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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, December 25, 2012

अबौ जड्डू अर तबौ जड्डू

गढ़वाली हास्य व्यंग्य
हौंसि हौंस मा, चबोड़ इ चबोड़ मा
                                    अबौ जड्डू अर तबौ जड्डू
                                   चबोड्या : भीष्म कुकरेती

                           तबारि थर्मामीटर हूंदा होला पण तबारि सरकारम गढ़वाळो कुण इथगा बजट नि छौ बल हम तै पता चौल जावो बल गढ़वालम औसतन कथगा तापमान च त जलवायु इतियासौ खुजनेर बि नि बतै सकणा छन बल तबौ तापमान अर आजौ तापमानम क्या अंतर छौ . मेरि ददि बुल्दि छे बल ये सालौ जड्डू इनि च जन जै साल फलण मोरि छौ या अलणौ ब्यौ ह्वे छौ या वैकि -तैकि जनानी मैत भागि छे . जलवायु इतियासौ खुजनेर अबि गढ़वाळम कथगा ठंड पड़दि छे बान हमर लोक साहित्य पर जादा आधारित छन .
                      हमर टैम याने जब हम छ्वटा छया (अब गीतेश नेगी जन कवि बुल्दन मि दानो हवे ग्यों ) पर बि सुबर सुबर आजौ तरां सिलड़ रस्तोंम खारो कांच जन जम्युं रौंद छौ अर तब हम आज्ञाकारी श्रवण हूंदा था त सुबर सुबर पाणि लाणो जाण पड़द छौ पण तबार्यौ कांच जन खारो बड़ो दयावान , दयालु , करुण हूंद छौ . वो खारो इथगा दयालु हूंद छौ बल हम तै पता इ नि चल्दो छौ बल ठंड बि क्वी चीज हूंद . हम सुबेर सुबेर कर्च कर्च खारोम हिटदा छा पण मजाल च खारो हमर कुछ बिगाड़ी द्याओ धौं .वै खारो तै बि पता छौ बल हम वीर पुत्र पुत्री छंवां अर नंगा खुटुन जाण हमारि शान छे त वै जमानो खारु बि हम लोगुं नुक्सान नि करदो छौ। अचकालौ खारु ! हे मेरि ब्वे बडो निगरू , करुड , निर्दयि ह्वे गे . उन त अचकाल बच्चा लोग श्रवण कुमार बणनम शर्मान्दा छन पण कबि कबि कबार कै बच्चा पर श्रवण कुमारो भूत लगि गे अर वु सुबेर सुबेर पाणिम ग्यायि अर कांच जन खारोम हिटो त खारु रूसे जांदू . कांच जन खारु चप्पल वाळ तै रडै दींदु , रबर शु वळो रबर शू भिजै दींदु या चमडा जुतुं भितर बि छीरि जांदो .इनमा श्रवण कुमारो भूत लगण पर बि बचा लोग सुबेर सुबेर पाणिम नि जांदन बल कु रावु ये निर्दयी , निगरू खारो दगड़ भारत लीणु. हमर टैम पर जड्डूम सुबेर सुबेरो ठंडी , कुरकुरी हवा बि बड़ी मयेळि हूंदी छे , करुणामयी हूंदि छे। हम जंग्याम सुबेर सुबेर पाणिम जांद छा पण मजाल च कुरकुरी बर्फीली हवा हमर कुछ बिगाड़ी द्यायो धौं ! हमर टैमौ कुरकुरी हवा जाणदी छे बल हमम एकी सुलार च जैन सरा साल चलण अर हम वै सुलार पैरिक रोज स्कूल बि जांदा त हमर टैमौ कुरकुरी हवा जाणदी छे सुलार खारोम भीजि जांदो अर कखि बल जु हम सुलार पैरिक सुबेर सुबेर पाणि लौला त सुलारन भीजि ग्याई त हम स्कूल जाण लैक नि रै जौलां . इनमा सुबेरक कुरकुरी हवा हम पर दया दिखांदी छे अर हमारो कुछ नि बिगाड़दि छे .अबै सुबेरक हवा ग्लोबल माइंडेड ह्वे ग्याइ अर जु तुम गरम कपड़ा नि पैरिल्या त या नई जमानै ठंडी हवा तुम पर निमोनिया जन रोग सरै दॆन्दि , फैले दींदी . हवा को रुख बदले ग्याइ त अचकाल नौन्याळ गरम कोट, पैंट , स्वेटर , टाइ पैरिक पाणि लाणो जांदन . पचीस सालम जड्डू हवाम इथगा बदलाव ऐ ग्याइ .
 
                       तबारि जब हम जड्डूम सुबेर सुबेर पाणि लाणो जांदा छा त पाणि लांदा लांदा हम पर अग्नि प्रेम को बयाळ चौढ़ी जांद छौ अर हम घौर ऐका अपण हाथ चुल जोग करि दीन्दा छा . खुट बि अग्नि प्रेम का खातिर चुल पुटुक जाणों आतुर्दि रौंद छा पण हमर खुट सांस्कृतिक नियमों पालन करणों खातिर चुल पुटुक नि जांदा छा बस चुल्लो भैर बिटेन अग्नि दिबता पुजाई करदा छा . वै बगत खुट बि समाज अर संस्कृति नियमो पालन करणम घमंड महसूस करदा छा। अचकाल त खुट बि मनिख जन ह्वे गेन ब्वे बुबों तै बि लते दींदन।

हमर जमानोम जड्डूम गुड़ऐ बड़ी इज्जत हूंदी छे अर हम जड्डूम गुडै चा पींदा छा या गुडै कुटकी दगड़ चा पींदा छा . अब त लौबीइंगौ जमानो च . जख जावो तख लौबीइंग . शक्कर लौबी हरेक राज्यम इथगा ताकतवर ह्वे ग्याइ बल गुड़ लौबी इ खतम ह्वे ग्याइ अर अब त गुड़ - गिन्दोड़ा इतियासो पन्नो मा इ मिल्दन . गुड़ -गिन्दोड़ा बणानो बड़ी बड़ी चासणी -लखड़ो कैंचा पुरात्व विभागों म्युजियमम दिखणो मिल्दन .
 
                              गां मा ह्यूं पोडि गे त त्यौहार जन माहौल ह्वे जांदो छौ . हरेक ब्वे बुखण (खाजा ) भुजदी छे जन कि भट्ट, मर्सू , भंगुल , मुन्गरि -जुंडळु खील आदि .अर बैक लोग अंगेठी चारो तरफ बैठिक तमाखू पींदा पींदा इतिहास विमर्श करदा छा याने लोक कथाओं आदान प्रदान करदा छया या अन्ताक्षरी खिल्दा छा . अब भट्ट, मर्सू , भंगुल , मुन्गरि -जुंडळु हूंदा नी छन त पैकेटोम भर्याँ नमकीन पर जोर रौंद अर अचकाल बैठकुंम तमाखु जगा दारु -शराबन ले आल, अन्ताक्षरी जगा जुवाक ताश बिराजमान ह्वे गेन .इतिहास विमर्श या लोक साहित्य चर्चा जरूर हूंद च पण कै ग्राम परधानन कथगा गोलमाल कार या जवाहर रोजगार योजनाम कै कैक नकली बैक खाता खोल्यां छन जन आधुनिक लोक साहित्य पर चर्चा होंदी।

                                  जलवायु या हवा परिवर्तन से अब हवाम कुछ हौरि हवा च। अब रूम हीटरो आण से लोग बाग़ जड्डू मजा नी लींदन . पैल हम जड्डूम रात्यु खंतड्यु से प्रेमिका से जादा प्रेम करदा छा . अब त रूम हीटरो आण से खंतड्यु महत्व इ बिसरि गेवां .अब हम हवा- बदलणो(एयर -कंडीसनर) यंत्र लै गेवां त हम तै पता इ नि चलद कि हवा कनै बगणी च . अब द्याखो ना हमर प्रधान मंत्री तै अमेरिकाम वित्तीय स्तिथि बाराम पूरो पता रौंद पण प्रधानमंत्री तै इथगा सालोम पता इ नि लग कि लोगम स्त्री प्रातीडन से कथगा आक्रोश च .

Copyright@ Bhishma Kukreti 25/12/2012