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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, September 21, 2009

इन हुन्द विकास ...

ग्यालू कु नौनु इंजीनियर बणी गौ माँ सबी लोग गयलू थै बधाई दीदा दिंदा थक नी न ! एक बुजर्ग न बोली ' ----- नाती , देश का दगडा - दगडी , गौ , अर सबसे पैली अपणो बिकाश जरुरी च रै लाटा ..."
नातिल दादा की बात गेड्म बाधी दे ! नैकरी भी मिली पी डब्लू डी माँ ! जख एक का चार , कभी कभी ६ ८
मशालू मिलै की बिल्डिग खडी ... अर वेंम ऐंची कमाई पुछ ना .....

पैली दिन वैथै कई की जगह भीजै गे.. फाईल देखी त, वेसे पैलिऊ इंजीनियरल एक कुवा की खुधाई की लम्बी चौडी फाइल वो भी, लाखो रुपया कु खर्च चो दिखयु .. हैका इंजिनीयर की फाइल देखी त, विल भी वे ही कुंआ पर अग्वाडी मरमत का बाना लाखो रुपया खर्चा छो दिखयु वेल सोची .. जरा देखी की औ की कख च अर मरमत कख तक पहुँची .. ?

वो गे , त वख कुई कुवा नी छो , अर, फ़ैल ये लम्बी चौडी अर रुपया..., लाखो माँ ! कुछ देर सुचुणु राई की , क्या कैरू ? फाईल बांध कैरू ..की, काम चालु रखु ? दादा की बात याद आई " देश अर गौ का दगड सबसे पैली अपणु विकाश कैरी " वेल एक हैंकी फाईल खोली ... अर लिखी .......
" गौ का हित अर विकाश थै नजरू माँ रखी मिन वो कुआ .. मटी से भर दे ... जैमा २-३ लाख रुपया कु खर्चा आई ! ये काम से गौ वाला भी खुश मी भी अर सरकार भी ..." फाईल बन्ध ! पैसा किसा हुद ! कागजो माँ विकाश ही विकाश !

पराशर गौर
दिनाक २० सितम्बर ०९ समय सुबर ११.१४ पर