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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, September 10, 2009

काश पर्दा नि खुल्दु

हमारा इलाक माँ एक गह्ढ़वाली नाटक मंडलील कई नाटक करिनि ! कुछ त धार्मिक छाया त कुछ सामाजिक ! रावत जी वेका डारेक्टर छाया जोंका निर्देशन माँ कई नाटक खेले गिनी ! लुखमा उको बडो मान सन्मान छो ! वो बडा तह दिल से आर बडी लग्न का साथ काम करदा रिंदा छा ! पिछला साल बीटी उमा, अर , सह निर्देशक खुग्साल जी माँ थोड तना तनी छनी छै ! ये समय उन गोड़ जी कु नाटक काना की सोची कारण यु नाटक लीग से हटीक छो .. याने , यु नाटक करण वाला अर खिन वल्लो पर एक कटाक्ष .. कटाक्ष बोले तो .. जबर्दस्त .. रिहर्शल हुन से पैली अर नाटक हुन हुन तक ! यु द्वीयुक बीच कन खिरतु जुड्यु छो , इनुकी जन बुलद द्वी बागियु क बीच खिर्तु जुडुद खिर्तु ...

जनी नाटक शुरू क्या होई उनी युमा भी ..झगडा .. बड़ी मुश्किल से पैलू शीन होई .. बाद माँ रावत जी स्तागेम आनी अर अपनी मज़बूरी बताई की नाटक थोडा बिलम्ब से शरू करला !
पर्दा पैथर स्टेज माँ घ्प्रोल चनु छो ..

रावत जी खुगासाल की तरफ इशारा कैकी छा बुना ..." मी सब ज्ञण्दु कुछ लोग मेरा खिलाफ साजिश छ्न रचणा "

खुगासाल जी छा बुना .. जू आदिम हमपर लाछन लागाणु च वो , पैली अपणा गरेबान माँ छाकी देखा की कोच साजिस कनु ... हे भै , जुमा जुमा चार नाटक क्या खेलिनी की भयम नि नजर .. रावत जी गुस्स्म बोलिनी ..." न .. न्न्न्न , त तू क्या करली "

- मी.. .. मी... क्या करुलू ... तभी कैल बीच बचाऊ कने कोशिश काई ! वो बोली .. ' अजी खुगासाल आप चुप हवे जाओ दी .... तभी रावत बोलिनी......

" हां .. हां क्या करली बता ?

" खुगासाल बोल '-------एक नई संस्था खडी करुलू होरी क्या " तुमरी ई संस्था का अग्वादी न्यू सब्द जोड़ी की .. "न्यू ड्रामा मड्ळी " जेमा सब कुछ न्यु होलू जानकी डारेक्टर , .... तभी पर्दा खुली ! लुखुल द्वी थाई देखि जू एक हैका क कालर पकडी छा झंझोड़ना !

पराशर गौड़
सितम्बर १०, २००९ स्याम ५.०५