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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, July 28, 2014

गढ़वाळी गढ़वाळि मा किलै नि बचळयांदन (बतियाना ) ?

घपरोळया , हंसोड्या , चुनगेर ,चबोड़्या -चखन्यौर्या -भीष्म कुकरेती      
                     
(s =आधी अ  = अ , क , का , की ,  आदि )

सरा गढ़वाळ अर सबि गढ़वळि चिंतित छन बल गढवळि लोग आपस मा किलै नि बचळयांदन।  साहित्यकार जौंक नौन्याळ अंग्रेजी स्कूलम पढ़दन वू बि चिंतित छन तो भूतपूर्व आयातित मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा बि चिंतित छन कि समाज अपण मदर टंग छुड़ना छन अर फिकरौ मारा हौर भूतपूर्व मुख्यमंत्री कोशियारी , तिवाड़ी , खंडूरी, निशंक  अर भविष्य का मुख्यमंत्री सतपाल महाराज तो worry , फिकर , चिंता का मारा से नि सकणा छन कि गढवळि लोग गढ़वाली में नही बचळयाते हैं।  चूँकि वर्तमान मुख्यमंत्री आपदा प्रबंधन, सरकार बचाओ प्रबंधन का अलावा राहुल गांधी की ठकुरसुहाती मा व उर्दू की कमजोर हालत पर हद से ज्यादा व्यस्त छन तो वु अबि चिंतित नि छन कि गढ़वाळी -कुमाउनी कु क्या ह्वाल।  पर सब जाणदन कि जनि हरीश रावत भूतपूर्व मुख्यमंत्री की जोनी (योनि ) मा आल कि रावत जी तैं बि गढ़वाली अर कुमाउनी व जौनसारी भाषा की चिंता कु रोग लग जालु। 
                   इन यी हाल आजौ नि छन.  सहस्त्र सालों से गढ़वाल्युं द्वारा   अपण भाषा मा नि बचळयाणो रोग च।  इन बुल्दन बल जब तलक बालक भरत कण्वाश्रम गढ़वाल मा राई तो स्थानीय  खस भाषा मा बचल्यांद थौ किन्तु जनि भरत शकुंतला दगड़ राजधानी गे कि राजकुमार भरतन सबसे पैल गढ़वळि खस  कु त्याग कार. माँ शकुंतलान भरत तैं अड़ाई कि यदि राजकुमार भरत गढ़वाली खस बोली मा बचळयाळ तो भरत कु क्वी स्टैंडर्ड नि रै जाल।  मा शकुंतलान राजकुमार भरत तैं सिखाई कि यदि बडु स्टैंडर्ड कु किंग बणन तो सबसे पैल खस भाषा कु परित्याग करण जरुरी च।  अपण व्यक्तिगत  स्तर बढ़ानो खातिर राजकुमार भरतन अपण मातृभाषा खस छ्वाड़ अर संस्कृत अपणाई। 
                  बुलण वाळ त कालिदास पर बि भगार   लगौन्दन कि उज्जैन मा बड़ो पद पाणो खातिर ऊंन बताई नि  छौ कि वु गढ़वाळी छन बस इन बताई कि वु हिमालय प्रेमी छन। व्यक्तित्व विकास का खातिर कलिदासन गढ़वाली छवाड़। 
                  भगार लगाण वाळु गिच कु पकड़ सकद ? भगार लगाण वाळ त इन बि बुल्दन कि स्टैंडर्ड बढ़ाणो खातिर हेमवती नंदन बहुगुणा अर डा शिवा नन्द नौटियालन अपण गढ़वाळी पत्नी छवाड़ अर परदेस्यूं दगड़  ब्यौ कार ! 
           असल मा गढ़वळी अर कुमया दोगलापन तक  त समझौतावादी हून्दन किन्तु जनि त्रिगलापन (तिगुलापन ) की बात आंद गढ़वाली -कुमाउनी दोगलापन की सीढ़ी से अगनै जाण पसंद नि करदन। हिंदी -अंग्रेजी बुलणो  दोगलापन  तो गढ़वाली -कुमाउनी सहन कर लीन्दन किन्तु ट्रिपल स्टैंडर्ड याने अंग्रेजी -हिंदी अर अपण भाषा मा बातचीत कु ट्रिपल स्टैंडर्ड हम तैं असह्य ह्वे जांद। 
              व्यक्तित्व  विकास मा स्टैंडर्ड  जीवन स्तर कु बड़ो योगदान हूंद अर सिंगल स्टैंडर्ड ही पर्सनालिटी डेवलप कर सकद। 
                   चूँकि इंग्लिश पर्सनालिटी डेवलपमेंट का वास्ता आवश्यक इंग्रीडिएंट / कम्पोनेंट / रॉ मटीरियल / कच्चो माल च तो हमकुण  सबसे पैल अंग्रेजी से प्रेम करण आवश्यक च अर हम सब अंग्रेजी भक्त बौण जाँदा। 
                 किन्तु पर्सनालिटी डेवलपमेंट या व्यक्तित्व विकास का वास्ता इंग्लिश  स्पीकिंग ही आवश्यक नि हूंद बल्कण मा व्यक्तित्व विकास तब तलक ह्वेई नि सकुद जब तलक तुम अपण दुधबोली तैं मड़घट नि पौंचावो।  अतः हम सब गढ़वाली -कुमाउनी अपण व्यक्तित्व विकास  का खातिर अपणी मातृभाषा तैं भेळ जोग करदां।   जब तलक मातृभाषा याने मदर टंग  खतम नि हूंदी हमर पर्सनालिटी डेवलप ठीक से नि हूंद। मदर टंग पर्सनालिटी डेवलपमेंट की जन्मजात बैरी च इलै हम अपण व्यक्तित्व विकास का खातिर अपण दूधबोली कु विनास करणा  छंवां। 
तो हम तैं रुणै जरूरत नी च कि हम गढवाळी -कुमाउनी में क्यों नही बचळयाते हैं. यदि हम अपण स्टैंडर्ड तैं उच्चु दिखाणो बान अपण ब्वै तैं कामवाली बाई बताइ दींदा तो क्या हम तैं पर्सनालिटी डेवलपमेंट का खातिर मातृभाषा छुंडनो अधिकार नी च ? 


Copyright@  Bhishma Kukreti  26  /7 2014   
    

*लेख में  घटनाएँ , स्थान व नाम काल्पनिक हैं ।
 
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