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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, March 17, 2009

गढवाली लोकोक्तियाँ व मुहावरें (औखाँण, औखाण ): भाग-२

आपके समक्ष कुछ और गढवाली औखाण लेकर प्रस्तुत हुआ हूँ ।गलती से अगर कोई पुनः लिखा जाये तो क्षमा चाहुँगा ।
  • हाथा की त्येरी, तवा की म्यरी ।
  • लेजान्दी दाँ हौल, देन्दी दाँ लाखड़ु ।
  • कखी डालु ढली, खक गोजु मारी ।
  • जन मेरी गौड़ी रमाण च, तन दुधार भी होन्दी ।
  • स्याल, कुखड़ों सी हौल लगदु त बल्द भुखा नि मरदा क्या ?(मेंढकुं सी जु हौल लगदु त लोग बल्द किलै पाल्दा ?)
  • बुडीड पली ही इदगा छै, अब त वेकु नाती जु हुवेगी ।
  • हैंका लाटु हसान्दु च, अर अपडु रुवान्दु च ।
  • बर्तियुं पाणी क्य बरतण, तापियुं घाम क्य तापण ।
  • बाखुरी कु ज्यू भी नि जाऊ, बाग भी भुकु नि राऊ ।
  • लौ भैंस जोड़ी, नितर कपाल देन्दु फ़ोड़ी ।
  • जख मेल तख खेल, जख फ़ूट तख लूट ।
  • लगी घुंडा, फ़ूटी आँख ।
  • जख सोणु च तख नाक नि च, जख नाक च तख सोणु नि च ।
  • जाणदु नि च बिछी कु मंत्र, साँपे दुली डाल्दु हाथ ।
  • तू ठगानी कु ठग, मी जाति कु ठग ।
  • ठुलो गोरू लोण बुकाओ,छोटु गोरू थोबड़ु चाटु।
  • लूण त्येरी व्वेन नी धोली,आंखा मीकु तकणा।
  • भुंड न बास, अर शरील उदास ।
  • भिंडि खाणु तै जोगी हुवे अर बासा रात भुक्कु ही रै ।
  • अपड़ा जोगी जोग्ता , पल्या गौं कु संत ।
  • बिराणी पीठ मा खावा, हग्दी दाँ गीत गावा ।
  • पैली खयाली छारु(खारु), फ़िर भाडा पोछणी ।
  • ब्वारी खति ना... , सासु मिठौण लग्युं... ।
  • खाँदी दाँ गेंडका सा, कामों दाँ मेंढका सा ।(कामों दाँ आंखरो-कांखरो, खाँदी दाँ मोटो बाखरो ।)
  • खायी ना प्यायी, बीच बाटा मारणु कु आयी ।
  • बांटी बूंटी खाणि गुड़ मिठै, इखुलि इखुलि खाणि गारे कटै।
  • भग्यानो भै काल़ो, अभाग्यू नौनू काल़ो।
  • नोनियाल की लाईं आग , जनाना को देखुयुँ बाघ
  • जै बौ पर जादा सारू छौ वे भैजी भैजी बुन्नी
  • बाग गिजी बाखरी बिटि, चोर गिजी काखड़ी बिटि ।
  • म्यारू नौनु दूँ नि सकुदु , २० पता ख़ूब सकुदु ।

सन्दीप काला