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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Sunday, December 9, 2012

वू लोग


हमरा ही घोलौं बैठी ,हम्थेय की उडाणा छीं वू लोग
हमरा ही लट्ठों से ,हम्थेय की लठियाणा छीं वू लोग
हमरा ही म्वालौं थेय लगैऽक ,गिच्चौं फर हमरा
छुईं हमरी ही कन्न लगाणा छीं वू लोग


सरया जिन्दगी बाटू दिखाई जौं लोगौं

बाट हम्थेय ही आज कन्न बिरडाणा छीं वू लोग

खाई सरया जिन्दगी जौंल गाड- गाडीऽक पैन्छु

हम्थेय ही आज डडियाणा छीं वू लोग


खुच्चिलियुं मा ख्यलीं ब्याली तक जू हमरी

खण्ड कन्ना कन्ना हम्थेय ही आज खिलाणा छीं वू लोग

जू बुथैं बगत बगत थमथ्याकि हमुल

कन्न आज हम्थेय ही ठगाणा छीं वू लोग


जौंकी मुखडी आश देखि काट सरया जिंदगी हमुल

कन्न मुखडी आज सर्र हमसे ही लुकाणा छीं वू लोग

जौं थेय रौं पिल़ाणु दूध ,खून अप्डू सोचिक

कन्न गुरा बणिक आज हम्थेय ही तडकाणा छीं वू लोग


सैंती पालि कैरी ज्वान जू

बोझ हम्थेय ही आज बताणा छीं वू लोग

जौं का बाना पूजीं ढुन्गा सरया दुनियाऽक

ढुन्गु समझिक उन्दु आज हम्थेय ही चुलाणा छीं वू लोग


दिन चार पैदा हूँया , जौं थेय नि व्हाई अज्जी

औकात ब्वेऽक आज पुछणा छीं वू लोग

मी छौं हिमालय ,प्राण -भाल भारत कू ,

यी च बस परिचय म्यारू

मिल सुण सफेदपोश व्हेकि अज्काल

दिल्ली -देहरादूण मा

लाल बत्ती खूब रिंगाणा छीं वू लोग

            लाल बत्ती खूब रिंगाणा छीं वू लोग...........


स्रोत : हिमालय की गोद से ,गीतेश सिंह नेगी (सर्वाधिकार सुरक्षित )