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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, March 17, 2009

गढ़वाली कविता- 'मिन त गीत पुराणु ही गाण' !

सुणि त होली आपन व पुराणि औखाण,
"आदू कु स्वाद बल बांदर क्य जाण",
तुमि तै मुबारक या नया जमनै की
भौ- भौ अर् ढीकचिक- ढीकचिक,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

अंग्रेजी बैण्ड पर नाचदा रमपमबोल,
अर् दाना-स्याणू कु उड़ान्दा मखौल,
छोडियाली युऊन अब ढोल दमाऊ
और मुसिकबाजु त कैन बजाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

आजकल का नौन्यालू कि इखारी रौड़,
बाबै की मोणी मा फैशन की दौड़,
यी क्य जाणा कन होन्दु मुण्ड मा टोपली
अर् कन्धा मुंद छातू लिजाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

पढोंण का खातिर यूँ तै भेजि स्कूल,
अददा बट्टा बिटिकी ये ह्वाय्ग्या गुल,
घुमया-फिरया यी कौथिक दिनभर
दगडा मा लिकी क्वि गैला-दगडीयाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

मुसेडै की डॉरौकु और पैसे कि तैस,
चुल्लू उजड़ीगे और ऐगिनी गैस,
यूँन नि जाणि कन होंदी बांज कि लाखडि
अर् व्यान्सरी मु फूक्मारिक चुलामुन्द गोंसू जगाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

काटण छोडिक लाखडु अर् घास,
खेलण लग्यां छन तम्बोला तास,
घर मु गौडी भैंसी लैंदी ही चएंदी सदानी,
बांजी भैंसी गौडी कख फरकाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

पेण कु चैन्दि यु अंग्रेजी रोज,
बै-बुबगी कमाई मा यी करना मौज,
जब कभी नि मिलदी यु तै अग्रेजी त्
देशी ठर्रा न ही यूँन काम चलाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

खाणौ मा बर्गर, पीजा, चौमिन, दोशा,
नि मिली कभी त बै-बुबौऊ तै कोशा,
हेरी नि सकदा यु कोदा झंगोरू तै,
कफली अर् फाणु त यून कख बीटी खाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

बदन पर युंका लत्ती न कपडि और,
वासिंग मशीन भी यी लैग्या घौर,
इनी राला घुमणा नांगा पत्डागा त
आख़िर मा ठनडन पोट्गी भकाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

फैशन मुंद युंका इनु पड़ी विजोक,
कमर युंका इन जन क्वि सुकीं जोंक,
डाईटिंग कु युन्गु इन रालू मिजाज
त डाक्टर मु जल्दी यूं पड़लू लिजाण
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

भिन्डी क्य बोलू आप दगडी यांमा मैं,
आप भी पढ़यालिख्या और समझदार छै,
नी सुधर्ला त कैन मेरु क्या बिगाडंन
बूडेनदी दा तुमन भी आपरी खोपडी खुजाण,
भै ! मिन त गीत पुराणु ही गाण !

गोदियाल

2 comments:

  1. Bahut badiya kabita ch Nevy pidi th apnu puranu sanskriti bare samjhankhan

    ReplyDelete
  2. bahut badhiya kavita cha ya.lakin meri aapsi ek binati cha ki kya mein ye par geet ge sakadun.meintein apki kavita bahut pasand ayi.
    ph no-9639306271.

    ReplyDelete

आपका बहुत बहुत धन्यवाद
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