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Sunday, November 8, 2015

क्या अगले दशक में सहिष्णुता और असहिष्णुता की भद्द पीटी जायेगी ?

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                     क्या अगले दशक में सहिष्णुता और असहिष्णुता की भद्द पीटी जायेगी ?
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                     चबोड़ , चखन्यौ , चचराट   :::   भीष्म कुकरेती    
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    स्वतंत्रता पैथर भारत मा प्रजातंत्र की उथगा भद्द नि पिटे गे जथगा भद्द , जथगा बेज्जती , जथगा पिटै धर्मनिरपेक्ष शब्द की ह्वे।  सेक्युलर , नॉन सेक्युलर या स्यूडो सेक्युलर शब्दों का इन बुक्चा बणाये गे कि अब कैंब्रिज , वेब्स्टर , ऑक्स्फ़ोर्ड वळ अपण अपण शब्दकोश से सेक्युलर शब्द ही हटाण वळ छन किलैकि शब्दकोश निर्माताओं अर संपादकुं समज मा इ नि आणु च कि सेक्युलर की कॉंग्रेसी व्याख्या , नितीश कुमार -पासवान ; लालू प्रसाद , कम्युनिस्ट , भाजपा, ओवेसी  आदि की परिभाषाओं मादे असली परिभाषा क्वा च ? शब्दकोश का संपादक अचेत छन कि आतंकवादी तै 'जी' बुलण से यदि क्वी स्क्युलर ह्वे सकुद अर  'पंडित भीष्म कुकरेती ' तै हरामी बुलण से बि आदिम सेक्युलर ह्वे सकद तो स्क्युलर की परिभाषा क्या होली।  शब्दकोश का संकलनकर्ता बेहोशी का हालत मा लाल कृष्ण आडवाणी से पुंछणा छन कि क्या पूठा मा जिन्ना का ब्रैंड /ठप्पा लगाण से बाबरी मस्जिद का अपराधी क्या सेक्युलर ह्वे सकद क्या ?
   अब सेक्युलर शब्द मा वा   , तैंचि , गरमी , उ दम -खम नी रै गे कि मुलायम सिंह मुसलमानुं तै ढिबर जन हकै साको।  अब कॉंग्रेस का वास्ता स्क्युलर शब्द एक प्राचीन , प्रागऐेतिहासिक , खुंडु शब्द ह्वे गे।  भाजपा का वास्ता स्यूडो सेक्युलर शब्द गुदनड़ जोग हुयुं शब्द ह्वे गे।  बिहार मा सेक्युलर शब्द का भौत सा बाप दादा ह्वे गेन अर अब धर्मनिरपेक्ष शब्द पर केवल लालू यादव का कब्जा नी च अपितु ओवेसी , एनसीपी , नीतीश आदि का बि कब्जा ह्वे गे।  
आज सेक्युलर शब्द ही इरलीवेंट ह्वे गे याने औचित्यविहीन ह्वे गे। सेक्युलर शब्द अब राजनैतिक श्मशान घाट मा जळ गे। सेक्युलर शब्द का राख बि अब भारत मा नि मीलल। 
  इनमा राजनैतिक रुट्टि, खिचड़ी , केक पकाणो वास्ता नया बर्तन , भांड , तवा चयेणु छौ।  अर सन 2015 की एकी उपलब्धि च कि राजनैतिक बदमाशों , राजनैतिक बदकारों, राजनैतिक पार्ट्यूं   वास्ता हमारा बुद्धिजीवियोंन द्वी शब्द दे देन। इ शब्द छन - सहिष्णुता अर असहिष्णुता अर एकाद सालम हैंको शब्द ऐ जालो सूडो टोलेरेंट या स्यूडो टोलरेंसी। 
 अगला दशक मा भाजपा का ख्वाळ वळ इंटॉलरेंस याने असहिष्णु माने जाल अर भाजपा विरोधी सहिष्णु याने टोलिरेंट पार्टी। 
अब सबका सब राजनैतिक पट्ठा सहिष्णु अर असहिष्णु की खाल उधाड़ल। 
अब सबि  राजनैतिक लोग सहिष्णु अर असहिष्णु की नई परिभाषा अपण सहूलियत से द्याला। 
अब सबि राजनैतिक सोच वळ , समर्थक सहिष्णु अर असहिष्णु शब्दों की डंडलि सजाला। 
सहिष्णु अर असहिष्णु शब्द अब राजनैतिक स्वार्थ की बलिबेदी मा बलि का बकरा बौणल। 
सहिष्णु अर असहिष्णु शब्दों से अब नया नया भाषण तयार होला।  नया नया लाल कृष्ण आडवाणी , नया नया  दिग्विजय सिंह , नया नीतीश कुमार , नई नई ममता बनर्जी -मायावती , नया नया अकरुद्दीन ओवेसी पैदा ह्वाल जु सहिष्णु अर असहिष्णुशब्दों की ऐसी तैसी कारल। 
अगला दशक मा  जनता अब सहिष्णु अर असहिष्णु  शब्दुं का बीच पिसे जाली। 
जनता तै अब दाळ की जगा सहिष्णु अर असहिष्णु शब्द खलाये जालो। 
जनता तै अब कपड़ा  ना सहिष्णु अर असहिष्णु  की लंगोट पैराये जालो। 
अगला दशक मा  अब जनता तै सहिष्णु अर असहिष्णु द्वारा फिर से बेवकूफ बणाये जालो अर अशिक्षा , कुपोषण , सुविधा मा सुधार की जगा सहिष्णु अर असहिष्णु शब्दों मा सुधार की छ्वीं लगलि। 
क्या मि कुछ गलत बुलणु छौं ? 





7 /11/15 ,Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India 
*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ चरित्र , स्थान केवल व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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