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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, July 4, 2017

सुनील दत्त मैन्दोला :गढ़वाली कवि परिचय

गढ़वाल,उत्तराखंड,हिमालय से गढ़वाली कविता  क्रमगत इतिहास  भाग - 166 )   
(Critical and Chronological History of Garhwali Poetry, part - 166)
   Presented by By: Bhishma Kukreti
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वर्तमान पता- लाजपतनगर, साहिबाबाद,गाजियाबाद

स्थाई- ग्राम  व पो०औ०-द्वारी,पट्टी-पैनो,वि०खण्ड-रिखणीखाल,पौडी गढवाल
जन्म -1977 
शिक्षा-एम० ए०,बी०एड०,एम०एड०



प्रकाशित रचनाये- 
   1-उद्गार (गढवाली कविता सँग्रह)
2-मेरे सपने(हिन्दी कविता सँग्रह)
3-पतझड (हिन्दी कहानी सँग्रह)

अप्रकाशित रचनाये-
  1-मेरी गाँणि(गढवाली कविता सँग्रह)
2-पँदेरी(गढवाली गीत सँग्रह)
3-यादो के झरोखे(हिन्दी कविताये)
4-श्री हरि(दैवीय रहस्य..हिन्दी मे)
5-चरचुर-बरबुर(गढवाली चुटकिले)
6-मधु(शेरो-शाँयरी हिन्दी मे)

प्रसारित गढवाली गीत-
1-गढवाली डिस्को भाँगडा(चित्रहार)

अप्रसारित गढवाली गीत-
 1-नै जमना क नै ठुमका(चित्रहार)

2-प्रधनी बौ(चित्रहार)

3-मेरी मैणा(चित्रहार)

4-कनि जि होलि(चित्रहार)

5-झण्डा चौक मा(चित्रहार)

6-बँदोरा बाँद(चित्रहार)

सम्मान एँव पुरस्कार- चन्द्र कुंवर बर्त्वाल साहित्य श्री सम्मान से अलँकृत(सन् 2016)

प्रसारण- मँदाकिनी की आवाज एफ०एम० रेडियो-90-8 से गढवाली कविताये प्रसारित एँव अन्य कई प्रतिष्ठित मँचो से कविगोष्ठियो मे काव्यपाठ

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मि थैं  उड़ण द्यो   (शहरी घुटन दर्शाती कविता )

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मि उड़ण चाणु छौं 
झिंडी डांडी ठंडु बथौं  
ताकि म्यारा पंखुड़ा मिथे 
आजादी अहसास दिलाला। 

मि रळेण च्हाणो छौ 
पहाड़ी त्वातों का बीच 
जु कौणी झंगोरू लय्या क्वादु 
आम -अमरुद बन बनीका 
बावन चीजी खन्दी 
ताकि मिथैं अपणो का बीच 
अपणु अहसास हो। 

मि नि चांदु 
शहरी तोता बणिरौं 
जु सदनि 
ल्वाखरो पिंजड़ा पुटग 
रुणाणु रैन्द ,फड़फड़ाणु रैंद 
भैर उडणो को। 
 मि उड़ण चाणु छौं 
मि थैं  उड़ण द्यो
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