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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, September 2, 2015

व्यंग्यौ मुख्य तीन उपादान, अवयव , घटक

Satire and its Characteristics, व्यंग्य
         व्यंग्यौ  मुख्य तीन उपादान, अवयव , घटक 
    (व्यंग्य - कला , विज्ञानौ , दर्शन का  मिऴवाक  : (   भाग     10   ) 

                         भीष्म कुकरेती 

 व्यंग्यक तीन मुख्य उपादान (Ingredients ) हून्दन -
अ - हौंस 
ब -आलोचना 
स - उपदेश /अड़ाण 
                                          हौंस 
यद्यपि अब हौंस विहीन व्यंग्य की छ्वीं लगण मिसे गेन अर अलंकृत , शब्द खेल ,  शब्दाडंबर, वाक्चातुर्य से  व्यंग्य करण से हास्यविहीन व्यंग्य उत्पादन हूंद किन्तु कखि ना कखि शब्दाडंबर से हौंस पैदा ह्वेई जांद। हौंस आनंद लांद ,रस्याण लांद ,  ग्राहक (पाठक , दर्शक ) की ऊब मिठांद।
                                          आलोचना 
व्यंग्य मा आलोचना आवश्यक माल /उपादान हूंद। फिर आलोचना का आधार पर व्यंग्यकार निर्णय बि दींदो।  व्यंग्यकार कमी बतांदु , कमी का विश्लेषण करदो फिर कमी पर निर्णय सुणान्दु।   व्यंग्य मा न्याय  अर आलोचना एक सिक्का का ही अंग हून्दन। 
                                      उपदेश 
उपदेश व्यंग्य कु आवश्यक  अवयव च किन्तु उपदेश वक्रोक्ति का साथ दिए जांद। 



2 / 9/2015 Copyright @ Bhishma Kukreti 

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