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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, May 4, 2015

हरिद्वार , बिजनौर , सहारनपुर इतिहास संदर्भ में यवन नरेश दिमित्रस I

Greece Bactria King Demetrius I in context History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur


                     हरिद्वार ,  बिजनौर   , सहारनपुर   इतिहास  संदर्भ में यवन नरेश दिमित्रस I

                  Ancient  History of Haridwar, History Bijnor,  History Saharanpur  Part  -  114                     
                           
                     हरिद्वार इतिहास ,  बिजनौर  इतिहास , सहारनपुर   इतिहास  -आदिकाल से सन 1947 तक-भाग -    114                  

                                               इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती  


दिमित्रस I [200 -180 ? 160 ? BC ] युथिदिम का पराक्रमी पुत्र था। वह सिकंदर के समान भारत पर अधिकार का आकांक्षी था। अनुमान किया जाता है कि  राज्याम्भरम्भ अशोक की मृत्यु के तीस चालीस वर्ष पश्चात हुआ। 
        
अपने पुत्र को बाख्तार व सॉग्द की रक्षा का भार सौंपकर दिमित्रस Iअपने भ्राता अपोलोदात व सेनापति मेनान्द्र के साथ भारत विजय अभियान पर निकल पड़ा। पश्चमी तक्षशिला और पश्चमी सिंधु क्षेत्र को जीतकर वह दक्षिण सिंधु पंहुचा और वहां अपने नाम दिमित्रस के नाम से  की स्थापना की। दिमित्रस I  की एक सेना मेनान्द्र  नेतृत्व में गांधार के पूर्व की और बढ़ी और व्यास , सतलज को पार कर मथुरा तक पंहुच गयी। 
दिमित्रस I  की दूसरी सेना अपोलोदात  के नेतृत्व पातळ नगरी को जीतकर सौराष्ट्र से होती हुयी भरुकच्छ तक पंहुच गयी। भरुकच्छ को राजधानी बनाई। 
पश्चमी भारत के बड़े भूभाग पर अधिकार के बाद मगध विजय की योजना बनाई। 
सेना ने वर्तमान चित्तौड़ के नजदीक माध्यमिका नगरी को जीतकर पाटलिपुत्र की और प्रस्थान किया 
सेना ने मथुरा को जीतकर पूर्व की ओर पांचाल , साकेत व काशी को जीतकर पाटलिपुत्र पर आक्रमण कर दिया। 
यवन आक्रमणों का वर्णन पतांजलि /पंतजलि  महाभाष्य , हरिवंश , युग पुराण , मार्कण्डेय पुराण , गार्गी संहिता में भी उल्लेख है। 
कुछ नरेशों ने प्रतिरोध किया कुछ नरेश प्रतिरोध ना कर सके। मगध का राजा भागकर जंगलों में छुप गया था। 
यवन सेना संख्या में अधिक थी व युद्ध सामग्री व युद्ध परवहन तंत्र में विकसित थी।  भारत में जैन व बौद्ध संस्कृति के कारण युद्ध विज्ञान में विकास लगभग बंद ही था तो यवन सेना को जीतना सरल था। 
इसी दौरान यवन में अन्य यवन समान्तों ने दिमित्रस के राज्य पर अधिकार कर लिया। अपने साम्राज्य को बचाने में दिमित्रस की मृत्यु हुयी (160  या 180 BC )
भारत में भी यवन अधिकारी आपस में लड़ बैठे और पांचाल[उत्तर यमुना दोआब , सहारनपुर व कुछ भाग उत्तराखंड ] व अन्य मध्य देस के भाग से यवन अधिकार समाप्त हो गया। 


** संदर्भ - ---

डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -
 मध्यएशिया का इतिहास
राजतरंगणी
कनिंघम , क्वेसन्स ऑफ एन्सिएंट इंडिया
*Polibius, The Histories, Book XI, Chapter 34, vol -1 
Pantjali, Mahabhashya
Dr J.N.Benrarji 
D. C Sarkar

Copyright@ Bhishma Kukreti  Mumbai, India 2/5/2015 
   History of Haridwar, Bijnor, Saharanpur  to be continued Part  --

 हरिद्वार,  बिजनौर , सहारनपुर का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास  to be continued -भाग -

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