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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, December 18, 2011

Great Garhwali Personalities of Garhwal 42-43

गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -42
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 42
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -42
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti
महाराज उप्पेंद्र शाह (रा .का. 1716 -1717 ई. )
इन बुले जांद बल फते शाह को गुजर जाणो परांत वैको ज्यठो नौनु दिलीप शाह गद्दी मा बैठ पर वैको
अचाणचक इंतकाल समौ पर क्वी टीका ( उत्तराधिकारी राजकुमार ) नि छौ. दिलीप के राणी दुबस्ता (गर्भवती) छे .
इन मा दिलीप को कणसो भुला उपेन्द्र शाह तैं गद्दी मा बिठऐये गे . उपेन्द्र शाह बि जादा दिन तलक ज्यूँद नि राई .
उपेन्द्र शाह धार्मिक मनिख छौ, कवियुं , गुणियों को ख्याल करदो थौ
उपेन्द्र शाह को राज मा व्यवस्था इन थौ :
बजीर: रघुनाथ सिंह रौतेला
दफ्तरी : रत्तु बुगाणा , जेठू बिजल्वाण
बक्शी : भाष्कर डोभाल
दीवान : ज्यूण
भंडारी : विद्याधर डोभाल
लेखवार : श्रीपति पैन्युली
राणी : कटरायण ज्यू (कटूड़ को रज्जा की बेटी )
References;
1- Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand Ka Itihas Bhag 4
History of Garhwal, History of Kumaun)
2- Harikrishn Raturi Garhwal ka Itihas
3- Garhwal ka Aitihasik Birtaant in Garhwali and Memoir of Garhwal as translation by Tara Datt Gairola
बकै अगने खंड 43 मा बाँचो ...
To be continued part 43
गढवाळ का नामी गिरामी लोक अर जाती(मलारि जुग बिटेन अब तलक ) फड़क -43
गढ़वाल की विभूतियाँ व समाज (मलारी युग से वर्तमान तक ) भाग 43
Great Garhwali Personalities and Societies of Garhwal Part -43
भीष्म कुकरेती (Bhishm Kukreti )
महाराज प्रदीप शाह (रा.का. 1717 -1772 )
प्रदीप शाह क राज मा बि भौत सा उंच नीच होई . प्रदीप शाह बीर, चतुर, मयल़ू प्रकृति को मनिख थौ . माफ़ करण वैकी आदत छे
मोरद दें वै पर लकवा ह्व़े गे छौ
प्रदीप शाह को दरबारी :
बजीर : रंगी बिष्ट , गंभीर सिंह भंडारी
सभा कवि : मेघाकर शाश्त्री बहुगुणा न संस्कृत काव्य रामयण प्रदीप की रचना करी .
दीवान : रघुपति
वकील: श्रीबंधू मिश्र, लक्ष्मीधर, धरणीधर ,
दफ्तरी : सारंगधर खंडूड़ी , शंकर डोभाल
फौन्दार : श्रीविलास, सुरजा, खरक्याण , भीमसिंह बर्त्वाल ,खड्ग सिंह कठेत, सादर सिंह कठैत
सभासद : पुरिया नैथाणी , भुजबल सिंह
सेनापति : गुलेर (कांगडा ) का प्रवासी नर पति सिंग गुलेरिया
दा डबराल न प्रदीप शाह को राज की छार घटनाओं तैं टक्क लगैक बताई
१- राणी राज जब प्रदीप शाह की ब्व़े राज करदी छे
२- युवा राज
३- कुमाऊं से सम्बन्ध
४- भाभर अर दून पर रोहिलाओं को अधिकार
राणी राज
प्रद्देप शाह जब छ्वटु छयो त वैकी ब्व़े राज काज सम्बाळदि छे
राज मा राजपूत दल अर खशिया पाळयूँ मा रोज खैंचा ताणी रौंदी छे
राजपूत सेना वल़ा भैर देसी खासकर हिमाचली छया अर खसिया गढवाळ का
ही ( बामण जजमान द्वीई )था पण जरा जट्ट क़िस्म क था जौं तैं उद्दंड प्रजा नाम दिए गे
पैल का रज्जा दुई जात्युं का बीच संन्तुलन रखदा छया . पण राणी ये काम तैं ठीक से
नी सम्बाळी सौक अर दरबार मा कथगा इ जुंटा बौ नी गेन
पंच भैया कटोच
राणी क बगत गढ़वा ळ का दरबार मा पांच भै कटोच बड़ा काम का
पदों पर छ्या .यूंक नाम छौ :
भगवत सिंह
आलम सिंह
महीपत सिंह
दयाल सिंह
कमल सिंह
हरी सिंह कटोच : मेदनी शाह को टैम पर यूँ पंच भय्यों क बुबा हरि सिंह
कटोच कांगड़ा बिटेन श्रीनगर राज दरबार मा कै
खास पद पर लगी गे छौ . हरि सिंह तैं थोक्दारी अर जागीर मिलीं छे
चूँकि राणी बि कांगड़ा कि कटोच छे त वा यूँ पर जादा भर्वस करदी छे
इन बुले जांद बल य़ी पंचभया बड़ा करुड (क्रूर ) छ्या
यूँ मा अर गढवाळी (जौ तैं खश बोले जांद ) दरबार्युं मा रोज की
खैंचा ताणी इतियास प्रसिद्ध च
यूँ पंच भाय्यों न जनता पर य़ी नै दंड या रजौ- ड्डवार (कर ) लगै छौ
स्यून्दी सुप्प: जै परिवार मा जथगा स्यून्द (जनान्यूँ मांग ) तथगा सुप्प ड्डवार
राजकोष मा दी न पोडद छे
चुल्लू सुप्प : ज्थ्गा चुल्लू तथगा रज्जौ ड्डवार (कर)
आमदनी सुप्प : आमदनी को हिसाब से रज्जौ ड्डवार (राजकीय कर )
पंच भय्या कटोचूं हत्या
पंचभय्या कटोच अत्या चारि इ णा यूँ दरबार मा बि सत्ता अपण कब्जा मा
कौरी ल़े छे . पुरिया नैथाणी , शंकर डोभाल जना दरबार्युं न सक्कड़ (गुप्त मन्त्रणा )
कौरी अर कटोच भाईयों तैं मार्णो कटोचूं घर की घेरा बंदी करी . पंच भय्या
भागे गेन अर प्रजादल का लोकुन भट्टी सेर का अगने यूँ सबबी भायुं तै मारी दिने (1726 ई.)
उख एक चबूतरा च जैको नाम 'पंच भय्या कटोचुं मांडा' अज्युं तक च
पंच भय्यों कटोचुं टैम की ऐतियासिक घटना
कुमाऊं को आक्रमण : ये टैम पर कुमाऊं का गढवाळ पर आक्रमण मुख्य घटना च
अर इख्मा कुमाऊं रज्जा जादा सफल णे होई
गढवाळ की सेना न बि कुमाऊं पर आक्रमण करी
खड़यंत्री पूरण मल गैंडा बिष्ट : कुमाऊं का एक राज्याधिकारी पूरण मल गैंडा बिष्ट
न अपण कुमौं रज्जा तैं धोका दे की पाँच भाय्यों की सहायता करे अर कबि यू
पूरण मल गैंडा बिष्ट गढवाल को थौ अर वैन कुमाऊं रज्जा की सहायता कॉरी छे
पंच भय्या कठैतऊँ कठैतगर्दी
पंच भय्यों कटोचुं मोरणो परांत दरबार मा द्वी पाळी (दल ) ह्व़े गे छा
एक पाळी को मुखिया बजीर गजे सिंह भंडारी अर शंकर डोभाल छ्या जौं तैं
पुरिया नैथाणी, भागु सौन्ठियाल को सौ सौकार छौ
सादर सिंह कठैत, सादर सिंह को लौड़ खड्ग सिंह कठैत, फौंद दार छया अर कठोर छ्या
यूँ शंकर डोभाल, , बजीर गजे सिंह भंडारी , अर भागु सोंठियाल के हत्या करवाई
जब कठैत भयात छ्वटु आयु वल़ू राजकुमार की हत्या करण वाळ छ्या त
पुरिया नैथाणी राजकुमार प्रदीप शाह तैं अपण गौं नैथाणा ल्हें गेन अर उख वैकी
परवरिश कॉरी
कठैतऊँ न प्रजा पर कटोचुं से जादा अत्याछार कौरिन अर कुछ ण्या कर लगैन जन की :
हड्ड सेर ( कर) : जो मुर्दा तैं जल़ाण पर लिए जांद छौ
हौळ सेर (कर ): हरेक बल्दुं जोड़ी पर कर
गज सेर (कर) : कूड की लम्बे हिसाब से कर
सौणी सेर (कर) : हरेक दुधाळ भैंसी पर कर
एक पावड़ा को सार
डा शिव प्रसाद डबराल न एक लोक गीत को अनुवाद इन कौर
"' स्युंदी सुप्प' कर चुकाने के लिए कई भाईओं णे एक ही पत्नी से निर्वाह शुरू कर दिया
'हौळ सेर' कर चुकाने हेतु परिवार एक ही हल और एक ही जोड़ी बैल रखने लगे
'चुल्लू सुप्पी' कर से बचने के लिए परिवार अलग ही नही होते थे
'सौणी सेर' कर से बचने के लिए ग्रामीण एक ही भैंस से काम चलाने लगे "
कठैत भय्युं हत्या : कठैत भय्युं हत्या बजीर मदन सिंह भंडारी अर भीम सिंह बर्त्वाळ के सेनाओं न
भगैक दशौली ज़िना करी
नित्यनन्द खंडूरी क कारनामा : शंकर डोभाल की हत्या क बाड़ नित्य नन्द खंडूरी मंत्री बौण अर वैन
जु बि शंकर डोभाल की व्यवस्था छे वां मा बदलाऊ करी दे जां से कथगा ही प्रजा हितकारी काम बंद ह्व़े गेन
मतबल या च बल राणी राज मा अंधेर नगरी चौपट राजा वल़ू हिसाब छौ . परवाण गिरी (नेतृत्व )
खतम ही छौ.
प्रदीप शाह को युवा राज याने चकणो चक्कर मा रज्जा
प्रदीप शाह न जब राज सम्बाळ त हुस्यारी से अपण काम करी. इन बुले जांद बल कामकाज मा
पैथर बिटेन पुरिया नैथाणी को पुरो हाथ रौंद छयो अर ना त प्रदीप शाह अर णा ही पुरिया
नैथाणी सुद्दी मुद्दिक हस्तक्षेप करदा छया बस जब ज्रोरात होऊ त हस्तक्षेप करदा छ्या
चन्द्र मणि डंगवाल : पुराण लिख्वारून न (इतियासकार) मंत्री चन्द्र मणि की बड़ी बडे करी.
ये बगत कुछ पुराणा सुप्पों/सेरों (कर ) तैं या त बंद करे गे या सुप्प/सेर (कर ) कम करे गेन
दून मा मातबरी : प्रदीप शाह को राजकाज से दून मा मातबरी (समृधी) आई अर एक
मुसलमान सरदार सहारनपुर मा दिल्ली का बादशाह को फौंद दार नजीब्दुल्ला तैं या मतबारी नागँवार लग वैन
दून उपत्यका तैं छीनी
चकनों का चक्कर मा : प्रदीप शाह राज काज मा त ठीक ही छौ पर कुस्न्गत्युं असर मा औण
से जुवारी, रांडबाज ह्व़े गे थौ . दूसरों कज्याणयूँ पर नजर डाळण बिसे गे छौ. चकनौं राज बि ह्व़े
कुमाऊं से ठीक सम्बन्ध : १७३१- १७३९ का करीब दुई राजाऊं सम्बन्ध ठीक ठाक ही रैन
रोहिलों कुमाऊं पर आक्रमण: रोहिलों न १७४२ मा कुमाऊं पर आक्रमण करी अर कुमाऊं पर अधिकार करी .
प्रदीप शाह न कुमौं रज्जा तैं शरण दे
गढवाळी सेना को रोहिलों दगड लड़ाई : कुमाऊं तैं सहायता दीनो बान गढ़वाल रज्जा न रोहिलों से लड़ाई लौड़
सेनानायक शीशराम सकलानी : शीश राम सकलानी न रोहिला-ग्ध्वाले जुद्ध मा बड़ा पराक्रम दिखें जौंका
लोक गीत अबी बि सुणणो मिल्दन
जुद्ध मा जीत अर फिर हार; पैल पैल त गढवाली सेना तैं द्वार हाट . दूणागिरी मा सफलता मील पर पैथर
कैंडारो मा हार मील , रोहिलों न गढवाल मा बि लूटपाट करी अर फिर कुमाऊं रज्जा तैं रोहिलों दगड संधि करण पोड़
संधि को हिसाब से अगने गढवाली रज्जा कुमौं नरेश की क्वी मौ मदद नि कॉरी सकदो छौ
प्रदीप शाह को कुमाऊं पर आक्रमण : काशीपुर कुमाऊं को एक हाकिम हरि राम जोशी/जयकृष्ण जोशी छौ जै तैं
कुमौं को महामंत्री अर कुमाऊं को राजकुमार दीप चन्द को स्र्नर्क्ष्क शिव दत्त जोशी न हाकिमी से निकाळी दे थौ
हरिराम जोशी यां शिव दत्त जोशी पर से खफा छौ अर वैन शिव दत्त जोही से बदला ल़ीणो बान गढवाळओ
रज्जा प्रदीप शाह तैं भक्लाई. प्रदीप शाह भकलौणी मा ऐ गे अर वैन कुमौं पर अधिकार करी पण
कुमौं के प्रजा अर अधिकार्युं न प्रदीप शाह तैं रज्जा नि मानी . इना गढवाळ का कुछ मंत्रियुं न बि अपण रज्जा
तैं धोका देई . लड़ाई मा दुई यूँ नुकसान ह्वेई . फिर दुई राजाओं मा संधि ह्वेई
रोहिलों भाभर अर दून पर अधिकार : रोहिलों न ये भूभाग पर अधिकार करी
रोहिलों सल़ाण पर छापे: रोहिल्लों न सल़ाण पर बि छापा मारिन पण सल़ाणियूँ न रोहिलों तैं भगाई दिनी
सिखों छापा : दून प्रदेश पर सिखों क छपा बि पड़दा छ्या.
References;
1- Dr Shiv Prasad Dabral, Uttarakhand Ka Itihas Bhag 4
History of Garhwal, History of Kumaun)
2- Harikrishn Raturi Garhwal ka Itihas
3- Garhwal ka Aitihasik Birtaant in Garhwali and Memoir of Garhwal as translation by Tara Datt Gairola
बकै अगने खंड 44 मा बाँचो ...
To be continued part 44
Copyright @ Bhishm Kukreti, Mumbai