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Thursday, May 5, 2016

क्या मनुष्य मनुष्य भ्रूण मंदिर में चढ़ा सकते हैं ?

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क्या  मनुष्य  मनुष्य भ्रूण मंदिर में  चढ़ा सकते हैं ?


 चबोड़ , चखन्यौ , चचराट :::   भीष्म कुकरेती   
-
संतराजौ  फूल (गेंदा )  - अरे गुड़हल आज तू पूरा नि उफरी (फूला ) ? क्या बात ?
गुड़हलौ फूल -बस आज भौति दुखी छौं। 
संतराज -हाँ आज त्यार रूप बिरूप हुयुं च।  क्या बात ? 
गुड़हल -अरे यार मि यूँ मनिखों रंग ढंग देखिक आज बड़ो दुखी छौं। 
संतराज -उ त तयार मुख पर पड़ीं रात से पता चलणु इ च .. पर किलै ?
गुड़हल -अरे मनिख बड़ा विध्वन्सी छन भै ,
संतराज -कनो ?
गुड़हल -अरे अपण घौराक मंदिर ह्वाओ या सार्वजनिक मंदिर  इकै मनिख बिस बिस फूल चढांदन।  
संतराज -हूँ ! 
गुड़हल -हाँ एक फूल चढांण से क्या भगवान प्रसन्न नि हूंद क्या ? अर बीसों फूल चढांण से क्या भगवान सरा दुनिया भक्त तैं सौंप दीन्दो क्या ?  
संतराज -मतलब ?
गुड़हल -अरे फोकट का फूल तुड़ण से बीज बणण  इ खतम ह्वे जांद।  अरे  
संतराज -मतलब ?
गुड़हल -मतलब बीज श्रिष्टि की सम्भावना हूंद अर फूल तुडनो अर्थ च बल श्रिष्टि सम्भावना ख़तम करण।  यी मनिख अंदादुंद फूल मंदिरों मा चढाणो वास्ता ,  ड्र्वाइंग रूम मा फूल धरण से सरासर श्रिष्टि याने सम्भावना समाप्त करणो ब्योंत करणा रौंदन। 
संतराज -पर भक्ति से   .... 
गुड़हल -अरे मनिख इथगा ही भगवद भक्त छन तो अपण भ्रूणों तै किलै मंदिरों मा नि चढांदन।  
संतराज -ह्यां पर यदि मनिख अधिक फूल मंदिरों मा चढांदन तो उथगा ही फूल उगांद बि त  छन। 
गुड़हल -पर ख़ास ख़ास ही फूल तो उगांदन। 
संतराज -पर डार्विन का नियम च बल प्रतियोगिता मा वी जीतल जु सहयोगी ह्वालो।  मंदिर जोग फूल मनुष्य का सहयोगी छन तो फुलणा छन , फलणा छन।   
गुड़हल -यी सब बकबास च।  मनुष्य  हमर फूल तोडिक सम्भावना ही खतम करणा रौंदन। 
संतराज - अरे ! अरे ! अरे मंदिर का पुजारी मि तैं मेरी भयात का साथ तोड़ी ल्हीगे।  
गुड़हल -ये मेरी ब्वे ! ये मेरी ब्वे ! मि तै कै जानवरन घुळी दे । ये मेरी ब्वे ! ये मेरी ब्वे  ... 


5/5/2016 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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