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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, September 8, 2009

गड्वाली ( चंदरर्सिंह ) की हन्त्या

देहरादून का राजनीतक गलियारों माँ आच्कालू जख देखा , जेमा सुणा एक बात ! अरे भाई , हमरा याखा बिधायक / मंत्र्री / संतर्री सबका सबी भतरी भीतर छन कम्प्णा आर नच्णा ! अलग अलग पार्टियु का सचेतक
अपणा अपणा अनुसार जनता माँ अपणी अपणी पुकार ले की गिनी की यु क्या हुनु च ! पर कुछ पता नि चलू !

उकी सम्झ्मा इनी आई की आज ९ साल ९ मैना से उपार हुण्वाला छन पर , हम पर ..., या रोल बोल कैकी अर कैकी च ! हमारी, हमरी ना ! -- हमरी बिरोधी पार्टी की भी ई शिकैत च की , यु क्या हूँनु च !

चंदरसिंह गड्वाली जी पैल त भारत का वास्ता लडी ! काला पाणी ताके सजा भी हुई ! फिर ता उम्र उत्तराखंड बाना ... मुर्द मुर्द तक गैरी सैन राजधानी की रटना रट्द रट्द बिचारा ई दुन्या से चलीगी ! सरया लडाई उकी , वो बिना खंया पीया चली गी अर, राज्य मिली त खाणु कुवी ओरी .... अब..., आपीबोला , उकी हन्त्य ल नि आणु छो त , कैकी हन्त्यल आनु छो ?

राज्य की लडाई उत्तराखंड का तहत लडैगे अर जनि मिली नै बदली दे ! .. हे भै .. , वेकी आत्माल दुखी नि हूँ छो .. उत्तराखंड से उत्तरंचल .. वा साब वा ... ! बुठ्याल, देखो अपनों छल .. पहलु मुख्या मंत्री पहाड़ से ना बल्कि बिदेशी .. जों पहाडीयु की टक लगी राइ होली वी कुर्शी पर वा त गई ना उका हाथ से ! वेल भी अपना राज भी पुरो नि कई सकी अध् मई चली गे ! फिर आई हाथे सरकार .. जू बुल्दा छाई की मेरी लाश पर बण्लु
यु राज्या वी मुख्या मंत्र्री .//// . गढ़वाली जी की खाठमाँ आगी भपकरा जी भपकरा ... इनो छल कैरी की नो छम्मी नारैण की बुध हरी दे .. वे थाई इनु जापी की वेल अपना अपना लुखो थै इतका लाल बाती बाटीनी की जों थै देखि देखि जनता का आंखा लाल हुवे गीनी ! उ भी गे ! फिर आईनी कमल .. अपणो आदिम समझी सब्युन वेकी भूखी पै ! आँखियु माँ बिठाई . " ए भै , जै बो को बल बडू भारवासू छो .. वी , दादा बुन बैठी गे "

सियु नाची बुठ्या फिर ... २ साल का अंदर ही अन्दर वो भी गे .... अब देखा ई न्यु कब टिकत ! अगर जू राजधानी कु मामलू सभाली देलू यु , त , हुए सकड़ रै भी जा ! निथर ... जांदा मै समझा !

जब तक गढ़वालिजी की आत्मा थै शान्ति नि मिलाली त भरै ... इनी समझा ......

पराशर गौड़ २७ अगुस्त ०९ समय ४.३० बजे दिन में !