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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, April 28, 2016

पोती की परलोक जात्रा ( करुण रसयुक्त कविता )

Modern Garhwali Folk Songs, Poems 

           पोती की परलोक जात्रा  
( करुण रसयुक्त 
गढ़वाली कविता )

रचना --  दाक्षा याणी  दत्त चन्दोला ( जन्म  -कांसखेत , कळजीखाळ , मनियारस्यूं , पौड़ी गढ़वाल  ) 
Poetry  by - Dakshayani Datt Chandola 
( विभिन्न युग की गढ़वाली कविताएँ श्रृंखला )
-इंटरनेट प्रस्तुति और व्याख्या : भीष्म कुकरेती 
-
तू ह्वेगे छे , हमुन  समझे भाग्य भारी बढीगे 
दादा दादी हम बणि गंवां , प्राप्त सम्मान ह्वेगे।  
जै बैरी तैं रहि तु हमु मा , मोद -अमोद माँ 
बूढी दादी बणिकि पिछनै मृत्यु बि साथ ऐगे।  

प्यारी बच्चीकनक्वै यदि मि जणदो , दादी नी  मृत्यु चा या 
देणी दीन्दो किलइ त्वे तैं गोद माँ वींकी ठंडी। 
हत्यारों ना हम सब ठग्यो गौळी तेरी मरोड़ी    
बीमारी मा हमुन फिर भी क्वी कमी नि छोड़ी। 

पैदा ह्वेकि जबकि सबुंकी गोद मा तू गई छै 
दादा छोड़ी , बस इतनी सी बात माँ रुष्ट ह्वेगे ?
छोड़ी, का  गै, जब हमुं सणि , इं अँधेरी निशा माँ 
त्वै तैं  कनक्वै , बतऊं   कबतैं , पौलु कैं जि दिशा माँ। 

शर्मिष्ठा हे प्रिय , लगि किलै गोद दादा की त्वै तैं 
ना जो बच्ची ! वख बटि कभी लौटणो हि नि होंदों। 
क्वी भी साथी वख नि मिल्दो , गर्त माँ क्या धर्युं छ 
क्यौ रूठी तू ह्मरु त्वइकु क्या बुरु जि कर्युं च ?

तू दादा का हृदय -पट माँ लौटी शीघ्र ऐजा 
मेरी पीड़ा करुण - रस    की धार से बगै जा। 
ऐ जा ! ऐ जा ! बणिकी कविता , कंठ खुल्युं छ 
मेरी बाणी मुखरित बणौ , गीत मेरो भुल्युं छ। 


( साभार --शैलवाणी , अंग्वाळ )
Poetry Copyright@ Poet
Copyright @ Bhishma Kukreti  interpretation if any

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