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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, January 21, 2015

हरिद्वार , बिजनौर और सहारनपुर इतिहास संदर्भ में अनार्य नरेश अथवा दास राजा

Non Aryan Kingdoms- Kings of Rigveda in context History of Haridwar ,Bijnor and Saharanpur
            

                                हरिद्वार , बिजनौर और सहारनपुर इतिहास संदर्भ मेंअनार्य नरेश अथवा दास राजा 

                                                              History of Haridwar Part  --47   

                                                         हरिद्वार का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास -भाग -47                                                                                      
                           
                                                   इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती   

                           किरात दुर्दांत जाति 

          ऋग्वेद अध्ययन से कई अनार्य जातियों व् नरेशों का पता चलता है।  इन्हे ऋग्वेद या वैदिक साहित्य में दास नाम दिया गया है। 
            ऋग्वेदिक किरात पड़ोसी पहाड़ियों में निवास करती थी और ऋग्वेद में बार बार एक ऐसी महान दास जाति का प्रयोग हुआ है जिसे हराने के लिए आर्यों को इन्द्रादि की आवश्यकता पड़ी थी।  यह महान जाति शक्तिशाली व दुर्जेय थी। 
                            ऋग्वेदिक दास नरेश 
शंबर - ऋग्वेदिक अनार्य नरेशों में शंबर सबसे अधिक शक्तिशाली नरेश था आर्य नरेश (परुष्णी -विपासा -शुतुद्रि क्षेत्र ) दिवोदास को चालीस वर्षों तक घोर युद्ध करना पड़ा था।  याने शंबर कांगड़ा का नरेश था। 
ऋग्वेद में निम्न अनार्य नरेशों या दास राजाओं का विवरण मिलता है -
चुमुरी 
धुनि 
शुष्ण 
बलबूत 
पिपरु 
कुयव 
वृत्र 
व्यन्स 
रुधिका 
नमुचि 
कुलितर 
भेद 
अज 
यक्ष 
शिग्रु
इलीविष 
वर्चिन 
इनमे से संभवतया कुलितर व नमुचि शंबर के पूर्वज थे। 
भेद ने शंबर की हत्या की थी और दिवोदास के पुत्र सुदास से दो भीषण युद्ध किये थे। 


**संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
Copyright@
 Bhishma Kukreti  Mumbai, India 19 /1/2015 

Contact--- bckukreti@gmail.com 
History of Haridwar to be continued in  हरिद्वार का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास; बिजनौर इतिहास, सहारनपुर इतिहास  -भाग 48 

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