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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, October 25, 2012

भूक लगीं च त मुंडळ मा जैक भूक !

गढ़वाली हास्य व्यंग्य चबोड़ इ चबोड़ मा

भूक लगीं च त मुंडळ मा जैक भूक !

चबोड्या : भीष्म कुकरेती यूरोप की एक प्रसिद्ध कथा च बल लोग रोम कु राजाम गेन बल खाणौ रुटि नि छन त राजा न पूछ बल केक किलै नि खान्दा ? अच्काल यु त हम रोजी दिखणा छंवां . हम समजणा इ नि छंवां कि हमारी प्राथमिकता क्या च ? बाबा ! मीम अंक गणित की किताब नी च . ब्यटा कैलकुलेटर से काम चलै लेदी . इ राम दा ! ईं अडगें मा अस्पताल नि छन . त क्या ह्वाई जु अस्पताल नि छन . मान्त्रिक -तांत्रिक त छें छन कि ना ? ये जी ! यु नौनु भूकन रूणु च, दूधि पिलै द्यूं ? झंग्वर तेरी ब्वे कूटलि ? तैक हथ पर खिल्वणि पकडै दे . ऐंसू झंग्वर नि ह्वे त क्या करे जालु ? देस तै रिटेल मा विदेसी निवेश की भारी जरुरत च . विदेसी निवेश हूंद त सट्टी आयात ह्वे सकदा छा . रौबर्ट बड्रा पर भारी दोषारोपण हूणु च , क्या करे जाऊ? गडकरी क फान्देबाजी क जांच जादा जरूरी च . स्कूलम मास्टर नि छन . इले त हम वकालत करणा छंवां बल प्रमोसन मा आरक्षण जरूरी च। मुस्लिम बच्चो मा विज्ञान की शिक्षा मा चाहत कम च, कुछ इंतजाम हूण चएंद।जब तलक हमारी मांग बल उर्दू तै हरेक प्रदेश मा दूसरी भाषा घोषित करे जाओ पर बात नि होली हमन हौर बात नि करण . मैदानों मा फैक्ट्र्यु से गंगा प्रदुषण बढ़णु च। उत्तराखंड मा डाम निर्माण बंद करा . भारत माँ बिजली संकट बढ़ण वाळ च . पैल कोयला आबंटन बंद करा। पैल न्यूक्लियर प्लांट बंद करा फिर बिजली संकट की बात होली। दलित बच्चो की प्राथमिक शिक्षा स्तर भौति खराब च। पैल दसवीं -बारवीं कक्षा क सिलेबस मांगन बाबा साहेब अम्बेडकर का कार्टून हटाओ . दूध, मिठाई मा मिलावट भौत हूणु च . देस तै चौकलेट उत्पादन मा अगल्यार लीण चएंद जां से देस आयात खर्च मा कमी आओ। हरियाणा मा दलितों पर बलात्कार जादा हूँणा छन . बाल विवाह तै संवैधानिक दर्जा दिए जाओ। राज ठाकरे बुलणु च बल उत्तर प्रदेश अर बिहार मा विकास नि हूण से पलायन जोरो पर। राज ठाकरे पर बिहार मा मुकदमा चलण चएंद। उत्तराखंड माँ उत्तराखंड वासिंदों तै नौकरी मा प्राथमिकता मिलण चएंद . राज ठाकरे अर उद्धव ठाकरे की 'सन ऑफ़ स्वाइल' की बात करण से संविधान की तौहीन होंद . उत्तराखंड मा विकास कनकै होलू? नै पैल पर्यावरण बचाणो बान क्या हूण चयेंद कु उत्तर जरुरी च . उत्तराखंड मा पर्यावरण कनकै बचलु ? नै पैलि जरुरात विकास की च। जु देस , जु समाज अपणि प्राथमिका क निस्तार नि कौर सकुद वु स्वतंत्र ह्वेक बि गुलाम इ च।

Copyright@ Bhishma Kukreti 26/10/2012