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Sunday, September 4, 2016

Excellent Garhwali Poetries by Payash Pokhara Part 2-

Critical and Chronological History of Modern Garhwali (Asian) Poetry –-308
                    Literature Historian:  Bhishma Kukreti
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"जिंदगि घण्डाघोड़ हुईं चा"
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स्याम-सुबेरा कि उठा-पोड़ हुईं चा ।
जिंदगि वल छोड़ पल छोड़ हुईं चा ॥
छि: भै या कनि घुवांरोळ करीं चा ।
जिंदगि जन तमखू की सोड़ हुईं चा ॥
बगैर दवै-दारु का कणाट-रुणाट चा ।
जिंदगि जैर-मुण्डरा की तोड़ हुईं चा ॥
ब्यखुनि-फज़ल जिंदगि थैं बुलाणा रवां।
जिंदगि ऐड़िकै कि पल्या छोड़ हुईं चा ॥
धौ संदकै नांगा गात थैं ढकाणा रवां।
जिंदगि मा सदनि जंक-जोड़ हुईं चा ॥
त्यारा-म्यारा भाग कु कैल लुछी साक।
जिंदगि मा मुण्ड फ्वड़ा-फोड़ हुईं चा॥
दैं पाळि का बैं पाळि नि ठस्कै साका।
जिंदगि हैळा का दुदन्तु बोड़ हुईं चा ॥
चल एकदां फेरि हथ थामिकि हिट ले ।
जिंदगि चिफळि सड़कि कु मोड़ हुईं चा॥
बगैर बरखा चाल चमकणि च "पयाश" ।
जिंदगि पिरुळु बीच घण्डाघोड़ हुईं चा ॥
@पयाश पोखड़ा ।
"वो क्य समझणू चा"
******************
खन्द्वार हुयां कूड़ो थैं घार समझणू चा ।
उड्यार हुयां म्वारों थैं द्वार समझणू चा ॥
जणेक घूम फर जो छट्ट छोड़ जंदनि ।
वो यूं सड़कि बाटों थैं यार समझणू चा॥
ब्यखुनि-फज़ल बड़ि-बड़ी छुवीं लगांद।
बड़अदम्यू का वार-ध्वार समझणू चा॥
एक्सपोर्ट का लारा-झुल्ला गति लगैकि।
लेविस की जीन्स थैं सुलार समझणू चा॥
दुन्यादारि सिख्दा-सिख्दा दानु ह्वै ग्याइ।
अभि तक द्वि जमा द्वि चार समझणू चा ॥
अंध्यरा मा लै गीं वो सर्या फसल-पात ।
वो जौंथैं वो सळौं की डार समझणू चा ॥
वो त वैका दादा कु मन्यौडर अयूं छाई ।
जैथै वो वैका बब्बा कु तार समझणू चा ॥
सोचि-समझिक भ्यटेंई वैथै तू "पयाश" ।
द्वि फांग्यूं ल्हेकि थोकदार समझणू चा ॥
कत्गै खुद खड्यईं छन खुदेड़ माटा मा।
वो मिथैं मटगळा की धार समझणू चा ॥
पयाश पोखड़ा ।
रुमुक सतपुळि नयरि छाल की
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थड़्या-चौंफळा सि लगाणि च रुमुक ।
जन जून भ्यटणा को जाणि च रुमुक ॥
मेळु-पंया-सकिन्या का पल्वस्यां फूल ।
अफु पिंग्ळि पोतळ चिताणि च रुमुक ॥
कुबरण्यां-डुबरण्यां कळचुण्ड़्या आंखि।
फर्र-फर्र ड्यब्ळि फरकाणि च रुमुक ॥
समळ्यौण्यां खुद थैं बटि-बाटा लगैकि ।
बिंदरि गौड़ि सि कन रमाणि च रुमुक ॥
पिंग्ळु दुसला कु मुण्ड्यड़ू बांधिकि ।
कणट करदा-करदा जाणि च रुमुक ॥
दिनमनि की हैंसि ठट्ठा छोडि-छाडिक ।
यखुल्या यखुलि रुफणाणि च रुमुक ॥
झणि कै का सोचुम पोड़िक "पयाश" ।
खुट्यूं ऐथर-ऐथर सरकाणि च रुमुक ॥
@पयाश पोखड़ा ।
जु धार पोर यखुलि कुळैं डाळि नि हूंदी
****************************


मी से अब हौरि हाळि-झाळि नि हूंदी ।
सच्चे मी से अब आळि-टाळि नि हूंदी ॥
निसिणि जि किळै कैरु मि कैका बाना ।
न भैमी से अपणि रात काळि नि हूंदी ॥
जत्गा खतुदु उत्गा हौरि भ्वरे जांदा । मयळ्दु खुचिलि कभ्भी खाळि नि हूंदी ॥
जलमजात कु गळद्यवा छेदे ले छक्वै । 
पर मी खुणै तेरि गाळिगाळि नि हूंदी ॥
सदनि लुण्यां-काजोळ आंसु ब्वगणा रैं ।
मेरि खुदेड़ आंखि कभि छाळि नि हूंदी ॥
जु जिकुड़ा का भीतर चवी भैर भि चा ।
भला आदिम से कतै इंद्रजाळि नि हूंदी ॥
आज म्यारु गौं सोरग से कम नि हूंदु । 
जु द्वार-मोर-संगडु फर ताळि नि हूंदी॥
गौं का द्यप्ता गौं मै रैंदासरत लगैले ।
नेतौं का हथुम जु डौंरि-थाळि नि हूंदी ॥
कन जि नि द्यख्दा भय्यूं का सुख-दुख ।
जु द्विया भितरौं का बीच पाळि नि हूंदी ॥
यो मोळ कु माद्यौ सदनि मोळ रै जांदु ।
जु अंध्यरा मा तिल बत्ती बाळि नि हूंदी ॥
समळौण्यां खुद थैंको समळांदु 'पयाश'?जु धार पोर यखुलि कुळैं डाळि नि हूंदी ॥
@पयाश पोखड़ा ।
"आंसू"
*******
रुंदा-रुंदा इतगा रुणपित ह्वैगीं आंसु ।
मेरि आंख्यूं मा सदनि खुण से गीं आंसु ॥
धौ-संदकै जनि मिल बिजळिं इ आंसु ।
तनि फेरि खुचलिम मुण्ड नवै गीं आंसु ॥
धुयां-धुयां लगणा छन इ काजोळ आंसु ।
आंसु थैं आंसुल भलिकै ध्वै गीं आंसु ॥
दिन-रात मेरि सीणी की निसिणी काया ।
मी दगड़ सर्या राति बिज्जी रैगीं आंसु ॥
सर्या साल आंसु कि फसल लैणा रवां ।
तैळ्या-मैळ्या सार्यूं छक्वै ह्वैगीं आंसु ॥
मुण्डम धैरिकि कर्जा कि सि फंच्ची ।
बिना बिसौण की जिदंगि कै गीं आंसु ॥
खौळ्यूं-खौळ्यूंबौळ्यूं सि च "पयाश" ।
लोग वैका गळ्वड़ों मा तरकै गीं आंसु ॥
@पयाश पोखड़ा ।
"प्लीज़"
*******
त्वैकु हथ ज्वड़्या छन घड़ेक 
चुपरौ प्लीज़ ।
ल्वैखाळ ज़िकुड़ा मा लूण नि
बुबरौ प्लीज़ ॥
पसेण फर लग्यान म्यारा छाळा-
फुफ़रा ।
अपणु लप्यता थैं मी जनै नि
हपरौ प्लीज़ ॥
म्यारु मिज़ाज हौरु से ज़रसि
करळु चा ।
मी थैं जना-कनौं फर कतै नि
सबरौ प्लीज़ ॥
भ्यटेले जतगा भ्यटेणी छे जै
दगड़ भि ।
पर मेरि अंग्वळि का बाना नि
टपरौ प्लीज़ ॥
"पयाश" त खरड़ि धारम भि छैल
खोज़ि द्यालु ।
चुड़ापट्टि कु घाम हूण चैंद दिन-
द्वफरौ प्लीज़ ॥
@पयाश पोखड़ा ।
भाई विनोद रावत जी को सप्रेम समर्पित-
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मि हिटणु रौंमि हिटणु रौंमि हिटणु रौं ।
खुट्यूं का छाळौ थैं किटणु रौं,
मि किटणु रौं ॥
निंद मलसणि राया मुण्ड,सर्या-सर्या उमर,अदनिंदळ्या मा भि स्वीणा द्यखणु रौं,मि द्यखणु रौं ॥
म्यारा भाग मा हि छे या,निरभागा की भताग ।
छारु लग्यां भाग थैं छिटणु रौं,मि छिटणु रौं ॥
मेरि लपग्यूं फर यो गंगल्वड़ा,को बांधि ग्याइ ।
कीला कु सि गोर रिटणु रौं,मि रिटणु रौं ॥
मील त ग्याइ मत्थि दाजी थैं,बुबाजि की चिट्ठी ।
किळै पोस्टमैन दादा थैं बिटमणु रौं,मि बिटमणु रौं ॥
कन कट्या आंख्यूं-आंख्यूं मा,सर्या रात "पयाश" ।
भदळुन्द कु छन्छ्या सि खिटणु रौं,मि खिटणु रौं ॥
यो क्य लेखिगे आंसुल जिकुड़ि की
पाटी मा ।
बगैर फुज्यां अफि-अफि मिटणु रौं,मि मिटणु रौं ॥
@पयाश पोखड़ा
त्यारा गौं मा
************
भितरौं-भितरौं म्वाड़ा म्वर्यां ह्वालाब्वलेंद त्यारा गौं मा ।
चौछ्वड़ि काण्डा-क्याड़ा धर्यां ह्वाला,ब्वलेंद त्यारा गौं मा ॥
आस छेउज्यळु छ्याईहैंसि-खुसि छे ब्याळि तक ।
आज निरसा अंध्यरा भ्वर्यां ह्वालाब्वलेंद त्यारा गौं मा ॥
मेरि दीदीतेरि भुलिकाकि-बोडी अर पिठल्वठ्या भै ।
बाटाउंद रिस्ता-नाता स्वर्यां ह्वाला,ब्वलेंद त्यारा गौं मा ॥
तेरि आख्यूं मा पाणि बूंद अब किळै 
नि चिफळेन्दी ।
"
पयाश" देखिकि आंसु डर्यां ह्वालाब्वलेंद त्यारा गौं मा ॥
मुछ्यळा मुंजिगीं सबि मवस्यूं का पर धुवांरोळ हुईं चा ।
सबुका चौदा करम कर्यां ह्वालाब्वलेंद त्यारा गौं मा ॥
@पयाश पोखड़ा
म्यारा ब्वै-बब्बा
**************
रिटैर सि सिपै-चौकीदार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ।
खंद्वर्या कूड़ियूं का पैरादार ह्वैगीं,
म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
पिनसिनी कि फसल-पात हुणीं च
मैना का मैना ।
लैंणाकटेणां कु तैयार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
लैगीबरमूडाकैप्रिजीन्स का जमना 
मा घुमुणुं छौं ।
दरदरा पट्टदार सुलार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
ब्वै का मुर्खला बब्बा की मुरखी बेचिं 
दीं मिल वै दिन ।
जै दिन बटैकि बिमार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
जाण न पछ्याण क्वी सारु दिदंरु 
भि नि राइ युंकू ।
द्वि अदम्यु कु परिवार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
नौना-बाळौ दगड़ हैंसि-खेलि मा 
सदनि रंगमत्या रौं ।
दुख-दैनि का असगार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
क्य कनबूढ़-बुढ्यौं कु पापी पराण 
भि त नि मनदू ॥ 
अपणै छ्वारौं कु छुछकार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
रोज-रोज गेड़ मारि-मारिक गंठेणु 
च दानू सरैल ।
खटुला का सड़यूं निवार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
नाति-नतणों कु ळाळ चटणा कु ज्यू ब्वळ्द आज भि ।
दुदिबाळा कु बुखार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
हांह्वालु सोरग ब्वै-बाबुका खुटौं मा "पयाश" पर ।
एक लपाग कु लाचार ह्वैगीं,म्यारा ब्वै-बब्बा ॥
@पयाश पोखड़ा ।
"सड़क"
********
बट्या-बाट ठिट्ट झणि कख जि जाणि 
च य सड़क ।
रस्तम अयां मनिख्यूं थैं कख जि लिजाणि च य सड़क ॥
न भै नकभि लटंगौं का बाना भि सड़क गौं तक आई ?हांपड़्यां-लिख्यौं थैं डिल्लि धौ लिजाणि च य सड़क ॥
दिनमनि उज्यळौ मा कत्गौं फर उत्यड़ा लगणा छन ।
पर राति अंध्यरा मा सीदा घारम लिजाणि च य सड़क ॥
सड़कि का घूम सि मरोड़ि याल तुमुल भि य ज़िंदगि ।
कभि त्यारु ल्वै अर म्यारु पस्यौ लिजाणि च य सड़क ॥
क्वादू-झुंगरू-कौंणि का डाळा द्यखणा का बाना ।
कभि-कभि नाति-नतणों थैं गौं लिजाणि च य सड़क ॥
एकदां चिफ्ळै गैन जु चिफ्ळपट्ट द्विया पौ "पयाश" का ।
अग्नै भि चिफ्ळैणा कि डैर चा इन बताणि च य सड़क ॥
@पयाश पोखड़ा ।
मौसम
******
यो रुज्यूं-रुज्यूं सि भिज्यूं मौसम ।
यो भिज्यू-भिज्यूं सि रुज्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि कुएड़ि लौंकै जांद,यो मनस्वाग बाग सि गिज्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि सुपिन्यां खोलि जांद,यो सर्या रातिकु सि बिज्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि खुद लगै जांद,यो जण्यूं-पछ्यण्यूं सि दिख्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि माया पैड़ जांद,यो लिख्यूं-पड़्यूं सि सिख्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि झैळ लगै जांद,यो काचु अमलटु सि मुज्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि दपगा मारि जांद,यो नांगा हथ-खुटौं सि छिज्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि कनै भाजि जांद,यो टिमरु कु ट्यक्वा सि टिक्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि मोल-भौ कै जांद,यो हत-हथ्यूं मा सि बिक्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि दौंळि बांधि जांद,यो लैन्दी गौड़ि सि पिज्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि याद दिलै जांद,यो आंख्यूं मा आंसु सि रुक्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि जिकुड़ि भैर आंद,यो गाळ मा क्यूंकळि सि लुक्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि आंखि भीजि जांद,यो छारु-माटु-गारु सि सुख्यूं मौसम ॥
बेरी-बेरी फेरि कीच-कीच कै जांद,यो "पयाश"देखिकि खिज्यूं मौसम ॥
@पयाश पोखड़ा ।
सौंगु च फांस खाणु ।
***
कठण च ठ्यलिणि जिदंगि यख,पर सौंगु च फांस खाणु ।
जन-कनौ कि बसै बात नि भुला,ख्वळु-ख्वळु भांडा मंजाणु ॥
ब्वनि च त ब्वन दे तू दुन्यां थैं,कैकु गिच्चू कैल थामा ।
कबरि तक जि रैलु तू ढौळ पुर्यास्यूं बिग्च्यां द्यप्तों नचाणुं ॥
बट्या-बाट जु अबट्टा गैन,वो क्य बाटु बताला,चौबट्टा मा छुट्यूं मनिखि कु,सौंगु नि हूंदु घार आणु ॥
त्यारा गांवा का सच ब्वल्दरा भि,झणि कै वुभरा लुक्यान ।
हांझूट धौ राई रातदिन गौं मा,कांसि कु कट्वरा नचाणु ॥
जेठ-बैसाक कतल कै रूझिगीं,ऐंसु का साल रूड़्यूं मा ।
भलि कै छपत्वळ्ये ग्याइ "पयाश",ह्यूंदम को जि यख आणु ॥
@@
फ्वळ्यै ग्याइ "
***************
दळिम्यां की मेलि सि,एक बूंद आंसु कि,गळ्वड़्यूं मा उत्तड़ैकि,
चर्यौ सि फ्वळ्यै ग्याइ ॥
बर्खा कि बणदरि सि,एक धारि आंसु कि,आंख्यूं कि पतन्यर्यूं मा,पाणि सि रळ्यै ग्याइ ॥
बसगळ्या दीड़ौ सि,एक छ्वाया आंसु सि,जिकुड़ि फोड़ि-फाड़िक,खुद सि छ्वळ्यै ग्याइ ॥
लुण्यां-अलुण्यां मनतति सि,एक तौलि आंसु कि,हथ-खुट्यूं का पराज़,स्यळ्यै कि हळ्यै ग्याइ ॥
काळि कळचुण्डि कुएड़ि सि,काज़ोळ सि आंख्यूं मा,एक गुरमुळि माया कि,बिनै कि कळ्यै ग्याइ ॥
चर्यौ सि फ्वळ्यै ग्याइ ॥
पयाश पोखड़ा ।
"आंसू"
*******
भारी-भरसक कैकि आंख्यूं हैंसाणु 
रौं मि सदनि ।
युं खुदेड़ आंख्यूं मा आंसु लुकाणु 
रौं मि सदनि॥
आंख्यूं मा जन दणमण-दणमण 
चौमस्या बरखा,तरकण्यां गळ्वड़युं का आंसु सुखाणु 
रौं मि सदनि ॥
काज़ोळ आंख्यूं का छाळा आंसु 
थम्दा-थम्दा,नै इगसि-बग्वळि तक आंसु पुर्याणु 
रौं मि सदनि ॥
बस कैरहैंस्दा-हैंस्दा कखि रुणुं नि
ऐ जाव मिथैं,रैड़ नि जैं आंसु इलै आंख्यूं झुकाणु 
रौं मि सदनि ॥
मेरि आंख्यूं का पाणि को क्य मोल-
तोल लगांदि,खाळा-म्याळों मा अपणा आंसु बिकाणु
रौं मि सदनि ॥
स्वीणा बणि कै कभि आला त वो
मेरि आंख्यूं मा,ह्यरदा-ह्यरदा अपणा आंसु बुथ्याणु
रौं मि सदनि ॥
त्वै याद करदा-करदा जनि मेरि 
जिकुड़ि स्यळ्याई,तनि सुख्यां आंसु मा आग लगाणु
रौं मि सदनि ॥
तेरि खुदेड़ माया की तुलबुल तामि
भोरि-भारिक,
'
पयाशका पुरणा पैंछा आंसु चुकाणु
रौं मि सदनि ॥
@पयाश पोखड़ा ।
एक गज़ल गंज्यळि दलेदर ब्वाडा का नौ
***********************************
द बब्बा ! धौ संदकै बच्यूं छौं,अभि तलक ।
जैर-मुण्डरळ छक्वै तच्यूं छौं,
अभि तलक ॥
हैड़-हैड़ दुखणा छनहडकि बिनाणि छन ।
ग्वाठक मुंग्रल सि छक्वै थिच्यूं छौं,अभि तलक ॥
चुनमंडि पींदा-पींदा,गाळु उबै ग्याइ ।
माछौं कु सुर्रा पीणु गिज्यूं छौं,अभि तलक ॥
फलगट झाड़िक,लीसू निचोड़िक चलगीं ।
सरकरि कुळैं सि लिच्छ्यूं छौं,अभि तलक ॥
सर्या दिनमान खंतिड़ि-रजै
पुटुग फग्वसै ग्यौं ।
पस्यौ मा कतल कैकि भिज्यूं छौं,अभि तलक ॥
अब त खुटा भि
खटुला से भैर ह्वैगीं ।
पलासटिका पल्यूड़ सि खिच्यूं छौं,अभि तलक ॥
द्विया खुटि तिथांण म
रंगुणु चटणि छन ।
पर ग्वेर छ्वारों जन बिग्च्यूं छौं,अभि तलक ॥
@पयाश पोखड़ा ।
"बीड्यो साब"(BDO SAHEB)
*************************
कैका भि नि छन यख भला हाल-
बीड्यो साब ।
सबुका हुयां छन यख बुरा हाल-
बीड्यो साब ॥
सफेद कुरता-सुलार पैरिक,कभि त आला ।
द्यप्तों थैं कना छवां यख जग्वाळ-
बीड्यो साब ॥
भूकल पुटिगि पट्ट पीठि फर,चप्प चिप्कीं चा ।
फेरि भि हम छवां यख प्यटपाल-
बीड्यो साब ॥
अपणि अग्यार कभि आलि कि
नि आलि कुजाण ।
बैठ्यां छवां यख चौका का तिर्वाळ-
बीड्यो साब ॥
कपळि हथ लगैकि रस्ता-बाटा
ह्यरणा छवां ।
बिकासा कु कब तड़्यालु तिरपाल-
बीड्यो साब ॥
सकळा मन ल्हेकि उकळि वुभु
लग्यां छवां ।
कभि कटेलि भि या तड़तड़ि उकाळ-
बीड्यो साब ॥
अफु नि उठि सकणा छवां त फेरि
को उठालु ।
बांजा पुंगड़ा सूखा सग्वड़ों कु सवाल-
बीड्यो साब ॥
जींस-सरट इसपोर्ट सू ब्यल्ट कमर
रसकैकि ।
मौरनिंग वाक फर आज हमर छाल-
बीड्यो साब ॥
ईं निगुसैं सरकारा का तुमी त छवा
सैंगुसैं ।
बाकि भग्यनु ल ता नौकिरि धंग्वाल-
बीड्यो साब ॥
कारा नकुछ त कारा कुछ त 
ह्वालु हतम ।
तुम भि त नि छवा सरकरि फिक्वाळ-
बीड्यो साब ॥
@पयाश पोखड़ा ।
"खुज्यावा त सै"
***************
डाळि-बोट्यूं कु कख च छैल,खुज्यावा त सै ।
दैन-दुसमन्यां कि कख च झैळ,
मुंज्यावा त सै ॥
निरपण्यां सि आंखि अब त,रुणु भि बिसिरि गैन ।
मुण्ड टिकैकि कांधमा कैकि गात,रुझ्यावा त सै ॥
भोटु का ळिक्वाळ रुंगड़िक,रिकद्वळण्युं पणसै गैन जो ।
स्यूं भोट बिट्वळ्दरों थैं कठगौंल,घुच्यावा त सै ॥
छोरि-छ्वारागोर-भैंसा सबि,भूक-तीसल बिबलाट कना छन ।
बीजा का खिरबोजमुंगरा तौलुन्द,उज्यावा त सै ॥
गाळ्यूंकि कनि परचतन हुईं च,त्यारा गळद्यवा गौं मा ।
तबि सुणेलि तेरि बातपैलि गिच्चू,बुज्यावा त सै ॥
मीज़रनामा ल्यख्वार त सबि,ह्वै जंदि पंचैति की पंचैत मा । 
पैलि फैड़्यूं मा बैठिकि स्यूंण-धागु
कुच्यावा त सै ॥
मनख्यूं कि घिमसाण मा भि,यखुलि सि बिरणा दिखेंणा छवा ।
कभि अपणों दगड़ अपणों घार,खुज्यावा त सै ॥
@पयाश पोखड़ा ।

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Copyright @ Bhishma Kukreti Mumbai; 2016
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पौड़ी गढ़वालउत्तराखंड  से गढ़वाली कविता चमोली  गढ़वालउत्तराखंड  से गढ़वाली पद्य  कविता रुद्रप्रयाग गढ़वालउत्तराखंड  से गढ़वाली पद्य  कविता ;टिहरी गढ़वालउत्तराखंड  से गढ़वाली पद्य  कविता ;उत्तरकाशी गढ़वालउत्तराखंड  से गढ़वाली पद्य  कविता देहरादू गढ़वालउत्तराखंड  से गढ़वाली पद्य  कविता