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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, September 8, 2009

धात या धाद

कैए गौं माँ , गोरु ( एम् पी / एम् एल एय ) उज्याड़ चली गी ! जनी चोकीदारल ( जनता) देखिनी वेल गौं का पंचैत चोक बिटि आवाज लगाई -----------------
" अरे .. गौ करो ...., टक लगे सुणिल्या .. जै जै मोउ का वो गोर छन वो जैकी अभी निकाली ल्या ! अफार
लालंगी गौडी ( बीजेपी ) आर वो अफार सफ़ेद सांड ( कांग्रेस ) बाकी छुटा बड़ा गोर ( निर्दाली ) अभी अभी बदु मुश्किल ल त जंजाल ( यु पी ) से अलग कैकी बड़ी मेहनत से यु नयु ( उत्तराखंड ) पुन्गूडू बणेए ! जेमा कतकै बेटी बवारियु का हाथ लाल अर बदन लोईखाल ह्यवैन ! कतका लुखुका ब्र्मन्ड कचैनी ! कतको मवासी ख़म लगीनि ! अर जनि ज़रा चल्दु ह्वई कण घुसीनी खाणु ! "

रे गौ वालो ...., यु पर नजर रखा ! न हवा यु थै, इनी गीज पोडी जाली त , यु खेत/पुन्गडा ( उत्तराखंड ) चोपट समझा ! मित बुनू छो ...., इन उज्यड्खा गोरु थाई त पट, सद्न्या को गौं से भैर करा भैर ! या फिर यु पर नजर रखा रै.. नजर !


पराशर गौड़ २६ अगस्त ३.५० बजे सुबह