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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, December 25, 2012

जा ! बलात्कार्युं जंगड़ सौड़ि जैन


भीष्म कुकरेती
आज एकान बीच दुफराम गुस्साम एक नौनि पर बलात्कार कार। बलात्कारी नौनी पर रुस्युं छौ
काण्ड लगि जैन तै मानसिकता पर जो सम्भोग तै गुस्सा उतारणों माध्यम मन्दन . अरे इथगा इ गुस्सा छौ त अपण मुंड ढून्गु पर मारदो ना !

एक भूतपूर्व जमींदारन समाजम अपण हैसियत , शक्यात , नियंत्रण दिखाणो, दहसत फैलाणों बान अपणी गौं की ब्वारी पर खुलेआम बलात्कार कार .

अरे मरजात ! हे कुजातिक ! हे न्यळतो (नपुंसक )! धौंस जमाणो त्वे तै जनानि दिखेन?.धौंस इ जमाण छे त कै पहलवान मरद पर दिखांदो त हम मानि लीन्दा तू छक्का नि छे मरद छे।

आज एक सैडिस्टन (जै तै दुसरो दुःख दिखणम रौंस आन्द ) एक नौनि पर बलात्कार कार
हे बहसी दरिंदा ! हे रागस ! इनि दुःख से मजा आंदो त अपण अंग प्रत्यंगुं तै ल्वाड़ोन थिंचांदी त तब पता चलदो त्वे बेशरम तै कि डा क्या हूंद . अर जु नियम होंदा कि बलात्कार्युं तै कुठारे जाल त ये सुंगर हिकमत होंदी तेरी ?
ब्याळि अपण दगड्यो बीचम मरदागनी दिखाणो बान उखम गैंग रेप ह्वे
एकान जनान्यु तै सबक सिखाणो बान रेप कार

हे डंडलि सजेन तुमारि , तडम लगि जैन तुमारि स्या मानसिकता . अर इनि, जु तुमर अंग -भंग करे जालो त फिर दिखाण लैक रैल्या तुम अपण स्या मरदानगी ?
एकान अफु तै महान मरद साबित करणों बान बलात्कार कार
अरे असुर ! फंड धुऴया! महान मरद इ बणनाइ त क्वी महान काम करदो मोरि गे छौ तु जु महानता सिद्ध करणों बान त्वे जनानी प्रताड़ना की सूझी ?

शराबौ नशाम एक बुड्यान बलात्कार करि .
ये निर्भागी , हे कोढ़ी ! शराबौ नशाम तीन गू किलै नि खायि ? ये पापि ! शराबौ नशाम तीन फांस किलै नि खायि ?
एक बलात्कारी तै पुछे गे बल तीन दलित नौनि पर बलात्कार किलै कौर ? त बुलण बिस्यायि बल यु त हमर अधिकार च .
या अमानवीय , अमानुषिक , सामाजिक मानसिकता कब बंद ह्वेलि ज्वा दलितों अर कमजोर वर्ग पर तरां तरां क अमानवीय अत्याचार करवांदी ?

आज , बीस साल बाद, बलात्कारो केसम एक बलात्कारी तै ठोस गवाह नि मिलण पर निर्दोष साबित कार
ये राजनैतिक अर कार्यपालिका का ठेकेदारों कब तुम पवित्र संविधान की रक्षा बान समय पर न्याय दिलाणो इंतजाम करिल्या ?
दिल्लीम गैंग रेप को उपरान्त राजनीति गरमाई
हे बेशरम राजनीतिज्ञों ! कबि त शरम कारो . कबि त स्वाचो कि तुमारि क्या क्या जुमेवारी च , नियमो मा समयानुसार बदलो त सै ! तुम पर अबि बि जनता भरवस करणि च अर जैदिन तुमर कुकर्मो , अरनिष्क्रियता से दुखि ह्वेक कखि जनतान थमाळि उठाइ दे त !

Copyright@ Bhishma Kukreti 26/12/2012