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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Wednesday, September 23, 2009

गढ़वाली बाजूबंद काव्य - 1 - Garhwali Bajuband Kavya -1 (Garhwali Love Poems )

Garhwali Bajuband Kavya -1 (Garhwali Love Poems )
presented by Bhishma Kukreti
Beauty of Lover

1- फुर्कली पौन : छाजा माँ खड़ी ह्वै धार माँ कि सी जोने/जून

२-बांज को बुरीज : धार ह्वै जा दिख्वाली कांठा सी सुरीज

३-भुजेलो गुदयूं : मुखडी उदंकार जोनी कु सी उद्यौ

३-भेसो नि च चाँद : दुनिया घुमु पण कवी न देखी त्वै जन बांद

४- लोहा गढी छेणी: पिंग्लू रंग मुखडी को नथुली नि दिखेणी

५- पानी भरिया सोत : बांदू माँ कि बांद दिया जसी जोत

६- सुतरा कि दौंली : मुखडी बतौन्दी गोरी छे बल सौंली

Courtsey : Malchand Ramola from his book; Bajuband Kavyaa
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नयन बाण (आंख्युं आंख्युं मां सैन )

८- हिसर की गोंदी: आंखी तेरी तुरबन्द कैकी मौ खोंदी
९- दही खाई माखियून : दुन्या खांदी गिच्चन तू खांदी आंखियुन
१०-दाथ्डी की धार : आंखी तेरी फूटी जैन नजर ना मार
११-बाखारा की सींगी : मयालु की माया आंख्युं आंख्युं रिंगी
१२-दरजी की कैंची : मायादार आंखे मै दियाल पैन्छी

Courtsey and collected by : Mal Chand Rramola's book
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केहरी कटी (शेर की कमर या पतली कमर अथवा आकर्षक कमर)
१-आँखों को रतन: पतली कमर हिट्नू जतन
२-पानी भार्या भर :पतली कमर tutnou डर
३-लगुली को मोड़ : पतली कमर टूटी जाली को लगालू जोड़
दंत छटा
१- मांजी जाली छन्नी : रुब्सी दान्त्युन् हंसी दही खतेनी जनी
२-सुतरा कु तार : दान्तु चौक खुली मुखडी उदंकार
केश -पाश
१-दाठुडी दराज : स्युन्द की लटुली छुटी अर मुखडी बिराज

तिल सौंदर्य
१-बन्दुकी कु गज : गल्वाडी कु तिल, मुखडी बिराज
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चाल या हिटन

१- घट को भगवाडी : रुब्सी खुट्योंन तू चल अग्वाडी
२-बन्दूक कु गज : तू चल अग्वाडी मैं देखलू सज
मधुर वाणी
१-केला तोडी फली --- कै जगह सुणेली तेरी मोछंग सी गौल्ली (मोछंग एक वाद्य का नाम है )
२- घुघती को घोल ---गुद-बुद्या गिच्चिन हैक्कू बोल बोल
३-घुघती को घोल--- पाथो रुपया पड़ी जयां तेरी जुबानी को मोल (पाथो --अनाज नापने का लकडी का बर्तन )
४- बाखरी को रान : सौ रुप्यौं की दांती हजार की जुबान
सुकुमारता
१-साग लाई तोर --- नाक -डंडी tutige नथुली का जोर
कुच-कांति अथवा स्तन सौंदर्य
१-धनिया को बीज ----छाती का अनार तेरा तर्सौनिया चीज
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यौवन मद-जवानी की बौल (नशा, मदहोशी )
१- गुलेर कु गारू --- ज्वानी को नशा चढी पिलो फूल की सी दारू
२-साग लाये आलू ---ज्वानी को धध्कारू सौण सी छालू (धध्कारू ---एकदम पकडी आग)
३- कुठारी कु देण -- तरूणाई जवानी तेरी कैक होली देण
४-मोल गाडी भेली ---द्वी दिन की ज्वानी , रणु हंसी खेल
५-साग लाई कोइ --ज्वानी को मडू द्वी दिन को होई
६-डाल्ला पक्या आम --तरूणी जवानी उड़ीगे ऊड्यारी सी घाम (उड्यारी ---गुफा )
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प्रेम (माया )

१--रिंगाली की माणी--जौर न मुंडारु, क्या ह्वै होलू जाणी (जुआ- बुखार, मुडारू -सिरदर्द)
2--नथुली -फूलु- डाल्ली अध्फूलीन दूली भंवर
3--फूली जाली लाई ---तरूणी ज्वानी को सज माया देणी लाई (माया -प्रेम, )
4-माच्छा मारिन ऐन---द्वालेंदू प्राण क्या बिसारी मैन
5- नथुली पंवर-- फूलूँ डाली झकझोर रिंगी जा भंवर
6- सोनू टोली रती - माया को बीज कु-जगा नि खौती
7- लोहा गाडी छेणी --परदेशी की माया पैली जांच लेणी
८- हीरू पिस्या जीरू - इन लाण माया जू पाणी ना छिरू
९- डान्दू मर रीक --त्वै सरीकी जोड़ी पौंदु मांगी खांदी भीक (यदि तेरी सरीखी मिलती तो भीक मांगने में हर्ज न था)
१०- छतरा को तार --त्वै जौंला भाग होंदा छुड़ी छाकदु हार (यदि तुम मिलती तो हर्ष खुसी की कोई सीमा न होती )
Curtsey__ Mal Chand Ramola Ji's Bajuband Kavya
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माया --प्रेम
११- हरिया जौ का कीस--जन जन पे ठंदू पाणी तन तन बड़ी तीस
१२- यकुली को कंसो -माया लाण मन, शूरबीर करदू सान्सू
१३-सोना गढी संकल-- कित ब्यौना जयमाला की त रौलू खन्कल (खन्कल--अविवाहित)
१४-कुठारी कु खाना - अमीरू की माया छोडी फकीरूं बना
१५- कमोली को घ्यू --इन लाणी माया , माछी जन ज्यू
१६--- फूली जालो आरू- गौं पर की माया नजरूं कु सहारू
१७-- बखरा की सींगी ---फूल माथि भौंर बैठ्यूं त क्या करदी रिंगी
१८- सेरा लाई कूल ---रस चूसी भौंर ल्हीगे , रेगे बेरस फूल
१९- पाणी भरी घौडू-- परदेशी भौंरू कबी नि होन्दू अपडू
२०- बाखरा की सींगी - मायालू कु मायादार आंख्युं रिंगी
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भैंस को नाम छ चाँद ---मायालू की मायादार बांदू माँ की बांद
२२- कलम की रेक --बान्दून दुन्या भरीं मेरी मन की तू एक
२३-तिम्ला की पात ---सज्जन को संजोग लम्बी ह्वै जा रात
२४-नथुली पौंर---डाल्यूं डाल्यूं रस लेंदू रस-लोभी भौंर
२५-मालू तोड्या taantee ---घौन् gaon का baatoo नि आणू माया जांदी बाँटीं
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Garhwali Love Poem, Garhwal's Love Poems , Love Poems of Uttarakhand , Folk Love Poems of Garhwal -----
Maya, Prem or True Love
26 --तिमला को पात ----मन मिली माया लाणी, नी poochhnee जात
27---तमाखू की धिन्डी--तराजून तोली ल्योल्या कैकी माया बिंडी
झंगोरा की घाण ---- कैकी माया बिंडी, आंख्यूं माँ पछ्याण
सोना गढी रती ----तेरी माया गला गला मेरी माया कती
कुठार को खाना ---गौं की लाज रूबी तेरी माया का बाना
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Love Poems in Garhwali, Folk Garhwali Love Poems Love Poems of Garhwal, Garhwali Love Poems
Prem Love, Prem, Affection

३१- जडी खौंनी बूटी ----हिलनू मिलनू नी छोडी माया जांदी टूटी
३२--दान्त्यी गढी पाती ---केका सिर्वाना रैली चुदी भरीं हाती
३३--शिकारी का बूर --मायालू की माया क्या न्याडू क्या दूर
३४--पाणी को नरम--ऊंदो करी द्यू कॉल बचन धरम
३५- बखरा कू मॉस -जू करलू धोका विकी ज्वानी कु तमाशू
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Love poems of Garhwal गढ़वाली लोक गीत , Garhwali Folk Song, Folk verses of Uttarakhand
माया (प्रेम, Love)

Collection: Malchand ramola
Prsented by Bhishma Kukreti

३६-चांदी का बटण ---एखारी मायन क्या पूरी पटन
३७- चांदी का बटण ---माया लाणी सौंगी निभानी कठन
३८- थाकुली को कांसू --माया लाण मन शूरों को सांसू
३९- रिंगाली की माणी ---बाली माया त्वैमं लाई तुटली तू जाणी
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खुद, खुदेड़ कविता ( विरह, वियोग, विप्रलंभ श्रृंगार रसयुक्त कवितायेँ ,Poems of Pain of Separation )
Notes by Bhishma Kukreti
Bharat in Natyashashtra (6,45,prose form ) says about the pain of separation
There is another love rapture . In the code of Courteson, there are ten conditions of Separation.
Separation is related to eagerness and anxiety and anxiety, sigh, lassitude,are characteristics of
Separation, There are ten conditions of love of separion--because of arragnce, envy,disorder or accident or calamity,
use of abusive words or acts, irritation, false pride, depression, death, terror etc
Garhwalis who did not study any thing about principles of Poetry or dramas , they created marvelous love poems by
experiencing emotions :
१- घास कट्या kandaaroo ---कै पापीन करी माया कु मुंडारु
२- खालियानी को दांदो--माया को मुंडारो ज्यू कोरी कोर्रे खांदो
३- दुपट्टा रंग्युं --दुरु की माया बुरी होंदी ज्यू रौंदू tangyoo
४- पाणी भरी मग्गा-- झीट नि देख्नौ ज्यू रौंदू जगा
५- झंगोरा की बाल --तेरा बाट हेरी हेरी आणखी हवाएँ लाल
संग्रहकर्ता --मालचंद रमोला
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खुदेड़ बाजूबंद गीत (विरह श्रृंगारिक कवितायेँ Folk Songs of Separation)
१- तिमली को पट: बाटा हेरी मरयूं ठाडी कपाली हात
२- बखरी बिन्वार : कै पर देखुलू तेरी अन्वार
३- परोठो दूध को : मुखडी को पाणी सुकी तुमारी खुद को
४-चरीजालू भैरो : जादा नि खुदेणु रंग जालो तेरो
५- डाला पकी बेर : आज कु मिलणु ह्वै गे बरसू को फेर
संग्रह कर्ता : मालचंद रमोला
प्रस्तुति: भीष्म कुकरेती
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बाजूबंद काव्य में खुद (गढ़वाली हिमालय लोक गीतों में विरह वेदना )
Rapture of Pain of separation in Folk Love Songs, Poems of Garhwal , हिमालायास
११- सेंदूर की डब्बी --ज्यू जान बचीं रैली मिली जौंला कब्बी
१२-लगोठी का बाद --घडी घडी आन्द तेरी माया की याद
१३- तौलो पाक्यौ भोज ---तुमारी खुदन होई आधी रोटी रोज
१४- डाली बूणी घेरू --औन्दी तेरी याद ज्यू कटेंदू तेरो
१५- अखोड की सांई -- उच्चू डान्दू निस्सू कॉरी त्वै मिल्नौ तैं
संग्रहकर्ता ---मालचंद रमोला
प्रस्तुती --भीष्म कुकरेती
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बाजूबंद में खुद (बाजूबंद में विरह वेदना)
Pain of Separation in Folk Songs , Folk Poems of Garhwal , Himalayas
संग्रहकर्ता: मालचंद रमोला
प्रस्तुति ; भीष्म कुकरेती
१६- कुल्लैं को द्वार -- उडान्दू पंछी होन्दु उद्द ओउन्दू त्यारा ध्वार
१७- भित्ति मारी माखी -- फिरडी फिरडी मरयूं सुवा नि मील कखी
१८-पानी उम्लाई ---बिस्र्युं धंदा थौ कै पापीं समलाई
१९-काली चूडी कांच --नेडू लाणु खान्दू रहणु दिन दस पांच
20-दले जाली दाळ --नाक की नथुली बेचुला ना जा सुवा माल
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बाजूबंद काव्य में खुद (बाजूबंद कव्य में विरह वेदना )
Pain of Separation in Garhwali, Uttarakhand Folk Poetry
Collected by Malchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti
२१- साग लाई मेथी - ना जा सुआ मॉल घर ही कमौंला खेती
२२- झगुली को मैल ---तू जांदू मॉल, मैं बी ल्हीजा गैल
२३- घुघता की घोली ---सुत्बिज छोडी tapraandi होली
२४- झगुली कट्ठ्याली---तेरो मायादार मीन देखी रुनु थौ लाठ्याली
२५--थकुली को कांसू -- बांजा बौण्म रोली को फ़ुन्जलो आंसू
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विरहयुक्त बाजूबंद काव्य
Pain of Separation in Folk Songs of Garhwal, Uttrakhand , Himalayas
Collection by : Malchand Ramola
Presented by : Bhishma Kukreti

२६- देवता की मन्दुली-- तू होली दौली मी तेरा गलाकी घन्दुली
२७--डाली का डोका -पैली लाई माया पिछ्वाडी लाई धोका
२८-लाठी लाया मुंद-- उल्यारा प्राण तेरो केन होय कुंद
२९-बांज काटे घास -बारी मास रह्या त्वै मिलने आस
३०-छांछ छोली रौड़ी--दिल का कल्यूर लाये त्योऊ दया नि बौडी
३१-छान्सो को मखन --मिलणु दुर्लभ ह्वै गे देख्णु कखन
३२- सिंदूर की डब्बी - फूल टूटी जुडी जांदी दिल टूटी नि जुड्दो कब्बी
३३- डाली कांत्या फेद -- जाखी लाई माया ताखी नाडी भेद
३४- डाला पक्की आम -- जन्नी कन्नी माया से त बढिया ताप ले घाम
३५- रोटी पकाई लगड़ी--बाटम मिली ज्यू बी ल्ही गे दगडी
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विरह युक्त बाजूबंद काव्य
Pain of Separation in Garhwali, Uttrakhandi Folk Songs
३६- बखरा की सींगी --न ह्वै सेवा सौंली न पछेन्दू रिंगी
३७- माछी मारी ऐन --नजरी संयार ऐजा क्या चितौन कैन
३८- शिकारी को बूर --सच्ची माया होली मिली जुला जरूर
मालचंद रमोला द्वारा संग्रहित
भीष्म कुकरेती की प्रस्तुति
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वाजुबंद काव्य में स्वप्न (गढ़वाल , उत्तराखंड, हिमालय के लोक गीतों में स्वप्न )
Dream in Folk Songs , Folk Poems of Garhwal, Uttarakhand, Himalayas
Collection: Ramchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti
१- मलेऊ की पांत --रातू का सुपिना नि औनु होंदी उकरांत
२- काटी जाली सुपारी --सुपिना की नींद टूटी आंखी ना उफारी
३- कू तोडी बंद --झट दर्शन दे जा सुपिना का धन्द
४- बाखरा की सींगी ---रातु का सुपिनी माँ आयी दिन आंख्युं माँ रीँगी
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बाजूबंद काव्य में उपहार या सौगात
Gifts in Folk Songs of Garhwal, Uttarakhand, Himalayas,
Gifts in Garhwali Love poems
Collection: Malchand Ramola
Presented : By Bhishma Kukreti
१- बिछौनु दरी कु - सौगात दे जा उमर भरी कु
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बाजूबंद काव्य में शकुन
Marvelous Divination in Folk Songs, Folk Poems of Garhwal , Uttarakhand, Himalayas
Marvelous divination in Garhwali, Uttarakhand Folk Songs
Collection: Malchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti
रिन्गाली की माणी --बाँई आंखी फरकि सुआ औन्दु जाणी
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बाजूबंद काव्य में चुम्बन
Kissing in Folk Songs, Folk Poems of Garhwal, Uttarakhand, Himalayas
Kissing in Garhwali Folk Poems
Collection: Malchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti

१- साबुन को फेण--गुदबुदया गिची गुद लेकी पेण
२- खैन्दी च कढाई ---ओंठों पर ओंठो मिलै दान्त्युं ना करी लडाई
३- लोहा गढ़ी छेणी-- रुब्सी ! गिची कै पेण नि दिनी
४- कागजू का तौ - पिंगली galwaadi दान्तूं का घौ
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बाजूबंद काव्य में रूठना (मान)
Coquetry /Anger in Folk Songs , Folk Poetry of Garhwal, Uttarakhand, हिमालायास
Collection: Malchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti
डाली को हरील --- तू रूसे जैली क्या ब्वालाल शरील
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बाजूबंद काव्य में सन्देश (रैबार )
Messages in Folk Songs, Folk Poems of Garhwal, Uttarakhand , हिमालायास
Collection: Malchand Ramola
Presented by Bhishma Kukreti
१- चांदी का बटण --रैबार लीजा खुदन ह्वै गयौं काठी बरण
२- आंखी को रतन --रैबार ल्ही जा की ज्यू रखी जतन
३-घट पिस्या मैन्दी --बाटा को बटोही लहै दी सुआ की सैदी
४- दाथ्डी की धार--कु भग्यान ल्ही जालो मेरो रैबार
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गढ़वाली बाजूबंद काव्य के विविध रंग
Various Colors in Folk Songs of Garhwal, Uttarakhand, Himalayas
Various subjects in Garhwali -Kumaoni Folk Songs, Garhwali, Kumauni Folk Poetry
Collection: Malchand ramola
Presented by Bhishma Kukreti
1- डीला घुरी गोणी--विधाता की लेखी चल चूक नि होणी
२-साग लाई कोया --सदानी नि रौंदा पाख, पख्याडू अर छोया
३-क्याला कु फिरक--गाड गदनुं न सुकी जाण रै जाण सिलवानी निरक
४- छतरी को खोल--मर्दि ज्युंदी संसार कैको आज कैको भोल
५- माछी मारी गैब --दुन्या रूठी साड़ी पर तू ना रूठी दैब
६- सान्दंं की किली - द्वी दिन कु जींनु रेणु हिली मिली
७- पालिंगो को साग --मनखी जौली माया होंदी, पुरुष जौला भाग
८-ओडी जाली खेस - इन लाणी पगडी जो नीम रखो हमेश
९- पोस्तु की अफीम --दुपट्टा बेमान होन्दु टोपी लांदी नीम
१०-बांज काटया गेली --कुछ ह्वैगी लेणी- देणी कुछ लोणा तेली
११- देवता की रोत -डांडू की कुरेडी लोटी ह्वैगे अन्धालोट
१२- सरकाई सुई - परदेसी माँ नी रोणू पट्टी जांदी ख्वी
१३- झांसी को मन्दोल --द्वी बचन बाजूबंद लौला विपदा को दंदोल
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