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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, May 17, 2011

मान्त्रिक या तांत्रिक अनुष्ठानो में मयूरपंख की अहमियत

Culture of Garhwal and Kumaun
Role of Peacock's Feather in Mantrik or Tantrik Performances
मान्त्रिक या तांत्रिक अनुष्ठानो में मयूरपंख की अहमियत
(Mantra Tantra of Garhwal , Tantra Mantra of Kumaun, Mantra Tantra of Himalayas )
Bhishma Kukreti
आपने देखा होगा कि मान्त्रिक या तांत्रिक म्युर्प्न्ख अपने पास रखते हैं और मान्त्रिक तांत्रिक अनुष्ठान में पश्वा (भक्त या जिस पर भूत लगा है )
को मयूरपंख दिखाता है
वास्तव में यह विज्ञान भैरव या भैरव तंत्र या रुद्रालय तंत्र का एक सिद्धांत का व्यवहारिक रूप है जो इस प्रकार से है
शिखीपक्षेश्चित्ररूपैरमंड़लै शून्यपंचकम
ध्यायातोअनुत्तरे शून्य प्रवेशो हृद्यम भवेत ( विज्ञान भैरव : ३२)
Lord Shiva says to Parvati --- By mediating on the five voids of the senses which are like colours of peacock's feathers , the yogi enters in the heart of absolute Void
आम मनुष्य इन्द्रियों के शून्य को नही जानता किन्तु यदि मनुष्य देर तक मयूरपंख को निहारता रहे तो वह वर्तमान (जहाँ भूतकाल की शरम नही और भविष्य की इच्छा या चिंता नही ) में पहुंच जाता है
इसी भैरव तंत्र के सिद्धांत को व्यवहारिक जामा पंहुचाने हेतु झाडखंडी पश्वा को बार बार मयूरपंख दिखाता है
(This article is to analyze the Mantra and Tantra Philosophy of Kumaun and Garhwal and not to support or condem the philosophy)


Regards
B. C. Kukreti