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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, October 22, 2012

डेढ़ सौ साल बादौ देहरादून

व्यंग्य साहित्य गढ़वाली में चबोड़ इ चबोड़ मा, हौंस इ हौंस मा डेढ़ सौ साल बादौ देहरादून चबोड्या: भीष्म कुकरेती डेढ़ सौ साल पैलि देहरादून ड्यारा डूण थौ अब देहरादून च अर डेढ़ सौ साल परांत यु शहर डेहरा डून ह्वे जालो . डेढ़ सौ साल पैलि देहरादून मा गढ़वळि रौंदा था , कुछ अंग्रेज बि छा , कुछ नेपाली बि था . अंग्रेज अर अंग्रेजियत तै मान सम्मान दीणो बान कुछ क्या जादातर गढ़वळि अफु तै कठमळि बथाण मिसे गेन . सिंह वर्मा ह्वे गेन अर बामण शरमाण मिसे गेन . चूंकि गढ़वळि या कठमळि बिजिनेस तै हीण काम समजदन त हमन गुप्ता गोयल भटेन। सन सैंतालीस क बाद शरणार्थ्यु तै जगा दीणो बाद गढ़वळि या कठमळि अफ़ु तै हिन्दुस्तानी मनण बिसे गेन अर निखालिस हिन्दुस्तानी बणणो बान हमन गढ़वळि मा बचळयाण छ्वाड़ . अब हम प्योर इन्डियन बणणो बान हिंदी बि छुड़णा छंवां अर डेढ़ सौ साल बाद हरेक गढ़वाली की मदर टंग इंग्लिश ह्वेलि। गढ़वाली भाषाक क कुछ लिख्युं साहित्य आर्कियोलौजिकल सर्वे क ऑफिस मा इ मीलल . डेढ़ सौ साल बाद इन बुले जालो बल वन्स अपौन अ टाईम गढ़वालीज यूज्ड अ लैंग्वेज काल्ड गढ़वाली। डेढ़ सौ साल बाद देहरादून मा पांच छै टका गढ़वळि होला पण सरकारी रिकौर्ड मा एक बि गढ़वळि नि होलु किलैकि जन गणना मा क्वी बि गढ़वळि अफु तै गढ़वळि नि बतालु . डेढ़ सौ साल बाद घंटाघर नि रालो अर उखम एसिया कु सबसे बड़ो माल होलु . आजौ घंटाघर तै माल बणाण माँ उत्तराखंड कु मुख्यमंत्री क जंवै क ख़ास सक्रिय भूमिका रालि . ये मुख्यमंत्री क परिवार अर रिश्तेदार क्वी बि तब उत्तराखंड क्या इंडिया मा नि राला उ सौब स्विटजरलैंड शिफ्ट ह्वे जाला अर सौ , डेढ़ सौ साल बाद बि इंडिया की पुलिस कोर्ट, ये मुख्यमंत्री क जंवै पर मुकदमा चलाणि रालि . वो अलग बात च कि मुकदमा की शुरुवात सौ साल पैलि होलि . सरा देहरादून मा रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम का बदौलत सैकड़ो उड़दा पुळ (फ्लाई ओवर ) होला। शहर उड़दा पुळउं च कि सौ सौ मंजिल ऊँची बिल्डिंगो क च बथाण कठण ह्वालो . सैकड़ो उड़दा पुळ बणाण मा सरकारी नेताओं, विरोधी नेताओं अर अधिकार्युं क जंवैउं ख़ास हाथ रालो अर डेढ़ सौ साल बाद यूँ सब्युं परिवार यूरोप -ऑस्ट्रेलिया का नागरिक ह्वे जाला अर यूँ पर बि सौ साल तक भ्रष्टाचार कु मुकदमा चलणो रालु . आज देहरादून मा बिजिनेस पर बणियों , पंजाबियों क बोलबाला/ मिलकियत च पण डेढ़ सौ साल बाद हरेक छ्वटो-बड़ो बिजिनेस पर अमेरिकी अर यूरोप वाळु सत प्रतिसत अधिकार रालो अर उत्तराखंड का हरेक क़ानून विदेस्युं तै जादा से जादा फैदा दीणो बान बौणल . उत्तराखंड की राजधानी देहरादून ही राली पण विधान सभा क बैठक बारी बारी से कबि न्यू यॉर्क, कबि टोकियो , कबी लन्दन -पेरिस, सिडनी जन जगो पर इ होलि . दस साल मा उत्तराखंड दिवस पर इ एक दिन उत्तराखंड विधान सभा की बैठक देहरादून मा सगुन का नाम पर होली। डेहरा डून म्युनिस्पैलिटी बि विदेस्युं क गुलामी कारलि . डेढ़ सौ साल बाद इतिहास की किताबो मा पढाये जालो कि कबि ड्यारा डूण/ देहरादून मा बासमती की खेती हून्दी छे, आम, अमरूदो अर लीच्युं बगीचा हूंदा छा। तव सरा देहरादून कंक्रीट जंगळ बदली जालो . डेढ़ सौ साल बाद देहरादून मा इक सूत बि जमीन दिखणो नि मीलली . हाँ इन बुले जालो की देहरादून की भौत प्रगति ह्वाई पण फिर बि दिल्ली ,मुंबई का मुकाबला मा देहरादून पिछड्यु शहर रालो किलैकि दिल्ली अर मुम्बई मा केवल अर केवल ग्वारा विदेशी ह्वाला जब कि देहरादून मा बिजिनेसम्यन छोड़िक बकै नागरिक जादातर इन्डियन ह्वाला . Copyright@ Bhishma Kukreti 21/10/2012