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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, May 5, 2016

अरे ओ साम्भा ! सॉरी भुंदरा बौ ! यी वरिष्ठ गढ़वाली कवि बौं हौड़ क्यों पड़े हैं ?

सुपिनेर - भीष्म कुकरेती 

गब्बर सिंह -अरे ओ साम्भा ! साम्भा रे ! कहां  मर  गया रे तू ?
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - ये हरि सिंग  बेबगतै औलाद ! साम्भा तैं मोर्याँ  दस साल ह्वे गैन  .... 
गब्बर सिंह - सॉरी भुंदरा  सिस्टर इन लौ ! ओल्ड हैबिट्स डाई वेरी हार्ड। 
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - अच्छा इन बतादी कि साम्भा तैं किलै खुज्याणी छै रे ?
गब्बर सिंह - कभी कभी मेरे दिल में भी अमिताभ बच्चन जैसे खयाल आता है 
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - क्या ?
गब्बर सिंह - कि चलती है क्या खंडाला ?
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - अपणी हेलन का साथ जा खंडाला। 
गब्बर सिंह - अरे बौ ! वीं मा वा बात कख च ज्वा तीम  ... 
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - बिंडि मक्खन नि लगा हाँ।  इन बोल तू आज क्या बुलण चाणु छै ?
गब्बर सिंह - कि  वरिष्ठ गढ़वाली कवि बौं हौड़ किलै पड्यां छन ?
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ -कनो आज वरिष्ठ गढ़वाली भाषा कवियों पर क्यांक नाराजी ?
गब्बर सिंह -  कि यी वरिष्ठ गढ़वाली कवि फेसबुक अर सोसल मीडिया मा हर हफ्ता अपण कविता किलै पोस्ट नि करदा होला ?
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - हाँ भै गब्बर बात तो तू अकलमंदी की करणी छे रै 
गब्बर सिंह -भै नि बोल हां मीन फांस खै दीण।  सुसाइड।  याने आत्महत्या।  जैं बौकु  सहारा छौ स्या भाई भाई करिक भट्याणि च। 
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - ओ नरभागी मि भै बुलणु छौं -गढ़वाळी स्लैंग ! 
गब्बर सिंह -फिर ठीक च। मि बुलणु छौ कि फेसबुक मा हरेक वरिष्ठ कवि यदि अपण अपण  कविता हर  पोस्ट कारन तो फेसबुक्या गढ़वळयूं तै गढ़वाली पढ़ना ढब जालो।  नि बोल जाण ?
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ - म्यार दगड़ रैली तो अक्ल की ही बात करलि हाँ।  बात मा दम च।  फेसबुक्या कविता पौढ़ सकदन अर यांसे गढ़वाली पाठकों संख्या मा बेहंत इजाफा ह्वे जालो। 
गब्बर सिंह - ये बौ जरा यु वरिष्ठ कवियों तै बिजाळ त सै !  
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ -ठीक च मि सब्युं कुण फोन करदो 
गब्बर सिंह - अच्छा अब तो चलती है खंडाला ?
 चिर सुंदरी भुंदरा बौ -अपणी ब्वे  तैं खंडाला ...