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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, September 4, 2016

अंगळति ढ्यूंण

Garhwali Story by: Mahesha Nand
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झब्बि थै मंगदरों कहिंदरा लग्यां छा। सौब इन बान्या फूल थैं अपड़ा चौका ऐथर दिखंणू स्वींणा गैंठ्यांणा। झब्बि चकSचूरै बांद छै। वुना डीएम जूदा। 
जै दिन बटि वडीएम बंणितै दिन बटि लुक्खुल वूं कि देळि कुरच्यालि छै। लखपत्यूं कडाक्टर इंजिनेर स्वांणा नौना त फुंड फूकावींकै दगड़ि डीम बंण्यां नौना बि वीं दग्ड़ि ब्यौ कनू नपन्ययां। पंण जन्नि ववूं मा ढ्यूंण धनी तन्नि सौब नौना ना बोलि दींणा। वीं कु भै दल्लीभरि दिक ह्वे ग्या। वे कु सरेल जब अतSसति फर ऐ ग्या त वु वींमा गंगजांण बैठि-- "झबरी! तु कै जलमौ गैलु गडंणी छै। कौं खौर्यूं खैकि मिन तु पढ़ै-लिखै छै। किन्मजात तनि बान्या सजिला बैख त्वै मंगणू आंणा छन अर तु वूं मा झंणि क्य ब्वन्नि छै जु वु त्वै खुंण ना बोलि दींणा छन ?" दल्ली रूंद-रूंद ब्वन्नू-- "भुली म्यारा त्यारा ब्यौ कसुपिन्या गैंठंयां छन। वूं सुपिन्यौं थैं नि कुर्च।"
गौलि त वींकि बि भ्वरे कि आ पंण वीन अपड़ि आंखि नि चूंण द्येनि। बिंड्डि दिन ह्वे ग्ये छा। झब्बि मंगंणू एक घर-गुदड़्या मौ आ। नौनू अर वेकु बुबा अंयू। झब्बि अपड़ि ड्यूटि फर जयीं छै। दल्ली अर वेकि घरौंळ छै ड्यारम्। झब्बी बौन् यूं कु लांणु-पैनु द्येखी अर यूं मा बोलि--- "तुमू खुंणै मि खांणु पकांणू छौं। खांणू खा अर जै ल्या। म्यरि नंणद थैं तुमSरु घरबार पसन्द नि आंण।"
नौना थैं भरि बुरु लगि। वे थैं उचमुचि बि उठंणी। वेन अपड़ा बाबौ बोलि--- "बाबा जीजै ल्यूला। यि सेट मौ छन। हमSरि बात इक्ख नि बंण।"
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ब्यट्टाद्यब्ता दरसन नि द्याला त क्य वु घौर बि नि जांण द्याला। डीएमा बंगला फर छां अंयाएक गफ्फा खै कि जौला। ब्वन्नू त रालु कि डीएम साब बंगला फर हमन बि खा।"
खांणा फर पोड़ि छै बंणलकड़ अर खांणा सौंर्दि दां झब्बि ऐ ग्या। झब्बिन् यूं थैं द्येखि दॆया। वीन बींगि कि यि क्वी अर्जि दींणू अंयान जंणि। वीन बुढ्यौ बोलि -- "आप कै काम स्ये अंयावां थै ब्वाला।"
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डीएम साब! हम तुम थैंयी दिखंणू अयां छां। मिन सूंणि कि तुमू खुंणै भला-भला रिस्ता ऐ ग्येनि पंण तुम कै थैं नि अंमणाणा छंवा। तुमSरि ढ्यूंण बि मिन सूंण्याल। मै थैं अर म्यारा नौना थैं क्वी उपेड़ नी। यु फोर-फस्ट कलास च। बिरुजगार च। दिखंणु-दरसुनु सड्डळ बैख च। ल्हा वे स्टांप थै। मी बि अर यू बि वा मा सैन कै दिंदा।" 
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ढ्यूंण !" दल्याबिंगणम् नि आ। वेन झब्बि जना आंखा घुरेकि द्येखि। झब्बिन अमंणि तकै इना मनिख नि द्येखि छा। जूबि ऐ छा सौब लोभि-लालची ऐ छा। वीन स्टांप गाडि भैर। दल्लिन वींकहत बटि स्टांप लूछी। स्टांप मा ल्यख्यूं कि झब्बि अपड़ि अद्दा तनखा फी मैना अपड़ा भै थैं दींणी रालीजबSरि तकै व नौकरी फर रालि। दल्ली रूंण बैठी-- "हे घाडकरीनिहुंण्य छोरी! म्यारा बान रै अपड़ा खुट्टा फर कुलSड़ि मनी।"
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भैजी! वु दिन मै अज्यूं बि दुखांणा रंदिन। जु तु नि हूंदी त मिन डीएम नि बंण छौ।" झब्या आंखौं मा वु दिन सैमकुल दिखेंण बैठिनि जै दिन वु छुरे छा। बुबा रा वूं कु दर्वळ्या। वेकझुर्याटल पैलि वूं कि ब्वे मोरि अर पाछ वू बि मोरि ग्या। दल्लिन् झब्बि सैंति। वु ब्वादु छौ वीं कु--- "झब्बी तु पौढ़। मिन त अपड़ा ड्यारम रांण। गोर-बखरा सैंतीहौळ तांगळ कैकि अपड़ा दिन निमै ल्यूलु पंण तिन पर्या ड्यार जांण। तु पढ़ीं-ल्यखीं रैलि त भला घौर जैलि।" दल्ली अफु दर्जा पांच तकी पौढ़ि साकी। कुल्ली काम कैरी वेन झब्बी पढ़ा। 
झब्बिन् यु नौनु पसंद कै द्या। दल्लिन् ऊरा-धूरा कै वींकु ब्यौ कैरी।
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