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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, January 4, 2018

थोकदानी बौ अर वींक कजे अलग अलग हुक्का पर तमाकु किलै पींदन ?

( श्री सोहन लाल जखमोला द्वारा कही गयी एक सत्य घटना का नाट्य रूपांतर )


Best  of  Garhwali  Humor , Wits Jokes , गढ़वाली हास्य , व्यंग्य )
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 चबोड़ , चखन्यौ , ककड़ाट  :::   भीष्म कुकरेती   
समय -1997 
स्थान -गुलरगाड (टिहरी जनपद ) क्षेत्र का एक गाँव, 
छज्जे पर पति  पत्नी अलग अलग हुक्का लिए किन्तु सजला एक ही है तो बारी बारी से तमाकू पी रहे हैं  
समय - सुबह नौ बजे 
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(गोबिंद सिंग का आंगन में प्रवेश ) 
गोबिंद सिंग - औ ! थोकदानी बौ का बि दर्शन ह्वे गेन भै  ... 
थोकदानी बौ -ये कन  म्वाड़ म्वार  त्यार।  काकी कुण बौ छै रै बुलणु ?
गोबिंद सिंग - अरे सरा दुन्या त्वे कुण बौ बुल्द त मीन बि  ... 
थोकदानी बौ -तुम टिर्याळुं क्वी अंत पंत हूंद त हम उदेपुर्या तुमकुण   ... किलै बुल्दां। 
गोबिंद सिंग - देख वां तू टिरयाळ  अर गंगा पार उदेफर की बात नि कौर हाँ।  छे तू टिरयाळुं  घरवळी ना ? 
थोकदानी बौ - ऊं उ त मेरी मति मोरी जु मि  इना  .. निथर  .. 
गोबिंद सिंग - अच्छा ये थोकदानी बौ  तू अलग हुक्का लेकि बैठीं छे अर जोगी काका क हुक्का अलग पण सजला एकी।  किलै द्वी झण एकी हुक्का पर सोड़ नि मारदा ?
थोकदानी बौ - अरे खानदानी थोकदानी छौं मि।  आमसैण मतलब उदेपुर मा  बारा गौं का थोकदार हवलदार मुरली सिंगै  बेटी छौं मि।  मि त त्यार भिड़युं हुक्का पर बि गिच नि लगौं फिर यी बिचर त  सि  छन  ... 
गोबिंद सिंग - वाह !  ये बौ।  भीतर नि धेला  अर नाम गुमान सिंग रौतेला।  जोगी दा से त्यार द्वी लड़िक ह्वे गेन पण अबि बि  ? हुक्का बिलकुल अलग हैं ?
थोकदानी बौ -हाँ हुक्का तो छोड़ आज तक मीन यूंक क्या यूंक ब्वेक पकायूं  भात तक नि खायी।  जैदिन सासु भात पकांदी मि भात ना सिरफ रुटि खान्दु।  
गोबिंद सिंग - हाँ सुण्यु च तेरी सिक्यूं बारा मा बल तू अबि बि भौत सा बामण अर जजमानुं पकायुं भात क्या वूंक हुक्का पर तमाकु नि पींदी। 
थोकदानी बौ - त्यार बाबन कथगा दैं भात खलाणै कोशिस कार।   मजाल च या थोकदानी छुट जात्यूं बामण जजमानुं चलायुं भात खाओ।  
गोबिंद सिंग - यां इथगा इ अपण जातिक इथगा  इ गुमान छौ तो फिर किलै बैठि जोगी काका कुणी ? ये जोगी काका क्या मंतर कार तीन कि थोकदारण त्यार पैथर पैथर  ... ?
थोकदानी बौ - ऊ क्या ब्वालल मी बतै  लींदु।  अरे बुल्दन बल बुल्युं क्वी नि खांदन  लिख्युं सबि खांदन।  जोग जोग की बात च।  
गोबिंद सिंग - जोग !
थोकदानी बौ -हाँ जोगुं  बात च।  छै खारी सट्टी हूंद छा म्यार मैत।  ब्यौ बि इन ससुरास ह्वे जख  बीस खारी झंग्वर हूंद छा।  पर ब्यौ का द्वी सालम इ रांड ह्वे ग्यों।   
गोबिंद सिंग - ये मेरी ब्वे!
थोकदानी बौ -  फिर कुछ दिनुं बाद द्यूरा कुण बि बैठु।  पर ज्यूंरा तै म्यार सुख बर्दास्त नि  ह्वे।  वी बि टीबी बिमारीन जल्दी टुरक गे।  म्यार ससुर जी बि टीबीन इ  मोरी छा। 
गोबिंद सिंग - ओहो। 
थोकदानी बौ - हाँ 
गोबिंद सिंग - पर ये जोगी काका !  इथगा बड़ी गुमान वळी थोकदानी कनै आयी त्यार फंदा  मा ?
थोकदानी बौ - अरे यूंक ढोलकी का चक्कर मा ऐ ग्यों मि ?
गोबिंद सिंग - ये जोगी काका ? या काकी क्या बुलणी च।  तू त ढोल बजांदी अर काकी बुलणी बल तेरी ढुलकी चक्कर मा ऐ गे। 
जोगी दास - अरे गोबिंद ठाकुर ! एक दैं तल्ला ढांगू क बिजनी  क तूंगी बादी दगड़ आमसैण जिना उनी ग्यों त उख थोकदानी से आँख क्या मिलिन कि मि ऊना ढोलक बजाण लगि गे छौ। 
थोकदानी बौ - हां उ त पैथर पता चौल बल यी दास छन। 
गोबिंद सिंग - निथर क्या ह्वे जांद ?
थोकदानी बौ - कुछ क्या हूण छौ।  म्यार भाग मा यी छा बस।  
गोबिंद सिंग - हाँ  .. 
जोगी दास -ये गोबिंद ठाकुर ! इन त बताओ इना कना आण  ह्वे ? 
गोबिंद सिंग - हां काका उ थोकदानी बौ क चक्कर मा   .. 
थोकदानी बौ - ये काकी बोल हाँ .. 
गोबिंद सिंग - हां उ  भणजौ ब्यौ च पली मैना।  त सोळ गति कुण  ऐ जयां।  मुशकबज अर मंगळेर बि दगड़म लये।   ये काकी  त्वी जी ऐ जै मांगळ लगाणो। 
थोकदानी बौ - चुप बै।  थोकदानी छौं मि।  बड़ो आयी थोकदान्यूं से मांगळ लगवाण वळ।  


 24/12 / 2017, Copyright@ Bhishma Kukreti , Mumbai India , 

*लेख की   घटनाएँ ,  स्थान व नाम काल्पनिक हैं । लेख में  कथाएँ , चरित्र , स्थान केवल हौंस , हौंसारथ , खिकताट , व्यंग्य रचने  हेतु उपयोग किये गए हैं।
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    ----- आप  छन  सम्पन गढ़वाली ----
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