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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, January 21, 2015

ऋग्वेदीय समय में दास भूमि विस्तार

Das Bhumi in Rigveidic Period in contaxt Haridwar, Bijnor and Saharanpur History
                                        ऋग्वेदीय समय में दास भूमि विस्तार 
                                                        History of Haridwar Part  --48   

                                                         हरिद्वार का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास -भाग -48                                                                                      
                           
                                                   इतिहास विद्यार्थी ::: भीष्म कुकरेती   
 
   ऋग्वेद अनुसार वैदिक राजाओं ने कई युद्ध किये और चालीस वर्षों तक अनार्य /दास नरेशों से युद्ध करते रहे।  इसका अर्थ है कि दास भूमि पंजाब के नजदीक , कांगड़ा तक ही सीमित नही रही होगी।  दास भूमि का विस्तार अवश्य ही उत्तराखंड , हिमाचल , सहारनपुर , हरिद्वार , बिजनौर तक फैला था। 
  दिवोदास ने दास नरेश शंबर के सौ शिला दुर्गों तथा पुरकुत्स ने सात दुर्ग ध्वस्त किये।  देवदास ने साठ हजार सैनिकों की हत्या की।  वशिष्ठ ने तीन हजार दासों को आहत किया।  तो वामदेव ने पचास हजार कृष्ण रंगी दासों  मारा। 
       दास हत्त्या युद्ध में एक लाख वीरों के मरने का उल्लेख मिलता है।  ऋग्वेद में अपार दासों को मरने का उल्लेख है। 
इन आंकड़ों से विदित होता है कि दास भूमि सप्तसिंधु से काफी दूर   तक पंहुची थी और शायद सहारनपुर , उत्तराखंड , बिजनौर तक दास भूमि का विस्तार था। 

**संदर्भ - ---
वैदिक इंडेक्स
डा शिव प्रसाद डबराल , उत्तराखंड  इतिहास - भाग -२
राहुल -ऋग्वेदिक आर्य
मजूमदार , पुसलकर , वैदिक एज 
Copyright@
 Bhishma Kukreti  Mumbai, India 20 /1/2015 

Contact--- bckukreti@gmail.com  
History of Haridwar to be continued in  हरिद्वार का आदिकाल से सन 1947 तक इतिहास; बिजनौर इतिहास, सहारनपुर इतिहास  -भाग 49  
 

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