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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, May 29, 2012

प्रभो आप अपणु नौ ( नारायण ) बदलि दया

नारद हफंदा हफंदा बैकुंठ ग्या
द्वी हाथ जोड़ी वो, प्रभु से बोली .....
हे नारायण , एक काम कै दया
बिनती च आप, अपणु नौ बदलि दया !

प्रभु बोली , नारद ... कनी बात छा कना
जरा खुलीक बोला , क्या बात च , क्या ह्व़ाया
किलै बदुलू मी अपुणु, ? अरे .किलै बदुलू मी अपुणु,
कखि तुम्हारी ख्वापड़ी खराबत नि हवे ग्या !

प्रभु तुम्हारा नों से धरती माँ
एक नारायण ईनू पैदा ह्वेग्या
जैल, अपणुत अपणु राय ,वैल त
तुम्हारा नों परभी कालिख पोती दया !

पैली राज सताकु सुख भोगी , कनु सुख
खूब उ डै, खूब बिछे, गाल -गाल त खै ग्या
ज्वनी त ज्वनी रा , पर बूडीनदा माँ भी
तांका झांकी से भी बाज नि आय !

झणी कत्युका , अर कत्कोंका .....
कनुकवे बोलू , मिकुत मुनु ह्वैग्या
जैथई देखा जख्मै देखा स्ब्युकी एक ही र टना च
अगर हम गलत छा त, वेकु खून लेकी ड़ी न ए करवा !

अबत धरतिम लोग बाग़ .......
आपो नौ कम वेकु नौ ज्याद लीणान
गली ग्ल्युमा छुरी छ्वारा लेकी ह्थोमा पोस्टर
नारायण हमारू बुबा च .ओ बुबा- बुबा बुना छन !

याकी बान बुनू चौ प्रभु , बात मेरी सुणि मनन कै ल्या
तुन भक्तुक नजरू माँ ब्लैक लिस्ट हूँण से बची जैल्या !

पराशर गौर
२९ मई २०१२ स्याम के ९.०० बजी !