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उत्तराखंडी ई-पत्रिका

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Monday, January 18, 2010

प्रभु.. आप अपना नाम बदल दो !

बैकुंठ में भगवन नारायण संस्सार की गति बिधिउओ पर नज़र रखते -रखते बहुत थक गए थे ! उन्होंने इ मेल करके सब देवताओ खास कर नारद जी को ये सन्देश लिखा " मै दो दिन के अबकास पर जा रहा हूँ कृपया मुझे डिसड्राबड न किया जाया ! " लेकिन, इसी बीच एक बिचित्र घटना घट गई ! जैसी ही पृथिबी लोक से ख़ास कर हिन्दुस्तान से , ये खबर आई की नारायण ने बहुत बड़ा घपला कर दिया है और वो किसी बड़े काण्ड में फंस गए है ! ये सुनकर नारद बहुत बिचलित हुए ! सोचने लगे की कही सचमुच प्रभु नारायण अबकास मनाने हिदुस्तान गए हो और वहा किसी छली / धोखेबाज ने उन्हें लपेट लिया हो ! फिर सोचा क्योना हिदुस्तान जाकर हालत का जायजा लिया जाये !

जैसे वो हिदुस्तान की ओर जाने लगे रास्ते में सोचते रहे ! मेरे प्रभु श्री नारायण तो ऐसा नहीं कर सकते , तो फिर ये कोंन हो सकता है और उसने येसा क्या किया है जिसकी बजह से ये बरैकिंग न्यूज बन गई ! जैसे नारद वहा पहुंचे उन्होंने नारायण नाम के आदमियों के बारमे खोज खबर की ! पता चाल यहाँ तो नारायण के नाम से कई हजारो में लोग है ! एसे नारायण है ये नारायण नाम शब्द कभी पहले होते है जैसे नारायण राणे , नारायण दत , तो , किसकी का लास्ट में, जैसे , आर के नारायण या फिर बीच है , जैसे में लक्ष्मी नारायण स्वरुप ! नारद जी दुव्हिधा में पड गए अपने नारायण को दुंडू या इन में किस को, की तभी, टेलीबिजन पर न्यूज दिखाई दी ! जिसमे खबर थी ...................

" एक धाकड़ नेता जिनकी उम्र ९० के करीब है और जो इस समय किसी प्रदेश के राज्यपाल है ! . वो सरकार में बिसिष्ट पदों पर रहे जैसे बिदेश मंत्री , उधोग मंत्री , वे भारत के जब से बड़े राज्य के कई बार मुख्यमंत्री , हाल में बना नया राज्य जहा उनके पैत्रिक घर भी है, वो , वाह के भी मुख्यमंत्री भी रहे चुके है ! जिनका नाम भारत के भगबान श्री नारायण से भी मिलता है राज भवन में रास लीला राचाते हुए धरे गए ! " नारद जी ने अपने बगल में खड़े एक सजन से उन्होंने पूछा ' भाई जी ये साब ... ? वो बिना देखे बोल पड़ा ----"अरे, वो एन ड़ी है और कौन ? " नारद जी एन ड़ी का पता पूछते पूछते जा पहुंचे राज भवन !

जब वो वहा पहुंचे तो सब की जुबान पर एक ही चर्चा थी की नारारण को ये नहीं करना चाहिए था ! नारायण तो एक मायने में इस प्रान्त का पिता सामान है ! उसकी रास लीला की वो तस्वीरे, टेलीबिजन में बार बार दिखा दिखाकर और नारद जी देख देखकर बहुत लजित हुए ! भारत में आकर उनका शक तो दूर हो गया था की ये काम उनके नारायण का नहीं है लेकिन उनके नाम रासियों द्वारा किये जा रहे इन सब घपलों व कांडो से वो बहुत चिंतित हो उठे और चल दिए सीधे बैंकुठ को !

प्रभु अपने शेस नाग की शया पर आराम कर रहे थे की नारद जी की के नारायण नारायण के शब्द ने उनकों जगा दिए ! आंख खोलकर उन्होंने उनसे कहा "मै आप का बहुत आभारी हूँ जो आपने मुझे इन दो दिनों में मुझे डिसट्राब्दड नहीं किया ! बरना मेरी वैकिशन की..... , खैर छोड़ , ये बताये की कैसे आना हुआ ! " नारद जी ने प्रणाम करते हुए कहा प्रभो ..., भारत में आप के नाम का खुलकर दुरुपियोग हो रहा` है ! आपके द्वारा की गई रास लीलाओं का जमकर मजाक उड़ाया जा रहा है !

प्रभु बोले ... ". ऐसा ? " एक आद उदाहरन देकर समझाओ तो ?
देखए आप जगत पिता है ! आप को सब की चिंता रहती है ! इसीलिए तो सब आप को नारायण से जानते है, पुकारते है ! लेकन ..?

" लेकिन क्या नाराद जी .." आगे भी तो बोलिए .. क्या किया है नारायण ने !
आपने नहीं ,,, आप के नाम रसियो ने वहा आप का नाम इतना अपवित्र कर दिया है की मुझे नारायण कहने में भी संकोच होने लगता है !

भगवान् थोड़ा अप्रसन होकर नारद से कहने लगे .. " नाराद, अब आप ज्याद ही खीच रहे है सीधे सीधे बात पर आये "
छमा .., प्रभो ..छमा .. जैसे ही आप की इ मेल मिली .. सोचा , चलो आप को थोड़ा बिश्राम तो मिला लेकिन दुसरे दिन मुझे भारत से एक ब्रकिंग न्यूज मिली की नारायण किसी घपले में फंस गए है ! मन बिचलित हो उठा की कही मेरे नारारण .... !

" कैसा घपला , कौन सा घपला .. " जरा खुलकर बताओ मित्र भगवन जी ने उनसे कहा !

वहा पर आपके नाम राशी जिसका नाम भी नारायण है ! लोग उसे नो छमी नारायण के नाम से जानते है ! जो बहुत बहुत ऊँचे 2 आहोद पर रहकर , सता और कुर्शी के मद में रहकर उसने वो वो कारनामे किये ! वो वो काण्ड किये जिसका ब्यान करते मेरी जीभा कलंकित हो जाती है ! प्रभो, उन्होंने आपके नाम पर जो धबा लगाया है, अगर उसे किसी इम्पोरटिड डिटर्जन या केमिकल से भी धोये तो भी वो, साफ़ नही होगा !

पर येसा क्या किया है उसने , हमें पता भी तो चले !
रास लीला प्रभो रास लीला ... नारद ने गिडगिडते कहा ..... //
ओ आई सी ... याने हमरा अनुकरण किया है उसने... !

अनुकरण किया हिया होता तो कोई बात नहीं थी , प्रभो ... ! वो, तो, बांसुरी बजाते बजाते...., कहते कहते नारद जी थोड़ी देर चुप होगये .... उनकी इस चुपी को देखकर नारायण बोले ..." नाराद ,.आप हमरा इम्तिहान ना ले ?" नारद डरते डरते बोले.. " मै, और आप का इम्तिहान ..., तोबा ..तोबा ! मै, तो आप के माते राधे के प्रेम के वे रास लीला के बारेमे सोच रहा था ! प्रभो जब आप रास रचाते थे तो पूरा संसार आपके उस पवित्र लीला का रसास्वादन कर आत्म बिभोर हो जाता था लेकिन वहा तो वे , एक कमरे में बंद डी जी टल कैमरे के आगे ... छी.... छी ...... मुझे तो कहते हए भी ..... !

बीच में प्रभु बोले .. " उन्होंने हमारी रास लीला का उपसाह कर उसे भोग लीला बना दिया है ऐसा क्यों नहीं कहते ? " हा- हा यैसा ही किया ही उन्होंने नारद ने उत्तर दिया ! प्रभो , मुझे इस घ्रणित कार्यकर्म में कोई दिलचस्पी नहीं है लेकिन ... ?

"लेकिन क्या ...????? .. नारद , तुम पहेलियाँ जादा बुझाते हो ! साफ़ साफ़ कहो क्या कहना चाहते हो" प्रभु ने कहा !

मै आपका नाम उस व्यक्क्ति के नाम से जुड़ा होने पर थोडा बिचलित हूँ ! लोग गलियों ,मोहलों अखबारों टी बी पर एक ही बात कर रहे है और उसके उस भोग लीला को बार बार दिखा दिखा कर बस एक ही सवाल पूछ रहे है, और कह रहे है की , किसने किया ये उलटा काम ! तो सब एक ही जुबान से बोलते है " नारायण " ने ! उस नारायण ने अपने पद का दुपयोग जो किया सो किया परन्तु उसने आप के नाम का भी जम कर दुरपयोग किया है ! प्रभो , अगर जीवनदान मिले तो एक सुझाव है ...

"----- क्या .." ?

नारद ने डरते डरते कहा ... आप अपना नाम बदल दो ?

पराशर गौर
जनबरी १६, २०१० ३.४५ पर