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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, September 8, 2009

"गितांग का गीतुन"

गितांग दिदा का गीतु सुणिक,
लगि मैकु कुत्ग्याळि,
याद आई मैकु, मेरा मुल्क की,
जाण छ मैं सोच्यालि.......

बिराणा मुल्क, सदानी रन्दिन,
सब्बि धाणी की स्याणी,
बांज बुरांश की, डाळी नि छन,
छोया ढ़ुंग्यौं की पाणी......

घौर बिटि चिठ्ठी, अयिं छ ब्वै की,
कैन हौळ लगाण,
ऐजा बेटा तू, घौर बोड़िक,
मेरु खुदयुं छ पराण.......

ब्यो करि त्वैकु, ब्वारि भि ल्हयौं,
भागिगी बौग मारिक
अब सोचणु छौं, क्या पाई मैन,
त्वै नौना पाळिक......

गितांग दिदा का, गीतु मा छन,
बानी बानी की गाणी,
कुत्ग्याळि सी, लगणी छ मन मा,
आज कू सच बताणी....

गितांग दिदा का गीतु सुणिक,
लगि मैकु कुत्ग्याळि,
मन मा ऊमाळ, ऐगि मेरा,
जाण छ मैन सोच्यालि....


Copyright@Jagmohan Singh Jayara"Zigyansu"......6.9.09
E-Mail: j_jayara@yahoo.com, (M)9868795187