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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, September 9, 2009

ससुराल मेरे पार्लियामेन्ट !

बगत बगत चुनाओम हैरी , मेरी घरवाली मी से तंग ऐगी ! जनि पार्लियामेंट का चुनाव की घोषणा होई , त , मेरा पेटा जुनका फिर खडा हूँ बैठा ! मेरी पत्निल जनी देखि की , कि , मी हरकत म आन बैठी गेउ . वा बोली ...

" वी निर्भगी पार्लियामेंटो कु मोह अभी तक नि गे है ..., मेरी ख्याल से मुरूद मुरूद थाई की जालू स्यु किडू ... "

मिन भी सोची , काश..., मुरूद मुरूद सिर्फ एक दाऊ .. एक दौ वख पहुँच सकदु त , मी सम्झुदु की मी बैतरणी पार होईग्यु , पर हे राम .. कख छो बल जोगी हुना भाग !

स्यु साब ..., वख त की जायालू पर , हम भी पका छा पका ... ३६ ना सै ,कम से कम १५ २० नेता जी का गुण त छाई छी हम पर ! आखिर हम भी , नेता ह्या ना नेता ! हम थै , यु ख़याल आई , अर सोची ..., कि पार्लियामेंट ना .. त .. ना सै , अब अर आज बिटि हमरी पार्लियामेंट हमरी ससुराल होली .. जख हम अपणा मन कि हीक निकाल सकदा !` सासुराल रूपी ई संसद माँ वो सब कुछ च, जू वी, संसद म च .... . मान सन्मान ,रॉब रुतबा , आवा भगत एक आलवा बनी बनी का बिभाग छन ! कुल मिली की ये सब हमरा रहमो कर्मो पर टिक्या छन ! हमरा इशारों पर जिंदा छन ! बन बनी का बिभाग छन !` कुलमिलैकी ई सब हमरा नाज-नखरो पर जिदा छी ! हम ई संसद का नीर बिरोध अध्यक्ष/ प्रधान मंत्री जो बोलो उ छा ! मजाल कुवी ना नुकर या टी टा कै दया ! हमरी आवा भगतं २४ घंटा सब एक खुटा पर खडा रंदी ! जन संसद म ७५० एम् पी अपणा पार्टी का मुख्या प्रधान मंत्री का अग्वादी पिछाडी रंडी रिट्णा बस उनी मेरा ससुराल का हर एक प्राणी चाहिए वो सास -ससुर , स्याला - सयाली ,अर गौं का रिश्तेदार हो सबी रैन्द म्यारा अग्वादी पिछाडी रिट्णा ! न हवा कखी जवाई जी की अवा भागतं कमी रैजा , अर वो , नाराज होई जावन ! हमल भी नाड पकडी च ! ससुराल वालो से सुधी सुधी मालकी जाणु , ख्माखा नाराज हवाई जाणु ताकि ईयू पर प्रभाऊ बणियु रा !

ससुराल की ई पार्लियामेंट माँ , उन त कई महत्वा पूर्ण बिभाग छन , पर , रक्षा अर बित बिभाग का इंचार्ज ससुरा जी छन ! साल भरै या पञ्च बर्षीय जानी योजना का अलावा बीच बीचम राहत जन कार्यो पर खर्चो का वास्ता धन भी यु से ही मिल्द ! एक अलावा रोज मरा की खर्चे की सूची यूके अग्वादी पडी रैन्द ! मजाल च जू यूँ कभी असमर्थता प्रकट कै होली उलटा ये बडी सूझ बुझ का दगड हर झटको थै झेली भी मुस्कराणा रंदिनी जन हवाई जहाज की एयर होस्टेज तरह चाहिए बुखार हो या पेट दर्द पर यात्री का अग्वादी बस चेहरे पर हसी हूँ चैद उनी बिचारा मेरा ससुरा जी भी रंदीन ! उकु ये अदम्य साहस सूझ बुझ थै देखी मी बहुत ही प्रभावित हुई गियु !

अब देखा ना , जब भी मिन अपनी पत्नी से थोडा शिकैत कारी नि , की वा बात , एक डम ससुरा जी का पास पहुँची जांद मर्द का बच्चा अपनी गैणी तकीद गिरबी रखी भी मेरी फरमाइश पूरा कर दी जन की मुख्या मंत्री व वेका चमचा करोंदीन वेका जन्म दिन पर पिस एकटा ! मयारू बुनो मतलब च बाना बस बाना कैकी, कै भी तरह से अपणी इछा थै पूरी काना रंदीन ! खुशी ई बात की च की मिन कभी उनका मुख पर उदासी की कुई लकीर देखी हो ! ख्वाला गिच्ल सदान हैस्णै लगया रदीन ! वो ई पार्लियमिन्ट का सबसे मजबूत, अडिग सख्त खम्बा छन ! पत नी मेरी ई बार बार की मांगो से वो हिला भी छी य ना यु मी थै पत नी !

दुसरा महत्वा पूर्ण बिभाग मेरी सासू जी का पास छन जनकी होम बाणिज्य सुचना ,रख रखाव , आदि आदि ! कै थै क्या दीण ? कैसे क्या लीण ? कखम क्या कन, क्या बुन याने पुरी पुरी दखल च युकी ! अपणी प्यारी बेटी याने हमरी धर्मपत्नी पर युकी ज्यादै कृपा रैन्द याने मोह बोला मोह.. बस मीथै जनी पत लगी या उकी कमजोरी च मिन वेकु पुरु पुरु फैदा उठाणु शुरू कैदी ! संसद माँ प्रश्न का दौओरान बिना रोक टोका जन एक एम् पी अपणा इलाका बारमा बताद की उख यु च इथा पैस्सा चिंदन ताकि वो लोग दो जून की रुवाटी खै सकला.. उनी मी भी अपणी श्रीमती थै अग्वादी कैकी अपणी डिमांड की एक लम्बी चौडी चठी ससस जी की समणी रख देदु अगर बात नि बण्दि दिखेद त श्रीमती थै झट अग्वादी कैकी अपणी फरमायश थै पुरी करवा देदु ! ये खुला अधिवेशन माँ सासू जी की जुबान अर मेरी फर्माशो की ताल मेल दिखन लेक रैन्द ! मेरा दोरों की रूप रेखा अर आवश्कताओं की लम्बी सूची सासू जी का दिल्लो दिमाग म २४ घंटा फिट बैठी रंदन ! मजाल की कोई युकी बात काट दया ! जवाई आया छन त ये बैर क्या दीण ! कलेउ या लठु या दूण कंडी या बक्र्री, कलोड ये सब निर्णय स्सासु जी का ऊपर निर्भर रैन्द ! चोरी छिपी मिसे कोइ औरी डिमांड पूच्णी, ये हमरी गुप्त बिभाग की एक बडी खशियत च ! उन देखी जा त , मी कभी कभी अपणी अंडर टबेल वल्ली दिमान्डो थै , यूँकै माध्यम से पूरा करदू !

प्लानिग कमिशन की चाबी दद्या स्सासु जी के हाथ में है वो मेरे और अपणी नातनी की कोइ भी इछा पर बेझिझक अपणी मोहर लगान माँ कैकी इजाजत नि जरुरी समझादन ना ससुरा जी की और नहीं स्सासु जी की ! स्याल और सयलु थै चता मुता बिभाग छन दिया अआवा भगत का मंत्रयालया युमा छन !

मेरी य पार्लियामेंट जब बिटि शुरू होए , ई माँ चुनौ कु त कुई प्र्बिधान नि ! ई संसदम्, आज तक न त, कुई लडाई - झगडा होए , ना कुई जुत पत्रम्, ना कुई हो- हला ! द्वी बिभाग मिल जान बुझी अपणी श्रीमती थै दिया ना १- रुनु २ -..गंग्जाणु , ताकि वो अपणा माँ बापू पर एकु असर ड़ाल साक ! ये दुवी बिभाग बहुत छन ई पार्लियामेंट थै हिलाना वास्ता !

पराशर गौड़
स्याम ७.५० पर ९ अगस्त ०९