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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Tuesday, January 19, 2010

क्या हूद कबिता ?

कबिता हुन्द ....

स्वीली की पीड़ा
जू हुन्द , बचा थै , पैदा कन से पैली
जू बचा थै, भैर आणों बाटु बतोद !

कबिता हुन्द

धामी का डौर माँ लगाई कटाक
जैसे पैदा हुन्द नाद ( स्वर)
जू नाचाद घ्वाडा थै अपणी ताल माँ !

कबिता हुन्द

बाल जन जिदेर्ये हिगर
जू हिंगर डाली डाली अपणी बात मनोद
जब बात पूरी हवे जाद त खित हंसाद !

कबिता हुन्द

रुडियुमा बाजै जडियुम को ठंडो पाणी
जू बुझोद तिस्लियु की तीस
जै से निकल्द शब्द " जुगराज राया "!

कबिता हुन्द

धार मागे , कुंगुलू घाम सी
जू एहसाह दिलोद तपन की !

कबिता व हुन्द

जू बनू बच्याण की तमीज सिखांद
समझण अर संझानै बात बतोद
आपसमा प्यार प्रेम की भाषा सिखोंद !

`पराशर गौर
१९ जनबरी २०१०