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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, May 23, 2011

The Burning of Red Chillies in Tantrik Performances

Culture of Kumaun and Garhwal
The Burning of Red Chillies in Tantrik Performances
तंत्रों में लाल मिर्च जलाने का रिवाज
(Mantra tantra in Garhwal, Mantra Tantra in Kumaun , Mantra Tantra in Himalayas )
Bhishma Kukreti
गाँव हो शहर आपको कुछ तन्त्र कार्य में लाल मिर्च जलाने वाले मिल ही जायेंगे
लाल मिर्च जलाने के पीछे भैरव तंत्र के दो सिद्धांत कार्य करते हैं . एक सिधांत है जिसमे भक्त को आती साँस, जाती साँस व स्वास नलिका में वहां जहाँ दोनों साँस मिलती हैं पर ध्यान देने का सिद्धांत है व दूसरा सिधांत छींक पर ध्यान देने का सिद्धांत है
आप भी अनुभव करेंगे कि साँस लेने या साँस छोड़ने के एक एक क्षण पर जब आप सूक्ष्म ध्यान देन तो एक असीम आनन्द प्राप्त होने लगता है .
इसी तरह छींक आने से पहले छींक पर ध्यान दिया जाय (छींक नही आनी चाहिए ) तो एक असीम आनन्द प्राप्त अवश्य होता है
उर्ध्वे प्राणों ह्याधो जीवो विसर्गात्मा पारोषरेत
उत्पति द्वितयस्थाने भरणद्भ्रिता स्तिति: (विज्ञानं भैरव २४ )
Bhairva answered , ' The exhailing breath should ascend and the inhailing breath should descend forming a visarga 9consisting of two points) .Their state of fullness is found by fixing them in the two places of their origin
मरुतोतअन्तवर्हिर्वापी वियद्यगमानिववर्तनात
भैर्व्या भैर्व्स्येत्थ्म भैरवी व्यज्यते वपु : ( विज्ञान भैरव २५
)
O Bhairavi , by focussing one's awareness on the two voids at the end of the internal and external breath , thereby the glorious form of Bhairav is revealed through Bhairavi
न ब्रजेन विशेच्छक्तिर्म्रूदृपा विकासिते
निर्विक्ल्पत्या मध्ये ट्या भैर्वरूपता ( विज्ञानं भैरव २६ )
The enrgy of breath should neither move out nor enter , when the centre unfolds by the dissolution of thoughts then one attains the nature of Bhairav
क्षुताद्यन्ते भये शोके ग्व्हरे वा रणाद्दृते
क्रित्हले क्षुधाद्यन्ते ब्रह्मसत्ता समीपगा (विज्ञानं भैरव ११८ )
At the begining and end of sneezing , in a state of fear or sorrow on top of an abyss or whole feeling from a battlefield , at the moment of intense curiosity , at the begining or end of hunger such astate comes close to the experience of Brahmana (Bhairav)
तांत्रिक कर्मकांड में मिर्च का धुंवां या घी का धुपण पश्वा को साँस पर ध्यान देने व छींक पर ध्यान देने का एक योग क्रम है
Copyright @ Bhishma Kukreti