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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, October 10, 2016

नायक दिखण या नायक बणन ?

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            नायक दिखण या  नायक बणन ? 
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  चबोड़ , चखन्यौ , चचराट :::   भीष्म कुकरेती    
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 मि कोटद्वारम अपण बंगला    मा इखुलि छौ अर 'हमारे  नायक ' टीवी सीरियल दिखणु छू।  हरेक एपिसोड बड़ा  रोमांचकारी , आकर्षक अर एक बि पल छुड़न लैक नि छौ।  ड्यारम क्वी नि छू तो डिस्टर्ब्याणौ कवी जंजाल छौ बि ना। 
मि  'हमारे नायक ' दिखणम बिलकुल डुब्यूं छौ।  कि इथगा मा भैर बिटेन इन आवाज ऐ जन बुल्यां कै कुखड़ी मा कैन तातो पाणी डाळि दे हो अर कुखड़ी फत फत करिक फतफताणि,  भतभत्याणि , सकस्यट्याणि    हो।   मैं तैं इन कुखड़ि दिखणम रौंस नि आंद।  मि तै मौण कटीं  मुर्गी या मौण कट्यूं  मुर्गाक भतभताट मा अधिक रौंस आंद अर फिर भड़यूं शांत मुर्गा या मुर्गी  मा।  मि बेखबर 'हमारे नायक ' दिखण मा इ ब्यस्त रौं। 
 पण अब मुर्गी म्यार ड्वार भड़भड़ाणि छै जु मुर्गी कुण असंभव  छौ अर उनि बि क्वी बि मुर्गी या मुर्गा मुरगाखोर का दरवज पर धै लगैक नि आंद कि ले मि तैं घूळ। 
 दरवजौ  भड़भड़ाणै  आवाज 'तारक मेहता  का उल्टा चश्मा ' की दया बेन द्वारा  द्वार भड़भड़ाण से अधिक तेज छौ।  मि द्वार पर औं अर की होल से द्याख त द्वी तीन बंगला पार की पड़ोसन मालती छै।  वीन बरामदा की लाइट से बचणो  बान माथा मा हाथ धर्यूं छौ।  द्वार खोलिक मि जनि भैर औं तो वींन जगता सगती मा ब्वाल - अधकपाळिन म्यार मुंड फटणु च।  या तो मि तै घुमाणो लिजाओ या डाक्टरम। 
मि यिं उमर मा अबि बि रात मा गाडी चलै लीन्दो तो मीन मालती तैं अपण मोटर साइकल मा पैथर बिठाळ अर मोटर साइकल तै दुगड्डा जिना दौडै दे।  क्वी आधा पौण घँटा  बाद वींन बोलि कि अब वींका अधकपाळी दूर ह्वे गे तो मि वापस ऐ ग्यों।  वीं तै वींका ड्यार छोड़िक औ।  द्वार खोलिक भितर ग्यों तो 'हमारे नायक ' सीरियल अबि बि चलणो छौ।  अब मेरी इच्छा 'हमारे नायक दिखणम कत्तै नि रै गे छै। 
अधिकतर दुसर 'नायक ' दिखण से बढ़िया अफु ही 'नायक' बणन ठीक रौन्दु।  नि बोल जाण ?                               


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  10/ 9/ 2016
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।

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