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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, December 22, 2011

गढवाळी मा जड्डू/ठंड/ पतझड़ पर कविता फड़कि - २


गढवाळी मा जड्डू/ठंड/ पतझड़ पर कविता फड़कि - २
भीष्म कुकरेती
 
जख जग्गू नौडियाळ न  ह्यूं से हुईं परेशानी क बारा म कविता रच
उख प्रकृति कि कवित्री बीना देशवाल बेंजवाल न ह्यूं तैं उनि ल़े जन भेमाता
(भगवान्) दींदु. बीना बेंजवाल न अपणी यीं कविता मा ह्यूंद तैं क्वी बुरु नाम नि दे .
बल्कण मा बीना न ह्यूं अर हौरी प्राकृतिक चीजुं तैं मनिख रूप सी दे अर
कविता तैं नयो मिजाज दे द्याई .
 
 ह्यूंद
 
 
बीना बेंजवाल
-१-
 
ऊँची हिंवाळयूँ बिटि
उड़ीक यूं घाम को पंछी
ह्यूं का टोप्या बुग्यालुं सणि
मलासद अजब पणा पंख्युड़ो न
ह्यूं की ट्व्पल़ी सरकी
खित्त हैन्सी जांद तब
कुखड़ी क्वी फूल
-२
 
स्वां स्वां करदा बौण मां
आन्द जब औडळ
झिट घड़ी तैं लुकैक
डालोँ कि हैरी चदरी
बांज-बुरांस का डालोँ सणि
पैरे दींद
बुरांस का कूटमुणोऊ वळी
सुकली चदरी
 
 
-३--
फसल कटीं सायों मा
हिसर -किल्मोड़ का बोटों पर
बच्यीं रै जान्दीन जब
घासी क्वी का डाळी
गाड गदन्यों का छ्वाड़ों
ब्ज्दन तब
दाथुड़ी छुणक्यळी
 
सौजन्य : बीना बेंजवाल, कमेड़ाs  (बीना  कू काव्य संग्रह)  आखर , १९९४
 
हम द्वीइ कवियुं मानसिकता मा सरासर भेद/अंतर पांदवां
जख जग्गू नौडियाल तैं ह्यूंद मा परेशानी ही दिख्यायी (हालांकि ह्व़े बि च )
वख बीना बेंजवाल तैं ह्यूं मा प्रकृति को श्रृंगार रस ही दिख्यायी
बीना बेंजवाल कि ह्यूंद कविता मा इनी भाव मिल्दन जन कि कनाडा
का ब्लिस कारमेन की कविताओं मा मिल्द . वैका प्रतीक
बि अनोखा होंदन त बीना न आम प्रतीकुं से कुछ nayaa  बिम्ब खुज्याणे
कोशिश यीं कविता मा कार . प्राकृतिक दृश्य दिखाणो मामला मा बीना अमेरिकन कवियत्री
एलीजाबेथ बिशोप से कम नी च . बीना की यीं कविता से बोले जै सक्यांद बिम्ब
पैदा करणो मामला मा बीना कखी n  कखी कनाडा का कवि गुसताफसन रोल्फ़
का बरोबर छ
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