआ। अंडे से अविनाशी वीज पैदा हुआ और प्रथम मानव पैदा हुए -प्रजापालक देवगुरु ब्रह्मा। 
ब्रह्मा ने गङ्गास्रोत्र के निकट हिरण्यश्रंग पर्वत पर विन्दुसरोवर में यज्ञ किया।  ब्रह्मा ने आनंद व वर्णाश्रम की स्थापना की। 
                                           स्वयंभू मनु
मनु भी दैवदत्त 
अंडे से प्रकट हुए। मनु सरस्वती नदी किनारे विन्दुसरोवर, उत्तराखंड  पर सदा स्थिर रहते हैं (भीष्मपर्व )
वर्णाश्रम नियम सिथिल पद गए थे और स्वयंभू मनु ने उन्हें पुनर्स्थापित किये  (शान्तिपर्व , महभारत ). 
स्वायम्भू मनु की राजधानी सरस्वती तट पर थी 
                   स्वरोचिष मनु 
 स्वायम्भू मनु की पुत्री आकृति पुत्र का नाम स्वरोचिष मनु था। इसके बाद तीसरे , चौथे , पांचवे मनु हुए।  स्वायम्भू मनु द्वितीय पुत्र उत्तानपाद के तीन पुत्र हुए जिनमे ध्रुव ने विष्णु की तपस्या की। 
                                   वेन नरेश 

ध्रुव पुत्र प्रचीनगर्भ का नाम चाक्षुष मनु हुआ जिसका जिक्र वेद , महाभारत व पुराणो में हुआ है। 
वेन को भयानक शरीर , काला  अत्याचारी बतलाया गया है। 
                            हरिद्वार बिजनौर , सहारनपुर पर  वेन अधिकार 
वेन का राज्य दक्षिण हिमालय से लेकर उत्तरप्रदेश , बिहार तक था। मायापुर (हरिद्वार ) , बिजनौर , मुरादाबाद , बदायूं , बरेली।  चंपारण रोहतासगढ़ के कई प्राचीन गढ़ों का संंबध राजा वेन से जोड़ा जाता ह.
राजा वेन की राजधानी मायापुर (हरिद्वार ) थी 
ऐसा प्रतीत होता है कि वेन कोलबंसी था।  उत्तराखंड , बिजनौर पर कोलवंशी (डोम ) वंशी राजाओं का अधिकार रहा था और बिजनौर व मादीपुर पर सातवीं सदी में शूद्र नरेश का शाशन रहा है।
वेन संभवतया अंतिम अनार्य नरेश था जिसको हराकर या मारकर इस क्षेत्र  आर्यों का अधिकार हुआ होगा।


अगले भाग में वेन पृथु व अन्य मनुओं के बारे में पढ़िए ……… 

** संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
घोषाल , स्टडीज इन इंडियन हिस्ट्री ऐंड कल्चर 

Copyright@
 Bhishma Kukreti  Mumbai, India  13 /2/2015 

Contact--- bckukreti@gmail.com  
History of Haridwar to be continued in  हरिद्वार का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास; बिजनौर इतिहास, सहारनपुर इतिहास  -भाग 61 

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