(गढ़वाल, उत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता क्रमगत इतिहास भाग - 232)
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(Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part -232)
By: Bhishma Kukreti
Shailendra Bhandari ‘ Deenbandhu’ was born in 1970 in Bangoli, Rudraprayag, Garhwal. Shailendra Bhandari creates poems related to Garhwal villages imageries
मेरा गौं का नौन्याळ (कई बिम्ब वाली गढ़वाली कविता )
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गौं का बीच भीमळै की डाळी मूड़
कूड़ी भांडी खेल्दा
मेरा गौं का नौन्याळ।
जेठ का घाम मा
गोरु की डार अटकौंदा
बौण बौण डबखदा
मेरा गौं का नौन्याळ।
गदन्यूं का ओर पोर
काफळ बिण दा , गीत गांदा
नयेंदा -धुयेंदा , खेल्दा खेल्दी
झगड़ेन्दा बी
मेरा गौं का नौन्याळ।
छुट्टि ऐकि। बस्ता लेकि
घौर ऐकि , ताळी देखि
भुखन कबलैगि पोटगी
आंसू पोंछदा चित्त बुझौन्दा
मेरा गौं का नौन्याळ।
ज्वनि की उमर अब
ब्वे बाबू तैं सारू चैन्दु
सोचदा सोचदा आँखी तोपदा
पहाड़ छोड़दा
मेरा गौं का नौन्याळ।
Copyright@ Bhishma Kukreti, 2017
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