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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, November 15, 2015

बुरु दिन

Very Short Garhwali Stories
                 बुरु दिन 

(  गढ़वाली लघुकथा श्रृंखला -2 , Garhwali Very Short Stories -2  ) 
                        अनूदित  कथा    -- भीष्म कुकरेती 
मि एक ढाबा मा दारु क गिलास लेकि बैठी छौ कि एक टपोरी आयी , म्यार बगल मा बैठ अर म्यार गिलास उठैक वैन सरा  दारु एक झटका मा घटकै दे। 
वैन आँख घुरैक ब्वाल -क्या बै क्या छे घुरणु ?
मीन रुण शुरू कर दे 
वैन जोर जोर से हंसण शुर कर दे अर ब्वाल - अबे मरद ह्वेक रुणु छे ?
मीन रुंद रुंद ब्वाल -म्यार आज सुबेर बिटेन इ बुर दिन चलणु च। 
सुबेर उठिक ऑफिस ग्यों तो बौसन टर्मिनसन लेटर पकड़ै दे।  
बैंक ग्यों अर पैसा निकाळिक भैर औं तो जेबकतरौन म्यार पैसा छीन दे। 
ड्यार ग्यों तो पता चौल कि मेरी घरवळि अपण दोस्तक दगड भाजि गे। 
इखम औं तो मीन दारु मा साइनामाइड बिष मिलै कि यीं बेकार की  जीवन लीला इ खतम कौर द्यों। 
बिष घुल गे छौ अर मि गिच्च लगाण इ  वाळ छौ कि तेरी निपल्टी ह्वे गे।  
म्यार तो आज दिन ही बुरु गे।  इन बतादी त्यार दिन कन गुजर ? 

15 /11  /2015 Copyright @ Bhishma Kukreti

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