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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Thursday, January 4, 2018

पाठों के मध्य परस्पर संबद्धता का महत्व

Preparation for IAS Exam, UPSC exams 
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पाठों के मध्य परस्पर संबद्धता का महत्व 

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गढवाल भ्रातृ मंडल (स्थापना -1928 ) , मुंबई  की मुहिम  –हर उत्तराखंडी  IAS बन सकता है )
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IAS/IRS/IFS/IPS  कैसे बन सकते हैं श्रृंखला  -45 
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गढ़वाल भ्रातृ मण्डल हेतु प्रस्तुति - भीष्म कुकरेती 
 UPSC के सामान्य ज्ञान आदि को छोड़ अधिकतर विषय मानव स जुड़े होते हैं और एक पाठ अपने आप में अलग थलग नहीं होते हाँ बल्कि हर अध्याय दूसरे  हर अध्याय से जुड़ा होता है अतः परीक्षार्थी को हर पाठ का समग्रता पूर्वक अध्ययन करना आवश्यक है। 
 इसी तरह एक विषय अपने आप में स्वयं विषय नहीं है बल्कि उस विषय का दूसरे विषयों से संबंध होता है।  जैसे समाज  शास्त्र का इतिहास , भूगोल व भाषा , मानव पलायन -प्रवास आदि से सीधा संबंध होता है।  राजनीति और युद्ध व युद्ध कला तो संबंधित होते ही  हैं।  यदि एक विषय का एक अध्याय आपने ठीक से नहीं पढ़ा तो वह कमी आपको किसी अन्य विषय में अवश्य खलेगी।  फिर एक विषय को दूसरे विषय से जोड़ने की क्षमता प्राप्ति भी आवश्यक है। पाठों का संबद्धीकरण कला सीखनी आवश्यक है। 


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शेष IAS/IPS/IFS/IRS कैसे बन सकते हैं श्रृंखला  में..... 
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कृपया इस लेख व 
हर उत्तराखंडी IAS बन सकता है" 
आशय को   लोगों तक पँहुचाइये प्लीज ! 
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