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Tuesday, May 12, 2015

ग्रामीण शौचालय का भूगोल (हिंदी व्यंग्य )

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                             ग्रामीण  शौचालय का भूगोल (हिंदी व्यंग्य ) 
                   
                        चबोड़्या, चखन्यौर्या , हंसोड्या   :::   भीष्म कुकरेती 

मै -बौ जी ! बौ जी ! फोन क्यूँ नै उठा रई हो ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -कनो क्वी ख़ास  काम है क्या ?
मै -नै बस भौत दिनों से बात नई की तो .... 
भुंदरा बौ (भाभी ) -तू बी ना मुंबई में रै के बि गंवार का गंवार इ है।  अरे अब द्यूर  भौज फोन पर या रस्ते में थोड़ी बात करते हैं। 
मै -तो ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -वर्ड्स अप पर काण्ड नई लग गए हैं क्या ?
मै -हाँ पर उसमे तुम्हारी वो छाळी आवाज    … 
भुंदरा बौ (भाभी ) -रण दे।  चमचा , कड़छी ना फिरा।
मै -सच्ची बौजी ! आपकी ही कसम। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अच्छा बोल सुद्दी मुद्दी वैसे ई फोन कर्रा है कि कुछ काम की बात है ?
मै -वो तुम्हारी देवरानी कै रई थी कि उसे गाँव की सहकारिता पसंद है तो वह इस साल गाँव आना चाहती है। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अच्छा ? उसे गाँव की सहकारिता पसंद है ?
मै -हाँ पर कै रई थी कि पैले पता लगाओ कि ट्वाइलेट बन गए हैं कि नही। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अरे हर मूंड तौळ अर हर बुट्या पुटुक ट्वाइलेट हैं ना बाकी गदन तो अपना है ही !
मै -हाँ पर अब तो सरकार शौचालय चिणने के लिए पैसा बि दे रही है तो अब तलक गाँव में आठ दस ट्वाइलेट बन ही गए होंगे ? 
भुंदरा बौ (भाभी ) -खारिन्ड बन गए हैं।  ट्वाइलेट मुंड में बनेंगे ?
मै -मुंड मे क्यों बनेंगे ? घर के पास बनेंगे। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अरे ययी तो जख्या भंगुल जमे हैं द्यूर जी। 
मै -कनो ? ग्राम प्रधान शौचालय स्कीम खा गया क्या ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -नही ग्राम प्रधान को स्कीम खाने के लिए गुदनड़  (सामूहिक शौचालय ) जाने की जरूरत नई  है। 
मै -त ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -त क्या ! अरे शौचालय बनाने के लिए जगह चाहिए कि नही ?
मै -इत्ती जगा है गाँव में फिर ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -अब देख सौकार ज्योर ओरों को ग्राम प्रधान ने स्कीम पास की तो भी उनका शौचालय इस जनम मे तो बनने से रआ।
मै -किलै ? उनकी इतनी बड़ी तिबारी है।  
भुंदरा बौ (भाभी ) -तिबारी को चाटना है।  उनका घर है पर सग्वड़ नई हैं। 
मै -हाँ उनके घर के सामने तो घन्ना काका का फांग है। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अर घन्ना ज्योर अपना पुंगुड़  फांग सौकार ज्योर को ना पैसों में दे रहे हैं और ना ही संटरा मे देने को तयार हैं। 
मै -ऐ तो सौकार मुंडीत वाले कभी भी शोचलाय नही बना सकते। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -हाँ।  यही बिजोग डक्खु बड्या ससुर जी का है।  भूभना ज्योर के यहां भी यही लुचड़ लगा है।   
मै -तो चंदा ब्यटा कौंक का करह के बगल में जमीन है उसने तो शौचालय बना दिया होगा। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अरे ट्वाइलेट बनाने के लिए जमीन है पर उ क्या बुल्दन क्या पिट बुल्दन उ ?
मै -सेफ्टी पिट जख शौच जमा ह्वेक सूक जाता है। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -हाँ वयी।  के लिए जमीन नई है तो उस मुंडित के पांच परिवार वाले सँजैत ट्वाइलेट बी नई बना सकते। 
मै -बड़ बामण ख्वाळ वालों की तो सामने जमीन है फिर वे क्यों नही ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -बड़ बामण ख्वाळ वालों की तो बात इ मत कर। 
मै -किलै ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -याद है जब अंबेडकर स्कीम में पानी के नल आरहे थे तो बड़ बामण ख्वाळ वालों ने अड़ंगा लगा दिया था ?
मै -हाँ कि हम हरिजनों के नाम पर पानी नही पीयेंगे। दस साल तक गांव में नल नही लग पाये थे। पर अब तो शौचालय स्कीम का नाम प्रधान मंत्री योजना है फिर ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -अब बुड्या बामणों ने राड़ घाळ रखी है कि रुस्वड़ अर द्वार के सामने हगने मूतने का घर नही बनने देंगे। 
मै -मतलब अबी तक गाँव में एक भी शौचालय नही बना है ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -ना। 
मै -पर शिल्पकारों के लिए तो पूरा का पूरा मुफ्त शौचालय बनेंगे।  फिर ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -हाँ पर उनके पास कहीं भी सुई रखने के जमीन नही है तो शौचालय मुंड मे बनाएंगे ?
मै -ठीक है पर बौजी आपके पास  तो सामने जमीन है फिर आपने क्यूँ नई ट्वाइलेट बनाया ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -अरे पता च तुमर भैजि ने देहरादून में एक टुकड़ा ले रखा है कि दिल्ली से जब रिटायर होंगे तो देहरादून में बसेंगे। 
मै -हाँ। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -अब इस साल उस जमीन की दीवारबन्दी करनी है।  हम या तो गाँव में ट्वाइलेट ही बना सकते हैं या देहरादून की जमीन की दिवारबन्दी ई कर सकते हैं।
मै -औ त गाँव ट्वाइलेट बिहीन  ही है ?
भुंदरा बौ (भाभी ) -हाँ। 
मै -ठीक च तो इस साल भी गाँव आना कैन्सिल ही समझो। 
भुंदरा बौ (भाभी ) -हाँ तुम प्रवास्युं कुण गाँव ना आने का क्वी ना क्वी बहाना चाहिए ही। 


13/4/15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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