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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, February 22, 2010

ब्यौली कु मामा

{कौथीक माँ,यु के का चीफ मिनिस्टर कु उद्घाटन दिवस का समय पर , नि आण पर }

ब्यौली कु मामा

सुन्दरी कु ब्यू क दिन जनी नाजिखू आंदा गिनी , वीका ब्व़े- बबन , गौ भयात, आस पडोस दूर- दराज का नाता रिसतादरु थे न्यूत भिजण शुरू कैदे ! सुन्दरी कु ममा देहरादून माँ छो काम कनु स्यु साब वीथी तक लगे की पीली त फोन से , फिर चिठ्ठी , फिर निमंत्र्ण पत्र भेजी वोद नाद कैकी बोली गई की १९ २० को भाणजी ब्यू च वेल उभरी बोली की .... हा हां ह .. मी पहंचु एक स्फ्ता पैली !

सहरु माँ खाशकर मुम्बे जन सहरुमा हर चीज मैंगी ! खैर , सुन्दरी का बब्ल अपनी औखात क अनुसार हर चीज कोरी ! कै भी चीम कमी नि रेजो वें अपणी समणी , अपणी आंख्यु न करी ! पंडाल . साजो सामान , खाणी- पैनी सब कुछ ! जनी तारीख नाजिखू आई वनी पौणा न्युतेर भी आणा शुरू ह्व़ाय ! एक हफ्ता पेल बीटी उनका घरमा रौनक ही रौनक ...! घर सजी, पंडाल सजी, बेदी सजी , ! बरातों दिन भी आगई ! बरात भी आई ! आवा भगत का बाद बेदी माँ फ्यारा फौरा ह्वेनी ! पंडाजिल बोली ' ------- ये भाई नौनी कु मम्मा थे बुलावा , " सब लगी मामा थे खुज्याँ पर ! ममा देख्या त आई नि ! तभी कैल बोली ' अजी ई त गे छा पर यखना अपणा ससुरास्म " ! वो ... , सरकरी खर्च्मा होलू आयु , तभी कैल बीचम व्यंग माँ बोली ! " हां भाई .. भांजी थे थै कभी मिली जै सकद आर मिली भी जालू पर स्याल सायली हे बाबा .. कनी बात छा कना .. ???

एक बुजर्गल बोली पंडा जी सरासरी मन्त्र पडा ! कख छा लगया ! ब्युली गे, बरात ग़े, न्युते गया पर ममा अभी तक नि आयु !

पराशर गौड़
दिनाक २१ फरबरी २०१० दिन्म