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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, July 30, 2017

उत्तररखण्ड मा राजनैतिक धर्मपिता अर धर्मपुत्र संस्कृति खतरा मा

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  चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती    

 उन त भारत एक कृष प्रधान देस च पर इख आंदोलन से जनम्याँ छुट छुट राज्य उत्तराखंड , झारखंड अर छत्तीसगढ़ राज्य बि छन 
  उन त स्कूलूं किताबुं मा अबि बि लिख्युं रौंद बल उत्तराखंड एक कृषि प्रधान प्रदेश च पर असलियत मा गूणी -बांदर अर सुंगरुं राजयौ  भितर आण से अर उत्तरखंड्यूं भैर भगण से अब पारम्परिक कृषि त नि हूंदी पर गूणी , बांदर अर सुंगरुं रक्छा हेतु राजनीति की फसल खूब हूंदी। 
  उन त  भारत देस जन इ उत्तराखंडन एक कृषि प्रधान प्रदेश च पर  इख देशभक्त सिपाई , देशभक्त अधिकारी अर राष्ट्रीय राजनेतौं  का चहले कदम पर चलण वळ राजनेता हूंदन। 
 चूँकि उत्तराखंड राष्ट्र प्रेमी प्रदेश च त इखक स्थानीय अति क्रन्तिकारी नेता दिवाकर भट्ट , काशी सिंह ऐरी अथवा क्या पणि एक क्षेत्रीय दल का सर्वेसर्वा  जु दिल्ली मा बैठिक नेतागिरी करदन जन कि सुरेश नौटियाल सबि राष्ट्रीय राजनीति मा समाहित हूण चांदन जन बुल्यां मिंडक अंडा दीणो पाणी मा छलांग लगाणो हो। उत्तराखंडी नेता राष्ट्र नेता , राष्ट्र नेत्री अर राष्ट्र जंवाई की पुछलग्गू ना बल्कि  पूँछा बाळ बणनम राष्ट्रभक्ति का परिचय दींदन अर इखम मोदी भक्तों , राहुल सेवकों या दिवाकर भट्टों मा क्वी अंतर नी च। 
     कुछ दशक तक जब तलक भारत मा शरम ल्याज नामक खतरनाक बीमारी बचीं छे तो भारत मा उत्तराखंड समेत राजनीति मा राजनैतिक धर्म पिता अर धर्मपिता संस्कृति बचीं छे। 
      तब उत्तराखंड मा स्व. हेमवती नंदन बहुगुणा , नारायण दत्त तिवारी आदि जगा जगा पुत्र ना धर्मपुत्र पैदा करदा छा अर फिर जैका राजनैतिक धर्मपिता की पदवी पांदा छा।  तब्याक धर्मपिता धर्मपुत्रों तै राजनैतिक पाठ ऊनि पढ़ांदा छा जन आश्रम मा गुरु च्यालों  पाठ कंठस्थ करांदा छा। 
      तब च्याला की अपणी हैसियत हूंदी छे , राजनैतिक  च्याला की अपणी राजनैतिक हैसियत हूंदी छे , राजनैतिक आधार हूँन्द छौ , अपणी खुदै तैयार करीं जमीन हूंदी थै , तब बड़ा नेता धर्मपुत्र की खोज म रौंदा था। डा शिवा नंद नौटियाल अर भारत सिंह रावत, नंद किशोर नौटियाल  हेमवती नंदन बहुगुणा का धर्मपुत्र छा अर बाद मा त्रेपन सिंह जी बि बहगुणा का धर्मपुत्र बणिन। श्रीमती इंदिरा हृदयेश नारायण दत्त तिवारी की धर्मपुत्री छे अर बाद मा तिवारी जीन नंद किशोर नौटियाल तै अपण धर्मपुत्र बणाइ।  स्व चंद्रमोहन बड़थ्वाल (भूतपूर्व विधायक श्रीमती विजया का पति ) बलदेव सिंह आर्य का धर्मपुत्र छा। 
      अब जब बिटेन भारत से शरम ल्याज की फोकटै बिमारी अंत ह्वे , राजनीति मा अपार , अकूत काळो धन की छळा -बळी ह्वे तो काळो धन को वार -पार करणम धर्मपिताओं की धर्मपुत्रों पर विश्वास उठी गे अर उत्तराखंड मा धर्म पुत्रों की जगा अब स्वयं का असली पुत्रों व असली पुत्रियोंन ले लियाल।  
     अब देखि ल्यावो ना विजय बहुगुणा न धर्मपुत्र की जगा स्वयं कु पुत्र सौरभ तै दे , मे. ज. खंडूरीन धर्मपुत्री तै राजनैतिक गुर सिखाणो जगा  अपण बेटी श्रीमती ऋचा खंडूरी तै विधायक बणै दे तो  अखाड़ा बाज सतपाल महाराजन अपणी पत्नी अमृता तै धर्मपुत्री की जगा गद्दीनसीन करिक भारत की राजनीतिक राष्ट्रीय चरित्र सिद्ध कार।  
     अब राजनैतिज्ञों तै धर्मपुत्रों , धर्मपुत्रियों या नारायण पुत्र शेखर की अर धर्मपुत्रों तै कार्यकर्ताओं की आवश्यकता इ नि रै गे किलैकि चुनाव जितणो कुण रेडी मेड पेड मशीनरी जि हरेक पट्टी मा दारु पेकी जमीं च। 
    चूँकि उत्तराखंड शत प्रतिशत राष्ट्रीय चरित्र कु प्रदेश च तो उत्तरखंडा नेतौंन  नेहरू गाँधी परिवारवादी , यादव परिवारवादी  या चौटाला -बादल कुनबेबाजी  चरित्र अंगीकार कार तो वैमा खौंळयाणो जरूरत इ नी च। 
कुछ समय बाद हरेक जिलापरिषद , नगर पालिका , विधान सभा सीट से नेता पुत्र , नेता पुत्री या नेता स्याळ इ चुनाव लड़दा दिख्याल।  
लॉन्ग लिव विजय बहुगुणा , लॉन्ग लिव सौरभ बहुगुणा , लॉन्ग लिव डाइनेस्टी रूल ! 
        
    
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Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India ,31   /7  / 2017 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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