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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, October 22, 2012

मिलावट गीता कु रहस्य

गढ़वाली हास्य व्यंग्य चबोड़ इ चबोड़ मा मिलावट गीता कु रहस्य चबोड्या : भीष्म कुकरेती एक दिन एक ब्यापारी कळजुगि साधु 'टुटबग्या' मा ग्याई अर बुलण मिस्याई बल माराज इक्कसवीं सदी याने रिफौर्म जग माँ धन कमाणो ज्ञान द्याओ . कळजुगि साधु टुटबग्या न आँख कताडिक बवाल," वत्स ! सबसे पैल तु मिलावट का नया नया तरीका सीख " ब्यापारी न पूछ ," प्रभु मि दूध माँ पाणि ..." कळजुगि साधु टुटबग्या भ्रम दूर कार ," दूध माँ पाणि त हजारो साल से मिलाये जांद, घी माँ उस्ययुं पिंडळ त अब पुरणि बात हवे गेन . अब नै तरीका आई गेन " ब्यापारी फिर भ्रमित हवे अर वैन पूछ, माराज उदाहरण देकि बिंगाओ ," साधू न विस्तार से बिन्गाई , " आज केमिकल कु जमानो ऐ गे। अब दूध माँ केमिकल मिलाओ कि लेक्टोमीटर बि सत्य अर असत्य की पछ्याण करण मा नाकामयाब ह्वे जाओ। यि केमिकल पाणि से बि सस्ता साबित हुयां छन अर म्यार आधुनिक च्याला ये गुरुमंत्र तै बड़ा पैमाना पर बार त्यौहारों पर प्रयोग कौरिक अपण बैंक बैलेंस बढ़ाणा छन। मसालों, मिठाई मा कैमिकल मिलाण आज लक्ष्मी भक्तो बडो धंदा ह्वे ग्याई ." ब्यापारी गद गद ह्वेई , " वाह माराज कथगा बढ़िया टुटब्याग सिखाई" कळजुगि साधु अपण रौ मा बुल्दो गे , " इनी सब्ज्युं मा कैमिकल का इंजेक्सन देकी सब्जी तै ताजा, हरी बणाओ या भारी कारो त अवश्य इ बैंक बैलेंस बढ़ल" ब्यापारी न शंका कार, " त माराज जु उ पुराणा टुटब्याग छन ऊँ तै छोड़ी दीण ?" साधु न समाधान कार, ' नै नै ! धनी बणणो सास्वत नियम च बल जु बि टुटब्याग बैंक बैलेंस बढ़ान्द वै तै कते नि छुड़ण। उल्टा वै टुटब्याग तै परिस्कृत कारो " ब्यापारी न फिर शंका जताई , " माराज ! यी सरकारी नियम धियम ..?" कळजुगि साधु टुटबग्या न समझाई ," नियम धियम कमजोर लोगु तै बौगाणो साधन हून्दन . तागतवर लोगु कुण नियम धियम की क्वी अहमियत नि होंदी। तागतवर लोगु तै नियम धियम तै लत्याण चयेंद ,नियम धियमुं कु तै मजाक-खिल्ली-मखौल उड़ाण चयेंद ; नियम धियमुं तै गुज्यर जोग करण चयेंद , नियम धियमुं तै धत्ता बताण चयेंद ; नियम धियमुं तै मुंडळ मा धौरिक अपण बैंक बैलेंस बढ़ाण चयेंद ." ब्यापारी न उत्साहित ह्वेक पूछ," माराज , नियम धियमु तै कन कौरिक धत्ता बताण चयेंद ?" कळजुगि साधु न रहस्य ख्वाल," पुत्र ! नियम धियमु तै लत्याणो बान बड़ा सरल उपाय अर आर लाभकारी उपाय छन . , घूस देवी क पूजा-अर्चना से सरकारी अधिकार्युं की आदिर खातिर से नियम धियमु पाप दूर ह्वे जांदन। जू बि बैंक बैलेंस बढ़ाणों भूकू चूकू घूस देवी क अभ्यर्थना , पूजा सरकारी अधिकार्युं की आदिर खातिर से करदो वैक न्याड़ ध्वार नियम धियमु क ताप , गरमी नि आंदी . घूस देवी क पूजा-अर्चना नियम तोड़नो चाबि च। मर्मग्य ग्यानी प्रात: या रात घूस देवी क पूजा-अर्चना पूजा करदन ." ब्यापारी न पुळेक ब्वाल ,' ये गूढ़ ज्ञान से मि धन्य ह्वे ग्यों।" कळजुगि साधु न अग्वाड़ीक रहस्य बथाई," अबि तलक मीन कर्मज्ञान कु रहस्य बथाई . अब तू मनो ज्ञान, बुद्धि ज्ञान अर अहम् ज्ञान कु रहस्य जाण ले " ब्यापारी न बवाल," जी माराज ! " कळजुगि साधु न ब्वाल , " मन, बुद्धि अर अहम् से इ कर्म उपजदन ." ब्यापारी न बवाल," जी माराज ! " कळजुगि साधु न ब्वाल , " मिलावट कु ब्यापार मा मनोयोग कु बडो महत्व हूंद। मिलावट कु ब्यापार मा जितणो वास्ता -मन से दया, करुणा , मानव हित, देश हित , समाज हित की बात सद्यनी खुणि हटाण भौत जरूरी च . दया, करुणा , मानव हित, देश हित , समाज हित जन भावुक बात कमजोर लोगुं , गरीबुं आभूषण छन। त तुम कसम ल्याओ कि मिलावट कु ब्यापार मा जितणो बान मि कबि बि दया, करुणा , मानव हित, देश हित , समाज हित की बात नि सुचलू ." ब्यापारी न कसम खाई ," मिलावट कु ब्यापार मा जितणो बान मि कबि बि दया, करुणा , मानव हित, देश हित , समाज हित की बात नि सुचलू ." कळजुगि साधु न बुद्धि योग कु रहस्य ख्वाल ," अब बुद्धि योग कु रहस्य टक लगैक सूण।" ब्यापारी न ब्वाल ," जी !" कळजुगि साधु न विस्तार से बथाई , " जै ब्यापारी क मन मा दया, करुणा , मानव हित, जन हित, देश हित , समाज हित जन खत्यां बिकार समाप्त ह्वे जावन त वै मिलावट का विकल्प इन ढुंढण चएंदन जु सस्ता , सुलभ ह्वावन अर जखमा लाभ की गुंजैस दस गुणा ह्वाओ . आई समज माँ?" ब्यापारी न ब्वाल ," जी ! मि हमेशा इ लाभकारी विकल्पों खोजम रौलू " कळजुगि साधु न ब्वाल ," अब तू अहम योग कु रहस्य सूण . जब तलक त्वे तै कै अमीर से जलन , इर्ष्या , डाह नि होलि तू असली मिलावटी ब्यापारी नि बौण सकुद त त्वे तै हर रोज दुसरो अमीरी से जलन , इर्ष्या , डाह करण जरूरी च ." ब्यापारी न कसम खाई ," मि हर रोज दुसर अमीरों को धन से जलन , इर्ष्या , डाह करलु। मि रॉबर्ट बड्रा, कोंडा, ए राजा, मारन , नितिन गडकरी जन लोगुंक क झमाझम बढ़दो धन से हर समौ जळणु रौलु , इर्ष्या करणु रौलु " कळजुगि साधु न अग्वाड़ी ब्वाल ," तीन बिलकुल सही रास्ता अपणाइ . अब तू अहम योग कु मूल सूत्र की जानकारी ले " ब्यापारी न ब्वाल ," जी !" कळजुगि साधु न रहस्य बताई ," लोभ , कामना क बगैर तू जळत मार नि ह्वे सकदी . इलै तयार हर अंग का परमाणु मा लोभ हूँण आवश्यक च। जब तलक तु लोभ नि करलि तू जौळि नि सकिद . जब तू हैंकाक अमीरी से जळण गीजि जेलि तु दीन धरम , दया , करुणा , मानव हित सब कुछ त्यागि देली अर तू भारत कु सबसे बडो मिलावटी ब्यापारी बौणि जैली ." . ब्यापारी न कसम खाई , " मि सदा ही लोभ कु गुलाम रौलू .आर म्यार एकी ध्येय रालो की मिलावट को सबसे बडो ब्यापारी बणण ." साधू न आशीर्वचन दे , " तातास्थू !" Copyright@ Bhishma Kukreti 23/10/2012