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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, September 16, 2009

बगत बगतै बात !

एक गौम एक लाटु रेंदु छो ! वाखा नाना तिना , बडा बूढा, जनना सब , जैल भी बुलाई लाटु कैकी ही बुलाई ! अर वो बिना हां बोली, उकी एक आवाज पर हैन्सी मुंड खुजलैकी देख रैन्द रा ! समान का नो पर केवल त्रिस्कार का सिवा वेल कुछ देखू ही नी ! जैल भी ,जब भी चाह लाटु बोली दुत्कारु ही च ! सम्मान क्या हुन्द वी थै भीतरी भितार सन पत् छो ! इजत क्या हुन्द वी थै मालुम छो !

एक दिन गौ का मर्द नमान सब खेतो माँ चली गिनी अर जनना घासों ! उ दिनों , पटवारी अर कानन गु को , गौ माँ आणू , अपणा आप माँ एक भारी बात माने जादी छै ! अर उंसे बात कानी त भारी बात ! वे दिन गौं माँ कुवी नि छो! गुरबाटा ( चोंराहे ) माँ वे लाटु कु जाणु ... अर समणी बीटी घ्सेरू कु आणू अर गौ का लुखो भी दिनों खाणु टाइम पर घोर आणू ..... क्या दिख्दी , की , पट्टी कु पटवारी वे लाटु से कुछ चा पुचणु ... जनि जननानो अर मर्द्लू पटवारी अर लाटा थै बात करद क्या देखी , सब एक त डै रै मारी , सबी जख्या तखी छा खडा हुया छा झणी , क्या बात च धो आज पटवारीजी अचाण्चकी अर गौमा खैर, पटवारीजी कुछ देरका बाद चलिग्या ! अब सबी जानना मर्द वे लाटा का अग्वादी पिछाडी लगया रिट्णा ....

एक बोली " ------ रै लटा .. बातो त साईं ,, पटवारी जी क्या छा त्वै पुछ्णा .?."
" वो चुप्प ... "

एक जननं पूछी .. " लाटा बातो त सै, क्या छा पटवारी जी पुछ्णा ? "
"वो फिर भी चुप्प ...!"

कत्कै लूखल जणै की कोशिश कारी , पर , मजाल जू , लाटु कुछ बुनू तयार ......!!!!!

जब पधान जी न पूछी " अरे , लाटा क्या छा पुछ्णा ? "

वो बोली "-------- जै गिचाल पटवारी दगड बात कारी , वी गिच्ल तुम दगड क्या बात कन ." . बोली सीधा सारी जनि चली गे !

पराशर गौड़
दिनाक १३ सितम्बर २००९,रात ०.४५ पर