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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, July 30, 2014

तेरा हात खुंटो बेटा काँडु न चुबो कबि होन्दु खान्दू रे तू-


जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे, 
तेरा हात खुंटो बेटा काँडु न चुबो कबि होन्दु खान्दू रे तू- 
जी रे जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे 
निंद नि औन्दि भूख नी लगदी, जब गणिदा तेरी बिदाई का बरस – बिदाई का बरस .. 
तेरा दियां दुःख सुख ह्वै जन्दिन, जब सुण्दां तेरि राजि खुशि कैमां – राजि खुशि कैमां, जी रे 
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
हम खुंणि छोड़ि गै तू जै काँडोऊं, फूल ह्वैं जांदि तेरा बालपन समळि – बालपन समळि ..
हमनुं क्या बुरु करि, सबि त कदिन अपणि जमाईं डाळ्यूं कि आस- डाळ्यूं कि आस, जी रे
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
बाब दादा कुड़ि- पुगंड़ि नि चेंदि त, फणफुक जख रोळि, सुखि सत्ति रैई- सुखि सत्ति रैई
बुलोंदी कबि त्वैमां ऐ जांदा हम बि, नाति- नत्येंणों कि भुकी पे लेंदा- भुकी पे लेंदा, जी रे
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
खांण कमांणु हक छ जरुर तेरो भी, एत कबि खड़ाखड़ि देखि पूछि जांदि-देखि पूछि जांदि
हमुंन क्या मंगण छे यो बेटा त्वै मां, ज्युंदि मदी जौंदा आशीष छ त्वैकि-आशीष छ त्वैकि, जी रे ..
जी रे जागि रे, जुगराज रे तू – जी रे
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