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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, March 27, 2012

*छात्र धर्म-गुरु धर्म


बोर्ड परीक्षा नक़ल विहीन संपन्न ..... ये समाचार पर एक व्यंग्य
Satirical Garhwali Poems, Satirical Uttarakhandi Poems, Satirical Himalayan Poems
*******छात्र धर्म-गुरु धर्म *******
रचयिता :डॉ नरेन्द्र गौनियाल

तुमारु धर्म पढ्नु नि
हमारू धर्म पढ़ानु नि
धर्म यो च कि
हमन तुमारी नैया पार लगाण
घर्या-देसी
लाटा-काला
अपणा -पर्याउ छुट-पुट
जो बि छौ यै जावो
औंद बगत
अंगूर-संतरों कि कंडी
दगड़ माँ ले अयाँ
एक आध दस्ता क्वारो कागज
द्वी-चार कार्बन
अर मलेटरी कैंटीन वाली बि
दगड़ माँ ले आण
बाकी तुमते
गद्नु तरानै
हमन जाणी
किले छ रूना
किले छ डरना
पर हाँ
ताली एक हाथन नि बज्दी
तुम हमते द्याखा
हम तुमते द्य्ख्ला
बस थ्वड़ी भौत
चरक-बरक सटर-पटर
तुमते करण पड्ली
अर हाँ !
फ़्लाइंग देखि कै तुम नि डरयाँ
हमारो चपड़ासी
स्वीं सुलकणी मारि दींद
कब्बी क्वी कुक्क्रों का सी अटगयाँ
फ्लैंग-फ्लैंग चिल्लान्द
सुद्दी-सुद्दी कुत्गी जान्द
कब्बी क्वी निख्वार्य पकडे बि जान्द
पण ले देकी सब ठीक हवे जान्द
अरे हमारी पैंटों का खीसा कब काम आला
यूं माँ त कतगाए पुरचा समै जाला
पण कंडी-कैंटीन वाली बात नि बिस्र्याँ
तुम बि खैला हम बि खौंला
तुम बि पेला हम बि प्यून्ला
ये तरह
छात्र धर्म -गुरु धर्म निभौंला................डॉ नरेन्द्र गौनियाल 
Saitrical Poems, Satirical Poems in Garhwali